Saturday, 06 June 2026

 

 

खास खबरें देश की कुल ग्रीन एनर्जी का पांचवां हिस्सा गुजरात से आता है : नरेंद्र मोदी हरपाल सिंह चीमा द्वारा पी.एस.टी.सी. की समीक्षा बैठक मल्लिकार्जुन खड़गे ने राज्यसभा नामांकन दाखिल किया, राहुल गांधी और डीके शिवकुमार रहे मौजूद भगवंत मान सरकार द्वारा सख्त समय-सीमा और जवाबदेही के साथ 'रंगला पंजाब विकास स्कीम' में तेजी : हरपाल सिंह चीमा खराब रौशनी की स्थिति में लाल की जगह गुलाबी गेंद के प्रयोग की मंजूरी आईसीसी का सकारात्मक कदम : गौतम गंभीर लोक मिलनी के दौरान जय कृष्ण सिंह रौड़ी ने मौके पर ही लोगों की समस्याओं का समाधान करवाया कोई टोंटी चोरी कर रहा, कोई पानी बहा रहा, ऐसे लोगों को टोकें : सीएम योगी आदित्यनाथ पर्यावरण संरक्षण को बनाएं जीवनशैली का हिस्साः सुखविन्द्र सिंह सुक्खू अमित शाह ने त्रिपुरा बॉर्डर का दौरा किया, स्मार्ट बॉर्डर विजन का अनावरण किया विश्व पर्यावरण दिवस : सीएम रेखा गुप्ता ने कहा, '18 नमो ऑक्सीजन पार्कों के लिए पौधरोपण अभियान शुरू' हमारी जीवन शैली बिना प्रकृति के अधूरी : सीएम मोहन यादव भोजन-सुरक्षित भविष्य का निर्माण : नीति और भोजन का सुमेल विश्व पर्यावरण दिवस पर राहुल गांधी ने उठाए ग्रेट निकोबार परियोजना पर सवाल, बोले- विकास जरूरी, लेकिन प्रकृति की कीमत पर नहीं 54 एलपीयू स्टूडेंट्स ने भारती एयरटेल स्कॉलरशिप में ₹5 करोड़+ हासिल किए साथ ही वर्ल्ड एनवायरनमेंट डे पर 180 पौधे लगाने की मुहिम चलाई राज्य सरकार और यूएनडीपी के मध्य परिपत्र अर्थव्यवस्था एवं सतत विकास को बढ़ावा देने के लिए समझौता ज्ञापन हस्ताक्षरित सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने चिनार वृक्षारोपण अभियान के प्रथम चरण का शुभारंभ किया भारत की विकास रफ्तार तेज, यात्री वाहन बिक्री में जोरदार उछाल : पीयूष गोयल सीमा पार संचालित हथियार, नशा और हवाला नेटवर्क का भंडाफोड़ कविन्द्र गुप्ता ने विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर मिनी मैराथन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया विश्व पर्यावरण दिवस पर गुलाब चंद कटारिया ने किया वृक्षारोपण आरबीयू ने ‘एक पेड़ माँ के नाम’ वृक्षारोपण अभियान के साथ विश्व पर्यावरण दिवस मनाया

 

कश्मीर मसला : ट्रंप के बयान से अनावश्क पैदा हुई घबराहट

Listen to this article

Web Admin

Web Admin

5 Dariya News

नई दिल्ली , 24 Jul 2019

Last updated on: Jul 24, 2019, 00:00 IST

गृहमंत्री अमित शाह कश्मीर समस्या का समाधान करने के लिए विभिन्न विकल्पों पर विचार कर रहे हैं। ऐसे अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के हालिया बयान से अनावश्यक घबराहट पैदा कर दिया। वेस्टफेलियन संप्रभुता प्रणाली व कानून के तहत कश्मीर भारत का आंतरिक मसला है, लेकिन कथित तौर पर विलय के विवादित स्वरूप और माउंटबेटन और नेहरू द्वारा मसले को संयुक्त राष्ट्र में ले जाने से यह द्विपक्षीय मसले में बदल गया। प्रदेश को आजाद करना और कुछ स्वायत्तता प्रदान करना दो भौगोलिक खंड लद्दाख और जम्मू संभाग की भी क्षेत्रीय आकांक्षाओं को पूरा करने का एक विकल्प रहा है। स्वायत्तता की चाहत न सिर्फ घाटी के लोगों की है बल्कि जम्मू और लद्दाख की ओर से भी भारत के संविधान के उसी दायरे के तहत क्षेत्रीय स्वायत्तता की मांग की जा रही है। लेकिन सुन्नी बहुल घाटी ने पूरे प्रदेश को बंधक बना लिया है यही कारण है कि अन्य संभागों को मुक्त कराने की आवश्कता है। 

भारत के संविधान के दायरे में तथाकथित इस स्वायत्तता और संविधान के अनुच्छेद 370 के द्वारा प्रदत्त विशेष दर्जा का क्या अभिप्राय है? भारत के प्रधानमंत्रियों ने संविधान के दायरे के तहत ही एक संकल्पना व्यक्त की है। वर्तमान प्रधानमंत्री द्वारा प्राप्त परिस्थिति का क्या लाभ है? विश्लेषकों की राय में दिल्ली समझौता भारत और कश्मीर के बीच अनुबंधात्मक संबंध में एक निर्णायक क्षण था।अब्दुल्ला के दिमाग में संदेह का बीजारोपण हुआ और सही मायने में इससे भारत के साथ एकीकरण का मार्ग सुगम हुआ और स्वायत्तता प्रदान नहीं किया गया जैसा कि अनुच्छेद 370 में उल्लेख किया गया है। 

जब कोई अब तक प्रकाशित दस्तावेज के उपयोग करते हुए 70 साल पुराने कश्मीर के सवाल पर विचार करता है तो यह सफर ज्यादा दिलचस्प बन जाता है और जल्द ही समझ में आ जाता है कि इस समस्या को किसी एक रंगे चश्मे से देखने की आवश्यकता नहीं है। अमित शाह को मालूम है कि उनको स्थानीय आतंकवाद का खात्मा करना है और सीमापार से घुसपैठ को बंद करना है। इसके अलावा, भारतीय संघ के साथ बड़े पैमाने पर आवागमन व समन्वय बनाने के साथ-साथ चुनाव करवाकर प्रदेश में लोकतांत्रिक प्रक्रिया बहाल करना है। अगर, समस्याओं के समाधान के तरकस में परिसीमन आयोग की स्थापना, विवादास्पद अनुच्छेद 35 एक को समाप्त करना और अनुच्छेद 370 को निरस्त करने पर विचार करने की आवश्यकता है तो यह हो सकता है। पिछले कई दशकों से देश में बनने वाले एक के बाद एक प्रधानमंत्री ने कश्मीर मसले को लेकर कई दिखावटी बातचीत की। उनमें से वे भी शामिल हैं जिन्हें सही मायने में प्रदेश की चिंता थी। जवाहरलाल नेहरू की राय में जम्मू-कश्मीर उनके लिए भारतीय धर्मनिरपेक्षवाद का 'शॉप विंडो' है। कई अन्य ने वादे किए लेकिन किसी ने इस दिशा में कुछ काम नहीं किया।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कहते हैं कि वह संविधान के दायरे में स्थायी समाधान चाहते हैं। अगर प्रधानमंत्री मोदी अतीत से निकलकर सार्थक हल चाहते हैं तो उनको परिवर्तनकारी बदलाव के मार्ग का अनुसरण करना होगा जिसमें आवागमन और समन्वय का वादा किया गया है। इसके लिए अनुच्छेद 35 ए के तहत स्थायी आवास के प्रावधान को समाप्त करने की आवश्कता है। 

 

Tags: Khas Khabar

 

 

related news

 

 

 

Photo Gallery

 

 

Video Gallery

 

 

5 Dariya News RNI Code: PUNMUL/2011/49000
© 2011-2026 | 5 Dariya News | All Rights Reserved
Powered by: CDS PVT LTD