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हिमाचल प्रदेश में 3,500 करोड़ रुपये की आपदा-रोधी आधारभूत संरचना बनेगी : सुखविन्द्र सिंह सुक्खू

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शिमला , 10 Jul 2026

Last updated on: Jul 11, 2026, 10:49 IST

मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि हिमाचल प्रदेश में प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले नुकसान को कम करने और राज्य को अधिक सुरक्षित बनाने के लिए लगभग 3,500 करोड़ रुपये की लागत से आपदा-रोधी (डिजास्टर रेजिलिएंट) आधारभूत संरचना विकसित की जाएगी। वह आज शिमला स्थित डॉ. मनमोहन सिंह हिमाचल प्रदेश लोक प्रशासन संस्थान (हिप्पा) में आयोजित ‘टूवार्डस रेजिलिएंस इन्फ्रास्ट्रक्चर प्लानिंग इन हिमालय’ विषय पर उच्च स्तरीय कार्यशाला के समापन समारोह को संबोधित कर रहे थे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमाचल प्रदेश पहाड़ी और भौगोलिक रूप से संवेदनशील राज्य है, इसलिए यहां प्राकृतिक आपदाओं का खतरा लगातार बना रहता है।उन्होंने वर्ष 2023 की भीषण आपदा को याद करते हुए कहा कि उस समय लगभग 75,000 पर्यटक राज्य के विभिन्न हिस्सों में फंस गए थे। सरकार, मंत्रियों और प्रशासन के संयुक्त प्रयासों से सभी पर्यटकों को सुरक्षित निकाला गया और आवश्यक सेवाओं को तेजी से बहाल किया गया।

उन्होंने राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी और विधायक संजय अवस्थी की भी सराहना की, जिन्होंने स्वयं चंद्रताल झील क्षेत्र में फंसे लगभग 300 पर्यटकों को सुरक्षित निकालने का अभियान चलाया।मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2023 की आपदा में करीब 23,000 मकान पूरी तरह नष्ट हो गए थे और 51 लोगों की जान चली गई थी। प्रभावित परिवारों की मदद के लिए सरकार ने राहत नीति में बड़ा बदलाव करते हुए पूरी तरह क्षतिग्रस्त मकानों के लिए मुआवजा 1.30 लाख रुपये से बढ़ाकर 8 लाख रुपये किया।

उन्होंने कहा कि वर्ष 2023 की आपदा से मिले अनुभवों के कारण सरकार वर्ष 2025 की आपदा का बेहतर तरीके से सामना कर सकी, जिससे स्थिति गंभीर होने के बावजूद नुकसान अपेक्षाकृत कम रहा।मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में बढ़ रही बादल फटने की घटनाएं जलवायु परिवर्तन और बड़े बांधों के जलाशयों से बढ़ते वाष्पीकरण से जुड़ी हो सकती हैं। उन्होंने कहा कि आज यह समस्या हिमाचल में दिखाई दे रही है, लेकिन आने वाले समय में अन्य राज्यों को भी इसका सामना करना पड़ सकता है। 

उन्होंने कहा कि इन चुनौतियों से निपटने के लिए विकास की नीतियों में आवश्यक बदलाव और साहसिक फैसले लेने होंगे और राज्य सरकार इसके लिए पूरी तरह तैयार है।उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध है और पर्यटन राज्य की अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार है। प्रदेश सरकार पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ-साथ हिमाचल को आत्मनिर्भर बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है।

मुख्यमंत्री ने कार्यशाला के आयोजकों को बधाई देते हुए कहा कि यह कार्यक्रम केवल आधारभूत संरचना के निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि सुरक्षित, मजबूत और समावेशी भविष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने विश्वास जताया कि कार्यशाला से मिले सुझाव भविष्य की नीतियां बनाने में उपयोगी साबित होंगे।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने ‘टुवर्ड्स रेजिलिएंट हिमाचल प्रदेशः लेसनस एंड रिकमडेशनज फ्रॉम 2023 और 2025 हाइड्रो मेट्रोलॉजिकल डिजास्टर’ शीर्षक से रिपोर्ट का विमोचन भी किया। 

इसके अलावा ‘हिमाचल सोशल इम्पैक्ट असेसमेंट मैनेजमेंट सिस्टम (एसआईएयू पोर्टल)’ भी लॉन्च किया। उन्होंने कहा कि यह पोर्टल बेहतर डेटा आधारित निर्णय लेने, विभागों के बीच समन्वय बढ़ाने और प्रशासनिक कार्यों को अधिक प्रभावी बनाने में मदद करेगा।राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के उपाध्यक्ष दीपक राठौर ने कहा कि पश्चिमी हिमालय पर्यावरण की दृष्टि से बेहद संवेदनशील क्षेत्र है और हाल के वर्षों में यहां प्राकृतिक आपदाओं की घटनाएं बढ़ी हैं। 

उन्होंने आपदा-रोधी विकास, मजबूत प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली, संवेदनशील हिमनदीय झीलों की लगातार निगरानी, पर्वतीय क्षेत्रों के लिए अलग इंजीनियरिंग मानक और लोगों में जागरूकता बढ़ाने पर बल दिया।मुख्य सचिव के.के. पंत ने कहा कि जलवायु परिवर्तन आज सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है। वर्ष 2023 और 2025 की आपदाओं से आधारभूत ढांचे को भारी नुकसान हुआ और कई लोगों की जान गई।

सरकार का लक्ष्य केवल क्षतिग्रस्त ढांचे का पुनर्निर्माण नहीं, बल्कि भविष्य की चुनौतियों का सामना करने में सक्षम मजबूत आधारभूत संरचना तैयार करना है। उन्होंने आपदा प्रबंधन के लिए संस्थागत क्षमता बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया।नीति आयोग के पूर्व सदस्य डॉ. वी.के. पॉल ने कहा कि हिमाचल प्रदेश को पहले से ही भौगोलिक परिस्थितियों के कारण कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है और अब वैश्विक तापमान वृद्धि ने इन्हें और गंभीर बना दिया है। 

उन्होंने कहा कि आपदा-रोधी विकास के लिए सभी विभागों और संस्थाओं के सहयोग से व्यापक नीति अपनानी होगी। उन्होंने वर्ष 2023 की आपदा को एक चेतावनी बताते हुए समय रहते ठोस कदम उठाने की आवश्यकता पर बल दिया।मुख्यमंत्री के सचिव राकेश कंवर, चिंतन रिसर्च फाउंडेशन के सेंटर हेड देबोजीत पालित, निदेशक हिप्पा रूपाली ठाकुर, वरिष्ठ अधिकारी और अन्य गणमान्य इस अवसर पर उपस्थित थे।

 

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