हिमाचल प्रदेश के बहादुर सैनिकों ने देश की आन-बान के लिए हमेशा सर्वाच्च बलिदान दिए हैं, जिसके बलबूते प्रदेश को ‘वीर भूमि’ के रूप में पहचान मिली है। काफी अधिक संख्या में प्रदेश के युवा देश के सैन्य बलों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। हमारे सैनिकों ने पहले स्वतंत्रता आंदोलन में बलिदानों की गाथा लिखी और उसके बाद देश की सरहदों और अखंडता कायम रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते आ रहे हैं। प्रदेश के वीर सपूतों ने बहादुरी और बलिदानों की जो मिसाल पेश की है, प्रदेश और देश को उस पर नाज है। सैनिकों और पूर्व सैनिकों के हितों की रक्षा के लिए प्रदेश सरकार प्रतिबद्ध है और उनके कल्याण के लिए विभिन्न कदम उठाए गए हैं। सरकार यह सुनिश्चित बना रही है कि देश के लिए अपना सर्वस्व दांव पर लगाने वाले सैनिकों को श्रेष्ठ सेवाएं उपलब्ध हों। उनके कल्याण के लिए अनेक योजनाएं कार्यान्वित की जा रहीं हैं जिनमें सरकारी नौकरी में आरक्षण, ऋण सुविधा, स्वरोज़गार के साधनों का सृजन और उनके बच्चों के लिए छात्रवृत्ति योजनाएं तथा अन्य प्रोत्साहन आदि शामिल हैं।
शौर्य पदक और अन्य विशिष्ट सम्मान प्राप्त करने वाले सैनिकों के लिए प्रदेश सरकार ने वार्षिकी की दर में वृद्धि की है। पूर्व सैनिकों, उनकी विधवाओं और आश्रितों के पुनर्वास के हलए सरकार 34 कल्याण योजनाएं कार्यान्वित कर रही है। शौर्य चक्र विजेताओं को राज्य में निःशुल्क यात्रा की सुविधा प्रदान की जा रही है। युद्ध जागीर की राशि को अप्रैल, 2013 में 2000 रुपये से बढ़ाकर 5000 रुपये किया गया है। इसी तरह, सी.एस.डी कैंटीनों में वैट को चार प्रतिशत से घटाकर दो प्रतिशत किया गया है और उना में सीएसडी डिपो व आदर्श छावनी खोलने का मामला सरकार के विचाराधीन है। पूर्व सैनिकों और उनकी विधवाओं को मिलने वाली सामाजिक सुरक्षा पेंशन को 400 रुपये से बबढ़ाकर 500 रुपये किया गया है। प्रदेश सरकार ने पूर्व सैनिक लीग को 2 लाख रुपये का वार्षिक अनुदान बहाल किया है जिसे पूर्व भाजपा सरकार के कार्यकाल के दौरान बंद कर दिया गया था। हाल ही में हिमाचल प्रदेश मंत्रिमंडल ने सैनिक कल्याण विभाग में उप निदेशकों के तीन पद भरने को स्वीकृति प्रदान की है जिससे विभाग की कार्यप्रणाली और सुदृढ़ होगी और सैनिकों एवं पूर्व सैनिकों के हित में किए जा रहे कार्यांे को तेज़ी मिलेगी।अपनी सेवा के दौरान हुए वीरगति को प्राप्त होने वाले सैनिकों और उनके आश्रितांे को रोज़गार प्रदान करने के उद्देश्य से हिमाचल प्रदेश सरकार ने सैनिक कल्याण विभाग के निदेशक के नियंत्रण में एक विशेष प्रकोष्ठ की स्थापना की है। सरकार ने अभी तक 160 पूर्व सैनिकों को विभिन्न विभागों, बोर्डांे और संस्थानों में रोज़गार उपलब्ध करवाया है। पूर्व सैनिकों को रोज़गार के पर्याप्त अवसर उपलब्ध करवाने के उद्देश्य से ए.सी.सी. सीमेंट कम्पनी, बरमाणा से 40 प्रतिशत, अंबुजा सीमेंट दाड़लाघाट से 10 प्रतिशत तथा जे.पी. सीमेंट प्लांट बागा से 5 प्रतिशत क्लिंकर व सीमेंट ढुलाई का कार्य पूर्व सैनिकों व उनके आश्रितों को सौंपा गया है।
सैनिकों और पूर्व सैनिकों के बच्चों को मेडिकल कॉलेज, डेंटल कॉलेज, इंजीनियरिंग कोर्स, राजकीय पॉलीटैक्निक और प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय में आरक्षण की सुविधा प्रदान की जा रही है। पूर्व सैनिकों एवं सेवारत सैनिकों के बच्चों को इंजीनियरिंग व मेडिकल प्रवेश परीक्षा के लिए निशुल्क कोचिंग की सुविधा दी जा रही है। इसके अलावा, एनडीए, आईएमए, ओटीए में प्रवेश के लिए प्रशिक्षण पर होने वाले खर्च की भी सैनिक कल्याण विभाग प्रतिपूर्ति करता है। प्रदेश सरकार ने सैन्य बलों के लिए भरती में जनसंख्या अनुपात के मापदंड को हटाने के लिए केंद्र सरकार से मामला उठाया है ताकि प्रदेश के अधिक से अधिक युवा सेना में भरती पा सकें। इसके अलावा, प्रदेश में सैन्य बलों के लिए राज्य प्रशिक्षण अकादमी खोलने की मांग भी पुरज़ोर ढंग से उठाई गई है। एक रैंक, एक पैंशन के लंबित मामले में केंद्र सरकार ने प्रदेश की अधिकांश मांगें मान लीं हैं लेकिन कुछ मुद्दे अभी भी लंबित हैं जिन्हें फिर से केंद्र से उठाया जा रहा है ताकि प्रदेश के पूर्व सैनिक लाभान्वित हो सकें।