पंजाब राज्य अनुसूचित जाति आयोग ने रविवार को राज्य सरकार से एक ऐसी योजना बनाने को कहा कि चाहे किसी भी जाति और धर्म का हो, गांवों एवं शहरों में सबके लिए अंतिम संस्कार के लिए एक ही श्मशान हो। आयोग के अध्यक्ष राजेश बाघा ने कहा कि पंजाब के अधिकांश गांवों में अभी अलग-अलग श्मशान हैं। इस परिपाटी को खत्म करने का आह्वान करते हुए बाघा ने कहा कि सभी गांवों और शहरों में आबादी को देखते हुए अंतिम संस्कार के लिए केवल एक ही मैदान होना चाहिए।
उन्होंने कहा, "सांप्रदायिक सौहार्द्र एवं भाई-चारे को और मजबूत बनाने के लिए सामूहिक श्मशान की जरूरत है। इससे सामाजिक बुराइयों का अंत होगा।" बाघा ने कहा है कि आयोग ने पंजाब के ग्रामीण विकास और पंचायत विभाग को निर्देश जारी किया है। उसने सार्वजनिक श्मशान भूमि बनाने के लिए एक योजना तैयार की है। अध्यक्ष ने कहा कि जो गांव इस तरह के सामूहिक श्मशान भूमि के लिए इच्छुक होंगे, उनमें से प्रत्येक को पांच-पांच लाख रुपये भी दिए जाएंगे।
मौजूदा श्मशानों को सरकार से नियमित अंतराल पर अनुदान भी मिलता है।पंजाब में 12 हजार से अधिक गांव हैं। आयोग के प्रमुख ने कहा कि श्मशानों से पर्यावरण को कम नुकसान हो, प्रदूषण कम फैले और पेड़ कम काटे जाएं, इसलिए विद्युत शवदाह की सुविधा मुहैया करानी चाहिए।आयोग के पास श्मशान भूमि का मामला पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के वकील एच. सी. अरोड़ा ने लाया था।