राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने मंगलवार को 'नीट' परीक्षा पर एक अध्यादेश पर हस्ताक्षर कर दिए। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा ने कहा कि इससे नीट को वैधानिक दर्ज प्राप्त होगा।अध्यादेश के जरिए कुछ राज्यों के बोर्डो को राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (एनईईटी) की परिधि से एक साल के लिए बाहर रखा गया है।नीट से जिन राज्यों को छूट दी गई है, उनमें तमिलनाडु, केरल, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, गुजरात, महाराष्ट्र और पंजाब शामिल हैं।केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा ने यहां एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि राज्य बोर्ड अब स्नातक मेडिकल पाठ्यक्रमों की प्रवेश परीक्षा आयोजित करने में सक्षम होंगे, लेकिन दिसंबर में होने वाली स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों की प्रवेश परीक्षा नीट के तहत ही होगी।
नड्डा ने कहा कि केंद्र सरकार नीट लागू करने को प्रतिबद्ध है, लेकिन राज्यों ने चिंता जाहिर की थी, जिस पर ध्यान देना पड़ा है।केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने कहा, "राज्य सरकारें छूट चाहती थीं और उनके मुद्दे पाठयक्रमों की समानता और क्षेत्रीय भाषाओं में परीक्षा के विकल्प से संबंधित थे।"उन्होंने कहा, "काफी विचार-विमर्श के बाद हम एक अध्यादेश लेकर आए, जो नीट को संवैधानिक दर्जा देता है और जहां हम राज्य सरकारों को परीक्षा आयोजित करने का एक विकल्प देते हैं, और जो राज्य परीक्षा करा चुके हैं, उन्हें इस दिशा में आगे बढ़ने की इजाजत देते हैं।"