राज्यपाल उर्मिला सिंह, जो हिमाचल प्रदेश बाल कल्याण परिषद की अध्यक्ष भी हैं, ने परिषद द्वारा कार्यान्वित की जा रही गतिविधियों में तेजी लाने की आवश्यकता पर बल दिया ताकि उनके कल्याण के लिए चलाई जा रही योजनाओं से पात्र बच्चे लाभान्वित हो सकें। राज्यपाल आज यहां परिषद की आम सभा की बैठक को सम्बोधित कर रही थीं। राज्यपाल ने कहा कि परिषद की गतिविधियों को विस्तार देने के लिए ठोस प्रयास किए जाने की आवश्यकता है। इन गतिविधियों में लोगों को कल्याण गतिविधियों में भाग लेने के साथ-साथ कोष के लिए उदारतापूर्वक अंशदान के लिए प्रेरित करने की आवश्यकता है ताकि सरकार के प्रयासों को सहयोग मिल सके। उन्होंने कहा कि समाज की यह जिम्मेदारी है कि वह बच्चों के समग्र विकास के लिए उचित अवसर उपलब्ध करवाए। इसलिए अधिक से अधिक लोगों को परिषद एवं उसकी गतिविधियों के साथ जोड़ा जाना चाहिए।
श्रीमती सिंह ने परिषद को समय-समय पर अपनी गतिविधियों की प्रगति के अनुश्रवण के निर्देश दिए। उन्होंने बाल गृहों में सभी मूलभूत सुविधाएं सुनिश्चित बनाने के भी निर्देश दिए। उन्हांेने कहा कि परिषद एवं संगठनों द्वारा चलाए जा रहे स्कूलों एवं गृहों में बच्चों को बेहतर माहौल उपलब्ध करवाया जाना चाहिए ताकि ये बच्चे जिम्मेदार नागरिक के साथ-साथ अच्छे इंसान बन सकें। उन्होंने इन संस्थानों की दक्षता में और सुधार के लिए नियमित निरीक्षण की आवश्यकता पर भी बल दिया।मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने बैठक को सम्बोधित करते हुए कहा कि बाल गृहों एवं स्कूलों में विशेष बच्चों के लिए ‘आदर्श वातावरण’ विकसित किया जाना चाहिए। उन्होंने इन गृहों को चलाने में नवीनता लाने की आवश्यकता पर बल दिया ताकि बच्चे प्रेम, स्नेह एवं घर का माहौल प्राप्त कर सकें। उन्होंने अधिकारियों को नीति तैयार करने की संभावनाओं का पता लगाने के निर्देश दिए जिसके अन्तर्गत बुजुर्ग दंपत्तियों को बाल गृहों की जिम्मेवारी से जोड़ कर लक्ष्य को हासिल किया जा सके ताकि बच्चों को वात्सल्य की अनुभूति हो सके।मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में विभिन्न शिशु कल्याण गतिविधियों पर अगले वित्त वर्ष में 4.42 करोड़ रुपये व्यय करने का प्रस्ताव है। उन्होंने कहा कि बच्चों का कल्याण सरकार की प्राथमिकताओं में से एक है तथा परिषद की गतिविधियों के कार्यान्वयन के लिए आवश्यक अनुदान उपलब्ध करवाया जाएगा। उन्होंने कहा कि बाल गृहों के अधिकारियों को जवाबदेह बनाया जाएगा तथा बाल गृह परिसर में उचित सुविधाएं सुनिश्चित बनाई जाएंगी।
उन्होंने विभाग को ढली स्थित मूक एवं बधिर स्कूल को स्तरोन्नत कर जमा दो करने के लिए योजना तैयार करने तथा इसे आदर्श संस्थान के रूप में विकसित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि परिषद द्वारा चलाए जा रहे सभी संस्थानों में शिक्षकों की उपलब्धता को भी सुनिश्चित बनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि वे व्यक्तिगत तौर पर इन संस्थानों का दौरा करेंगे ताकि यहां उपलब्ध करवाई जा रही सेवाओं की गुणवत्ता का अनुश्रवण किया जा सके। उन्होंने विशेष बच्चों की देखभाल के लिए प्रशिक्षित शिक्षकों एवं विशेष प्रशिक्षकों को उपलब्ध करवाने की आवश्यकता पर भी बल दिया। उन्होंने कहा कि इन बच्चों को दया भाव की दृष्टि से देखन की बजाए विशेष योग्यता के आधार पर देखा जाना चाहिए।
सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री डा. कर्नल धनीराम शांडिल ने इस अवसर पर विभाग द्वारा कार्यान्वित की जा रही विभिन्न योजनाओं एवं गतिविधियों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने कहा कि योजनाओं को सही परिप्रेक्ष्य में कार्यान्वित करने के हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं ताकि बच्चे व्यापक तौर पर लाभान्वित हो सकें।अतिरिक्त मुख्य सचिव, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता श्री पी.सी. कपूर ने बैठक की कार्यवाही का संचालन किया।प्रधान सचिव, वित्त डा. श्रीकांत बाल्दी, बाल एवं महिला विकास विभाग की निदेशक श्रीमती मधुबाला शर्मा तथा परिषद के सदस्यों ने भी इस अवसर पर अपने बहुमूल्य सुझाव दिए।राज्यपाल के सचिव श्री आर.डी. धीमान, प्रदेश सरकार के वरिष्ठ अधिकारी तथा राज्य बाल कल्याण परिषद के सदस्य भी बैठक में उपस्थित थे।सामाजिक कार्यकर्ता श्रीमती राज कुमारी सोनी को सर्वसम्मति से परिषद का महासचिव नियुक्त किया गया।