राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के बाद अब लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार हिमाचल प्रदेश के विधायकों को वैधानिक और लोकतांत्रिक कर्तव्यों का पाठ पढ़ाएंगी। प्रवक्ता बी.बी.बुतैल ने आईएएनएस को बताया कि मीरा कुमार सोमवार को स्वर्ण जयंती समारोह के दौरान विधानसभा को संबोधित करेंगी।उन्होंने कहा कि इस अवसर पर 160 पूर्व विधायकों को भी बुलाया गया है। प्रवक्ता ने कहा, "प्रणब मुखर्जी का भाषण ऐतिहासिक था। इसी तरह, मीरा कुमार विधायकों को उनकी जिम्मेदारी के संदर्भ में मार्गदर्शन देंगी, जिनके लिए वे जवाबदेह हैं।"पूर्व में काउंसिल चैंबर के रूप में चर्चित विधानसभा भवन का उद्घाटन 27 अगस्त 1925 को लार्ड रीडिंग ने किया था, जहां ब्रिटिश राज में केंद्रीय विधानसभा अपने ग्रीष्मकालीन सत्र का आयोजन करती थी।
उन्होंने बताया कि इसी विधानसभा में मोती लाल नेहरू ने लाला लाजपत राय के समर्थन से 1925 में महिलाओं को मतदान का अधिकार देने का प्रस्ताव लाया था। यह प्रस्ताव सर्वसम्मति से स्वीकार लिया गया था।बुतैल ने कहा, "आजादी के बाद हिमाचल प्रदेश के पहले मुख्यमंत्री वाई.एस.परमार की अध्यक्षता में कई महत्वपूर्ण, प्रगतिशील और सामाजिक-आर्थिक कानून जैसे हिमाचल प्रदेश पंचायती राज कानून (1951), एबोलिशन ऑफ बिग लैंडेड ईस्टेट्स और भूमि सुधार कानून (1953) को पारित किया गया। पिछले अप्रैल तक 1,117 विधेयक विधानसभा में पारित हो चुके हैं।"राष्ट्रपति ने 24 मई को अपने संबोधन में संसद और राज्य विधानसभाओं में गतिरोध पर चिंता प्रकट करते हुए इस समस्या के समाधान की मांग की थी।प्रवक्ता ने कहा, "तीन डी- डिबेट (बहस), डिसेंट (असहमति) और डिसीजन (फैसला) संसद की कार्यवाही का सार हैं लेकिन चौथे डी- डिसरप्शन (गतिरोध) का प्रभाव बढ़ गया है, कार्यवाही को बाधित कर रहा है और संसद के महत्व को कम कर रहा है। चौथे डी से बचना चाहिए।"बुतैल ने कहा कि स्वर्ण जयंती समारोह के लिए कई कार्यक्रमों के आयोजन की योजना है।