पंजाब भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री विजय सांपला ने पंजाब की आम आदमी पार्टी सरकार में राजनीतिक पद पर नियुक्त एक व्यक्ति द्वारा मीडिया को भेजे गए उस संदेश को पूरी तरह झूठा और भ्रामक बताया है, जिसमें यह दावा किया गया है कि "सांपला ने बेअदबी मामले में सुखबीर सिंह बादल के साथ राज्यपाल को दिए गए प्रतिनिधिमंडल (रिप्रेजेंटेशन) पर अपने हस्ताक्षर होने से इनकार किया है।"
विजय सांपला ने कहा कि यह संदेश पूरी तरह निराधार है और जनता को गुमराह करने का प्रयास है। उन्होंने कहा कि *बेअदबी के दोषियों तथा बेहबल कलां और कोटकपूरा पुलिस फायरिंग के लिए जिम्मेदार लोगों को सज़ा दिलाने के लिए गठित पंजाब पुलिस की विशेष जांच टीम (एसआईटी) के समक्ष मैंने क्या बयान दिए हैं, यदि इसकी जानकारी आम आदमी पार्टी सरकार में राजनीतिक पद पर नियुक्त किसी व्यक्ति को है, तो यह बेहद गंभीर विषय है।
इससे स्पष्ट होता है कि पंजाब सरकार बेअदबी जैसे संवेदनशील मामले में पंजाबियों की धार्मिक भावनाओं से खिलवाड़ कर रही है, राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश कर रही है और वास्तविक दोषियों को सज़ा दिलाने में उसकी कोई गंभीर रुचि नहीं है। सांपला ने सवाल उठाया कि पंजाब पुलिस के प्रदेश मुख्यालय और जिला मुख्यालयों में अपनी अधिकृत मीडिया टीमें मौजूद हैं तथा मीडिया ब्रीफिंग और प्रेस वार्ता के लिए पुलिस अधिकारियों को अधिकृत किया गया है।
ऐसे में यदि एसआईटी को मीडिया के सामने कोई जानकारी साझा करनी है, तो वह पुलिस के अधिकृत माध्यम से होनी चाहिए। *फिर आम आदमी पार्टी सरकार में राजनीतिक पद पर नियुक्त व्यक्ति मीडिया को इस प्रकार की जानकारी क्यों और किस अधिकार से भेज रहा है?*
उन्होंने कहा कि इससे साफ प्रतीत होता है कि पंजाब सरकार पिछले *चार वर्ष चार महीने* में बेअदबी के दोषियों तथा बेहबल कलां और कोटकपूरा पुलिस फायरिंग के जिम्मेदार लोगों को सज़ा दिलाने में अपनी विफलता को छिपाने के लिए झूठ और दुष्प्रचार का सहारा ले रही है। जनता अब इस राजनीति को समझ चुकी है और बेअदबी मामलों में वास्तविक न्याय की प्रतीक्षा कर रही है।