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काले पड़े पैरों को नजरअंदाज न करें, काटने तक की नौबत आ सकती है: डॉ. रावुल जिंदल

डायबिटिक फुट पर बात करने फोर्टिस हॉस्पिटल के वस्कुलर सर्जरी के डायरेक्टर डॉ. रावुल जिंदल मीडिया से रूबरू हुए

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5 Dariya News

करनाल , 23 Dec 2015

Last updated on: Dec 23, 2015, 00:00 IST

डायबिटीज में काले पैर हो जाना सिर्फ गैंगरीन की ही निशानी नहीं होती बल्कि यह हृदय रोग की निशानी भी हो सकती है। मोहाली के फोर्टिस हॉस्पिटल के वस्कुलर सर्जरी के डायरेक्टर डॉ. रावुल जिंदल ने आज मीडिया कर्मियों को यह जानकारी दी।डॉ. जिंदल ने आगे बताया कि पेरिफरल आर्टि्रयल डिजीज (पीएडी) बुढ़ापे, स्मोकिंग, डायबिटीज, हाई कोलेस्ट्रोल और हाइपरटेंशन से जुड़ा है। उन्होंने कहा, 'ग्रामीण इलाकों के लोगों को बहुत ज्यादा चलना पड़ता है और इसलिए उनकी पिंडी या झांग में चलते हुए दर्द उठता है। दुर्भाग्यवश ये बीमारियां सही समय पर पहचानी नहीं जाती और अंतत: मरीजों को गैंगरीन हो जाता है जिसका अंत अंग काटने से ही होता है।

50 साल से ज्यादा की उम्र की जनसंख्या में बीमारियां होने की संभावना 4 से 6 फीसदी ज्यादा होती है। खतरों के निशान हैं टांग के ब्लड वेसल में ब्लॉकेज जिससे पैर तक खून नहीं पहुंचता और छाले पड़ जाते हैं और पैर काले पड़ जाते हैं जो ठीक नहीं होते। लंदन के सेंट मेरीज हॉस्पिटल से वस्कुलर सर्जिकल प्रक्रियाओं में एडवांस्ड ट्रेनिंग हासिल कर चुके डॉ. जिंदल ने कहा कि पीएडी से पीडि़त मरीजों में हार्ट अटैक या स्ट्रोक से मरने का खतरा दूसरों के मुकाबले दो से छह गुना ज्यादा होता है। वे डायबिटिक मरीज जो स्मोक करते हैं, उन्हें गैंगरीन का खतरा ज्यादा रहता है। समय रहते इलाज न होने से दिक्कत कई गुना बढ़ जाती है।समय रहते इलाज न होने से दिक्कत कई गुना बढ़ जाती है। हालांकि देश में वस्कुलर मरीजों की गिनती का कोई आंकड़ा मौजूद नहीं, पर 25 मिलियन से ज्यादा डायबिटिक मरीज यह साबित करते हैं कि कई वस्कुलर केस हैं जिनका इलाज नहीं किया गया। सर्वे के मुताबिक कड़ी वस्कुलर बीमारी से पीडि़त लोगों में पीठ के निचले हिस्से का दर्द और आर्थराइटिस जैसी बीमारियां भी लंबे समय तक घर करती हैं। यह पेरिफरल गैंगरीन की शुरुआत है जिसका पता लगने के बाद भी अंग काटना ही पड़ता है और सबसे पहली वस्कुलर समस्या अनसुलझी ही रह जाती है।

डॉ. जिंदल ने कहा कि सर्कुलेशन खोने का सबसे पहला फिजिकल संकेत है पल्सीन पैर। इसलिए यह बहुत जरूरी है कि हर तीन महीनों में डॉक्टर से पल्सीन पैर चेक करवाया जाए। आम तौर पर की जाने वाली कसरत के अलावा ब्लड प्रेशर मैनेज करना, कोलेस्ट्रोल और ब्लड ग्लूकोस लेवल को कंट्रोल में रखना इन बीमरियों से बचे रहने के बेस्ट तरीके हैं। डॉ. जिंदल ने सलाह दी कि रहन-सहन ऐसा होना चाहिए कि रक्त का बहाव हृदय से दूसरे हिस्सों तक सही रहे, साथ ही एंटी प्लेटलेट ड्रग्स और स्पेशलाइज्ड वस्कुलर सर्जरी का प्रशासन भी बना रहे। हालांकि वस्कुलर सर्जरी के लिए बहुत कम स्पेशलाइज्ड वस्कुलर सर्जन मौजूद हैं फिर भी डॉ. जिंदल मानते हैं कि आर्टि्रयल बीमारियों से बचने के लिए बचाव और सावधानी ही बेहतर रास्ते हैं।

 

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