नशे की समस्या को और प्रभावी तरीके से निपटने के लिए पंजाब पुलिस ने बहुपक्षीय रणनीति तैयार की है जिसके तहत जहाँ नशे की उपलब्धता विरुद्ध सख्त नीति अपनाई जा रही है वहीं तस्करी के लिए इस्तेमाल किए जा रहे क्षेत्रों /रूटों और तस्करों के मददगारों की शिनाख्त कर उनके विरुद्ध कानूनी कार्यवाही शुरु की जा रही है। इसके अलावा नशे के मामलों में भगौड़ों और पैरोल पर जा कर भागने वालों को काबू कर उनकी चल और अचल जायदाद कानून अनुसार जब्त करने के लिए भी विशेष अभियान शुरू किया जा रहा है। एक अन्य महत्वपूर्ण निर्णय अनुसार नशे की रोकथाम के लिए पंजाब पुलिस के खुफिया विभाग के अंतर्गत मौहाली और फिरोजपुर में च्विशेष आपरेशन सैलज् स्थापित करने का भी फैसला लिया गया है।आज यहाँ पी..पी.ए. फिलौर में जोनों के आई.जी., पुलिस कमीश्नरों के साथ नशे की तस्करी विरुद्ध चल रहे अभियान की समिक्षा करते हुए डी.जी.पी. श्री सुरेश अरोड़ा ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे नशे की उपलब्धता विरुद्ध च्बिल्कुल बर्दाश्त नहींज् (जीरो टॉलरैंस पॉलिस) नीति अपनाएं।
उन्होंने कहा कि यह जरूरी हो गया है कि तस्करी वाले क्षेत्रों और तस्करों की मदद करने वालों की पहचान की जाये जिससे उनके विरुद्ध आगे से कानूनी मुहिम शुरू की जा सके।डी.जी.पी. ने फील्ड अधिकारियों को यह भी निर्देश दिए कि वे नशे के मामलों में भगौड़ों और पैरोल पर जा कर वापस न लौटने वालों की गिरफ्तारी के लिए भी विशेष प्रयत्न करें। बड़े तस्करों बारे जानकारी एकत्रित कर नशे की उपलब्धता और सप्लाई कड़ी को तोडऩे पर जोर देते हुए डी.जी.पी. ने कहा कि हमें नशे विरुद्ध लड़ाई को सार्थक परिणाम तक पहुंचाना होगा।नशा तस्करों को कड़ी सजा दिलाने वैज्ञानिक तरीकों से सबूत एकत्रित करने पर बल देते हुए उन्होंने कहा कि नशे के मामलो में निर्धारित समय में चार्जशीट फाईल करनी सुनिश्चित की जाये। उनहोंने यह भी कहा कि एन.डी.पी.एस. एक्ट की धारा एस(६८) के अंतर्गत तस्करों की तरफ से तस्करी कर बनाई गई जायदाद को जब्त करने मामलों की वित्तीय पक्षों से गहराई के साथ जांच की जाये। इसके अलावा तस्करी वाले मामलों विरुद्ध अदालती कार्यवाही दौरान विशेष अधिकारियों की नियुक्ति करने के भी आदेश दिए गए हैं। जो केस की सुनवाई दौरान विशेष अधिकारी मुकम्मल पैरवी कर सकें। डी.जी.पी. ने यह भी कहा कि प्रतिबंधित दवाओं की नशे के लिए बिक्री को रोकने चीफ ड्रग कंट्रोलर और ड्रग इंस्पेक्टरों के साथ लगातार संबंध रखा जाये।
नशे की समाप्ति के लिए लोगों की भागीदारी और सहयोग को बहुमुल्य करार देते हुए उन्होंने कहा कि पंचायत सदस्यों, नगर पार्षदों, गैर सरकारी संगठनों के सदस्यों, स्वयं सेवक संगठनों की सहायता से तस्करी में लगे तत्वों की पहचान कर उन्हें रोका जाना चाहिए। पंजाब पुलिस की तरफ से नशा तस्करी बारे जानकारी देने वाले व्यक्ति को १० हजार रुपए इनाम देने की योजना और पुलिस की हैल्प लाईन १८१ से लोगों को जानकारी देने के लिए प्रोत्साहित किया जाये।शैक्षिक संस्थाओं में च्एंटी ड्रग सोसायटियांज् स्थापित करने के निर्देश जारी करते हुए डी.जी.पी. ने कहा कि विद्यार्थियों को नशे के बुरे प्रभाव प्रति जागरूक करने में यह सोसायटियां अहम भूमिका अदा करेंगी।इस अवसर पर कम्युनिटी पुलिसिंग के आई.जी. ने सांझ केन्द्रों के इंचार्जों से कहा कि वे अपने अधिकार क्षेत्र में सांझ समितियोंके माध्यम से जागरूकता लहर शुरू करें। उन्होंने कहा कि कम से कम हर पखवाड़े नशे विरुद्ध एक सैमीनार या वाद विवाद प्रतियोगिता अवश्य करवाई जाए।
उन्होंने कहा कि नशा करने वालों को नशा छोडऩे के लिए प्रेरित कर ५ आदर्श नशा मुक्ति केंन्द्रों और २१ अन्य सरकारी नशा छुड़ाओ केन्द्रों में भर्ती करवाया जाये और उनके पुर्नवासन की तरफ विशेष ध्यान दिया जाए। उल्लेखनीय है कि पंजाब पुलिस की तरफ से साल २०१५ दौरान ४२८.८ किलो हेरोइन बरामद की गई जिस में से १२१ किलो बी.एस.एफ. की तरफ से पुलिस के हवाले की गई। इसके अलावा ११ किलो स्मैक, ७५.५ किलो चरस, ४०१.८ किलो अफीम और ३५२९१ किलो भुक्की पंजाब पुलिस ने बरामद की है। साल भर दौरान नशे के कुल १०,१७८ मामले दर्ज किये गए, जिनके अधीन १२१९३ व्यक्तियों को गिरफ्तार किया गया। वर्ष के सभी मामलों में सजा दर ७८ प्रतिशत रही है।इसके अलावा एन.डी.पी.एस. एक्ट के अंतर्गत नशा तस्करों की १३ करोड़, २८ लाख, ५हज़ार, तीन सौ बावन रुपए की जायदाद कानूनी तरीके से जब्त की गई है।पंजाब पुलिस ने एन.डी.पी.एस. एक्ट से सबंधित पदार्थों को जल्द निपटाने मानसा और कपूरथला में स्थापित इनसिनरेटर का प्रयोग किया जा रहा है जबकि इसके अलावा पंजाब प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड की तरफ से निजी क्षेत्र के साथ हिस्सेदारी वाले १२ अन्य इनसिनरेटर की स्थापना कर नशीले पदार्थो को जल्द नष्ट किया जायेगा।डी.जी.पी. ने यह भी निर्देश दिया कि व्यवसाय के रूप मे तस्करी करने वाले तस्करों की पहचान कर उनके विरुद्ध नशों की तस्करी रोक थाम एक्ट १९८८ के अधीन कार्यवाही की जाये। उन्होंने कहा कि पंजाब पुलिस के ये प्रयास नशा तस्करी को रोकने में बड़े पैमाने पर सहायक होंगे।