भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को कहा कि भारत मध्य एशियाई क्षेत्र में अवसंरचना निर्माण में मदद करेगा। मोदी ने 15वें शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के शिखर सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा, "मध्य एशिया के साथ हमारे संबंध बहुत पुराने हैं। भारत को क्षेत्र में आधारभूत संरचना के निर्माण में योगदान देने में खुशी होगी।"प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत एससीओ की गतिविधियों में सक्रिय रूप से भाग लेता रहा है, जो पर्यवेक्षकों के लिए खुला हुआ है।उन्होंने कहा, "एससीओ की हमारी सदस्यता हमारे संबंधों का प्राकृतिक विस्तार है।"एससीओ के नेता भारत और पाकिस्तान को संगठन की पूर्ण सदस्यता दिलाने की प्रक्रिया शुरू करने के लिए एक प्रस्ताव पारित करने वाले हैं।
2001 में गठित एससीओ के स्थायी सदस्यों में चीन, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, रूस, ताजिकिस्तान और उज्बेकिस्तान शामिल हैं।अफगानिस्तान, भारत, ईरान, मंगोलिया और पाकिस्तान पर्यवेक्षक के रूप में हैं तथा बेलारूस, तुर्की और श्रीलंका संवाद साझेदार हैं।मोदी ने कहा कि भारत एक ऐसे माहौल के निर्माण में सहयोग करता है जो कि क्षेत्र में बाधाओं को कम कर व्यापार तथा निवेश की राह बनाता है।मोदी ने कहा, "एससीओ के साथ हमारा सहयोग यूरेशिया के विभिन्न क्षेत्रों को जोड़ने तथा एकीकृत करने के साझा दृष्टिकोण को आगे बढ़ाने की मांग करेगा।उन्होंने आपसी समझ तथा आदान-प्रदान को बढ़ावा देने की मांग करते हुए कहा कि यह विशेषकर हमारे युवाओं के बीच होना चाहिए, जो क्षेत्र तथा इससे बाहर एकता को बढ़ावा देंगे।
प्रधानमंत्री ने कहा, "उन्नतिशील भविष्य शांति के आधार में निहित है। भारत क्षेत्र में शांति तथा मित्रता बढ़ाने में योगदान देगा।"उन्होंने कहा कि भारत आतंकवाद से लड़ाई में एससीओ का साथ देगा।मोदी ने अपने अभिभाषण में कहा, "एससीओ हमारे दृष्टिकोण का महत्वपूर्ण हिस्सा है। मैं एससीओ को भारत के पूर्ण सहयोग का भरोसा दिलाता हूं।"