पंजाब को देश के सर्वोत्तम पोर्क (सूअर) मीट बाज़ार के तौर पर स्थापित करने के लिए राज्य सरकार ने नाभा में अंतरराष्ट्रीय स्तर का ‘स्टेट ऑफ आर्ट न्यूकलियस फार्म’ स्थापित किया है जिस के द्वारा पालकों को वार्षिक 4000 नसली सूअर के बच्चे सप्लाई किये जा रहे है। इस संबंधी जानकारी देते हुए पशु पालन, डेयरी विकास और मछली पालन मंत्री, पंजाब बलबीर सिंह सिद्धू ने कहा कि कृषि विभिन्नता प्रोग्राम अधीन किसानों की वार्षिक आय में वृद्धि करने के लिए राज्य सरकार ने सूअर फार्मों की गुणवत्ता और उत्पादन बढ़ाने के लिए विशेष पहलकदमियों की शुरुआत की है। उन्होंने कहा कि हम 2017 -18 में सूअर मीट का उत्पादन बढ़ा कर 1.02 हज़ार टन कर दिया है, जो कि 2016 -17 में 0.96 हज़ार टन था। राज्या में मौजूद सूअर फार्मों के विवरण देते हुए पशु पालन मंत्री ने बताया कि पंजाब में करीब 817 सूअर फार्म पेशेवर और वैज्ञानिक तकनीक से चलाए जा रहे हैं, जिनमें 26,000 नसली सूअर मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि पंजाब में सूअरों की संख्या लगभग 60,000 है और अब विभाग राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सूअरों की माँग को पूरा करने के लिए किसानों को आधुनिक तकनीकें अपनाने के लिए उत्साहित कर रहा है। उन्होंने बताया कि सूअरों के उत्पादन और गुणवत्ता में विस्तार करने के लिए राज्य सरकार द्वारा नाभा में एक आधुनिक सीमन बैंक स्थापित किया जा रहा है जो सूअर फार्मों के मानक उत्पादन को बढ़ाने के लिए मील पत्थर साबित होगा।
सिद्धू ने कहा कि पंजाब 11.2 प्रतिशत की विकास दर से मीट के उत्पादन में 7वें स्थान पर है। उन्होंने आगे कहा कि सूअर पालकों द्वारा वाइट यॉर्क शाऐर और कुछ देसी नसलों ही पंजाब में इस्तेमाल की जाती हैं परन्तु किसान बेकन, हाम, लार्ड, पोर्क, साऊसेज़स आदि सूअर का मीट दूसरे देशों में भेजकर अच्छी कमाई कर सकते हैं। उन्होंने आगे कहा कि हमारा मुख्य लक्ष्य विश्व के खपतकारों के लिए उच्च गुणवत्ता और बीमारी रहित सूअर मीट मुहैया करवाना है जिसको हासिल करने के लिए पंजाब सरकार किसानों को विंभिन्न सेवाएं मुहइया करवा के उच्च कोटी के सूअर फार्म स्थापित कर रही है। पशु पालन मंत्री ने आगे बताया कि देश में सूअर के मीट बाज़ार का मुकाबला करने के लिए विभाग द्वारा अब तक 2569 किसानों को सूअर पालन का वैज्ञानिक प्रशिक्षण दिया गया है। जिस के उपरांत पशु पालन विभाग द्वारा किसानों का नये सूअर फार्म स्थापित करने के लिए तकनीकी मार्ग दर्शन भी किया जाता है। उन्होंने आगे बताया कि सूअर पालन कारोबार से जुड़े छोटे और ज़मीन रहित किसान, बेरोजगार और अनपढ़ नौजवानों और विशेष तौर पर ग्रामीण महिलाएं की स्थायी आय यकीनी बनाने के लिए विभाग द्वारा समान अवसर प्रदान किये जा रहे हैं जिससे राज्य में कम लागत के साथ ही उच्च स्तर के सूअर फार्म स्थापित किये जा सकें। उन्होंने कहा कि यह दिलचस्प तथ्य है कि सिफऱ् 7 से 9 महीने के समय दौरान ही सूअरों का भार 80 -100 किलोग्राम तक हो जाता है जिसके उपरांत वह बाज़ारीकरन के लिए तैयार हो जाते हैं