राज्यपाल एन एन वोहरा ने आज जम्मू व कश्मीर आरटीआई अधिनियम 2009 को लागू करने पर जम्मू व कश्मीर राज्य सूचना आयोग द्वारा आयोजित एक दिवसीय सैमिनार का उद्घाटन किया।सूचना का अधिकार जिस तरह से कार्य प्रणाली में पारदर्शिता तथा प्रशासन में जबावदेही लाता है, के तरीके के महत्व पर बल देते हुए राज्यपाल ने कहा कि जन अधिकारियों की कार्यप्रणाली में स्पश्टता सरकार और लोगों के बीच भरोसे को मजबूत बनाती हैं जो लोकतंत्र को बनाये रखने के लिए अनिवार्य है।राज्यपाल ने कहा कि स्थिति सुधार की कार्यप्रणाली के लिए सार्वजानिक कार्यालयों में रिकार्डो को तरीके से रखने की आवश्यकता है। इसके अतिरिक्त कर्मचारियों की विचारधारा में एक विशेश बदलाव लाने की आवश्यकता है ताकि पारम्परिक रिकार्डो को पारदर्शी तरीके से रखा जा सके।उन्होंने सरकारी संस्थानों तथा जनाधिकारियों से आग्रह किया कि वे अपनी विकास गतिविधियों में प्राप्त प्रगति तथा उनके लिए आवंटित निधि के उपयोग को नियमित आधार पर सार्वजानिक किया जाना चाहिए। उन्होंने सार्वजानिक कार्यक्रमों को नियमित आधार पर आयोजित करने का आग्रह भी किया ताकि लोगों को केन्द्रीय तथा राज्य सरकार के विभागों एवं एजैसियों की विभिन्न योजनाओं एवं नीतियों के बारे में शिक्षित किया जा सके।केन्दी्रय सूचना आयोग नई दिल्ली के सूचना आयुक्त विमल जुलका ने कहा कि पारदर्शिता एवं जबावदेही लोकतंत्र के स्तंब है तथा आरटीआई अधिनियम नागरिकों के सशक्तिकरण में बढाया गया एक कदम है।जम्मू व कश्मीर मुख्य सूचना आयुक्त खुर्शीद अहमद गनई ने एसआईसी की प्रगति रिपोर्ट पेश की। उन्होंने बताया कि वर्श 2016-17 के दौरान जिन अधिकारियों द्वारा 20297 आवेदन प्राप्त किये गये थे तथा वर्श 2017-18 के दौरान एसआईसी द्वारा 488 द्वतीय अपीलों में से 394 का निपटारा किया गया ।मुख्य सचिव बी बी व्यास ने कहा कि आरटीआई अधिनियम को लागू करना सरकार का नैतिक कतर्व्य है तथा उन्होंने अधिनियम के अंतर्गत समय पर सूचना देने तथा समस्याओं के निपटारे हेतु सरकारी विभागों तथा राज्य सूचना आयोग के बीच गहरा तालमेल बनायें रखने के लिए एक फ्रेमवर्क स्थापित करने का सुझाव दिया।राज्य सूचना आयुक्त मोहम्मद अशरफ मीर ने इस अवसर पर धन्यवाद प्रस्ताव पेश किया।