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धर्मेन्द्र प्रधान ने इस्पात “चिंतन शिविर” का उद्घाटन किया

उद्योग जगत से प्राकृतिक संसाधनों को कतई निर्यात न करने की दिशा में कार्य करने, मूल्यवर्धन पर ध्यानकेंद्रित करने का आह्वान

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5 Dariya News

नई दिल्ली , 23 Sep 2019

Last updated on: Sep 23, 2019, 00:00 IST

केंद्रीय इस्पात और पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान ने आज इस्पात मंत्रालय द्वारा नई दिल्ली में आयोजित “चिंतन शिविर : जीवंत, दक्ष और वैश्विक तौर पर प्रतिस्पर्धी भारतीय इस्पात क्षेत्र ” में भाग लिया। इस आयोजन का उद्देश्य भारतीय इस्पात क्षेत्र को ज्यादा जीवंत, दक्ष और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने की योजना पर विचार मंथन करने के लिए सभी हितधारकों को एक साथ लाना है। इस अवसर पर इस्पात राज्य मंत्री श्री फग्गन सिंह कुलस्ते भी उपस्थित थे।उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए श्री प्रधान ने कहा कि राष्ट्र महत्वपूर्ण बदलाव लाने वाले निष्कर्षों को प्राप्त करने के लिए लंबी छलांग लगाने की आकांक्षा रखता है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के इस उद्धरण – भारत क्रमिक विकास को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं है का हवाला देते हुए श्री प्रधान ने कहा कि हम सभी को एकजुट होकर इस महत्वकांक्षा को पूरा करना होगा। उन्होंने कहा कि इस्पात उद्योग को भारत को 5 ट्रिलियन डॉलर वाली अर्थव्यवस्था बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभानी है।श्री प्रधान ने कहा कि आज विश्व भारत के साथ कारोबार करना चाहता है। उन्होंने कहा, “चिंतन शिविर को इस बात पर विचार करना चाहिए कि भारत को विश्व में इस्पात के क्षेत्र में कैसे अपनी साख बनानी है। हमें हर हाल में यह सुनिश्चित करना होगा कि हमारा इस्पात उद्योग ज्यादा किफायती बने, कारोबार के नए मॉडलों पर काम करें, अनुसंधान और विकास के प्रयास करें।” श्री प्रधान ने कहा कि हमें “भारत के प्राकृतिक संसाधनों को कतई निर्यात न करने” के आदर्श पर कार्य करना होगा। उन्होंने कहा कि सरकार मूल्यवर्धन को सुगम बनाने के लिए हरसंभव कदम उठाने की इच्छुक है।

श्री प्रधान ने कहा कि विशाल घरेलू बाजार और बढ़ती अर्थव्यवस्था के साथ भारत के इस्पात उपयोग में वृद्धि होना निश्चित है। इस्पात मंत्रालय के नए लोगो “इस्पाती इरादा”  का शुभारंभ करते हुए श्री प्रधान ने कहा कि हम सभी को देश में इस्पात के उचित उपयोग को बढ़ावा देने के लिए इस्पाती इरादा के साथ काम करना होगा और समाज को ज्यादा शक्तिशाली बनाना होगा। श्री प्रधान ने कहा कि पूर्वी भारत पर सरकार ध्यान केंद्रित करती आई है। प्रधानमंत्री द्वारा परिकल्पित मिशन पूर्वोदय राष्ट्रीय प्रगति को गति देने के लिए पूर्वी भारत की अवधारणा की दिशा में कार्य करने का प्रयास है। उन्होंने कहा “पूर्वी भारत में महत्वपूर्ण उपस्थिति रखने वाले इस्पात उद्योग की इस संबंध में महत्वपूर्ण भूमिका है। हम पूर्वी भारत को स्टील का केंद्र बनाने की दिशा में कार्य कर रहे हैं।” श्री प्रधान ने कहा कि वह माननीय प्रधानमंत्री के “न्यूनतम सरकार अधिकतम गवर्नेंस” के विचार पर मजबूती से विश्वास रखते हैं और भारतीय इस्पात क्षेत्र की वृद्धि को सुगम बनाने की दिशा में संकल्पबद्ध है।इस अवसर पर इस्पात राज्य मंत्री श्री फग्गन सिंह कुलस्ते ने कहा कि इस्पात किसी भी आधुनिक अर्थव्यवस्था के विकास के लिए महत्वपूर्ण है और औद्योगिक विकास का आधार समझा जाता है। श्री कुलस्ते ने कहा कि इस्पात उद्योग को क्षमता के विस्तार पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए और मांग के अनुसार उत्पादन बढ़ाने का प्रयास करना चाहिए।इस्पात सचिव श्री बिनोय कुमार ने अपने संबोधन में कहा कि सरकार देश के आर्थिक विकास में योगदान देने वाले लौह और इस्पात उद्योग के विकास के लिए समर्पित है। उन्होंने कहा कि उद्योग जगत के लिए कच्चे माल की सुरक्षा और लॉजिस्टिक तथा वित्तीय सक्षमता पर विशेष बल दिया जाना चाहिए।“इस्पाती इरादा” अभियान का लक्ष्य देश में इस्पात के उपयुक्त उपयोग को बढ़ावा देना तथा समाज को और अधिक बल प्रदान करना है। इस्पात मंत्रालय की ब्रैंड एंबेसडर पी.वी.सिंधु ने वीडियो संदेश के माध्यम से इस्पाती इरादा अभियान के शुभारंभ पर प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने माननीय प्रधानमंत्री की ओर से किए गए एकल उपयोग वाले प्लास्टिक के उन्मूलन के आह्वान पर बल दिया।  

 

Tags: Dharmendra Pradhan , Faggan Singh Kulaste

 

 

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