Wednesday, 22 July 2026

 

 

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प्राकृतिक खेती विकसित भारत का सबसे मजबूत स्तंभ : नायब सिंह सैनी

हरियाणा के हर जिला में प्रकृति श्री अन्न प्रेरक किसान कमेटी बनेगी: मुख्यमंत्री

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पंचकूला , 08 Jul 2026

Last updated on: Jul 09, 2026, 11:49 IST

हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने प्रदेश में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के उद्देश्य से आज एक बड़ा ऐलान किया है, उन्होंने कहा कि प्रदेश में प्रकृति श्री अन्न प्रेरक किसान कमेटी बनाई जाएगी, यह कमेटी हर जिला में होगी। इस कमेटी का मुख्य कार्य किसानों से संपर्क करना, उनके फार्म पर जाना और सरकार से सामंजस्य करवाकर प्राकृतिक खेती के साथ जोड़ने का कार्य होगा। 

यह एक तरह से प्राकृतिक खेती के प्रेरक एम्बेस्डर होंगे। मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी बुधवार को पंचकूला में हरियाणा कृषि एवं किसान कल्याण विभाग द्वारा आयोजित प्राकृतिक खेती संवाद को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने इस दौरान किसानों से संवाद भी किया, मुख्यमंत्री ने किसानों से मिले सुझावों को जल्द पूरा करवाने की दिशा में काम करने का आश्वासन भी दिया। 

साथ ही उन्होंने कृषि विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्राकृतिक खेती करने वाले जिन किसानों ने गाय खरीदने के लिए सब्सिडी के लिए आवेदन किया है, उन्हें सब्सिडी जारी कर दी जाए। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि प्राकृतिक खेती केवल खेती करने का एक तरीका नहीं, बल्कि किसान, प्रकृति और समाज के बीच टूट चुके संबंधों को फिर से मजबूत करने का अभियान है। 

यह धरती माता की सेवा, खेती की लागत कम करने, जल और मिट्टी के संरक्षण तथा आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य का माध्यम है। उन्होंने किसानों से प्राकृतिक खेती के ब्रांड एंबेसडर बनने का आह्वान करते हुए कहा कि अब केवल चिंतन नहीं, बल्कि अमल करने और दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करने का समय है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार समय-समय पर किसानों से सीधा संवाद करेगी और प्राकृतिक खेती के इस अभियान को जन-जन तक पहुंचाने के लिए लगातार प्रयास किए जाएंगे। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्राकृतिक खेती पर प्रत्येक माह इसी प्रकार के संवाद कार्यक्रम आयोजित किए जाएं। 

उन्होंने कहा कि बड़े सेमिनारों में गुजरात के राज्यपाल आचार्य श्री देवव्रत को भी आमंत्रित किया जाएगा ताकि किसान उनके अनुभवों से लाभान्वित हो सकें। उन्होंने कहा कि आज का सेमिनार केवल प्राकृतिक खेती की तकनीक सीखने का अवसर नहीं है, बल्कि किसान और प्रकृति के बीच सदियों पुराने अटूट रिश्ते को फिर से मजबूत करने का अभियान है। 

पहले खेती का संबंध धरती माता और गौ माता से था। यही संबंध किसान के जीवन में समृद्धि और खुशहाली लेकर आता था, लेकिन समय के साथ यह रिश्ता कमजोर हुआ और आज प्राकृतिक आपदाएं तथा पर्यावरणीय संकट हमारे सामने बड़ी चुनौती बनकर खड़े हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि मानव ने विकास तो किया है, लेकिन कहीं न कहीं धरती का अत्यधिक दोहन भी किया है। आज सवाल यह नहीं है कि खाद और कीटनाशकों की कमी है, बल्कि यह है कि हम आने वाली पीढ़ियों के लिए कैसी धरती और कैसा पर्यावरण छोड़कर जा रहे हैं। 

हमारे पूर्वज हमें भरपूर भूजल और उपजाऊ मिट्टी देकर गए थे, लेकिन आज कई क्षेत्रों में भूजल स्तर हर सीजन में 20 से 25 फुट तक नीचे जा रहा है। इस पर गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि पहले श्रमिक मंडियों में अनाज की भारी-भरकम बोरियां आसानी से उठा लेते थे, लेकिन आज बदलती जीवनशैली, रासायनिक खेती और प्राकृतिक असंतुलन के कारण सभी के स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। 

इसलिए खेती की दिशा बदलना समय की आवश्यकता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी का स्पष्ट विजन है कि प्राकृतिक खेती 21वीं सदी की आवश्यकता है। यह केवल खेती की नई पद्धति नहीं, बल्कि धरती बचाने का अभियान है। 

यह किसानों की लागत कम करने, पर्यावरण संरक्षण करने और आने वाली पीढ़ियों के लिए समृद्ध भारत बनाने का माध्यम है। भारतीय संस्कृति में धरती को मां का दर्जा दिया गया है और उसकी सेवा करना हम सभी का कर्तव्य है। उन्होंने किसानों से आह्वान किया कि वे प्राकृतिक खेती के एंबेसडर बनकर गांव-गांव लोगों को इसके लाभ बताएं। 

उन्होंने कहा कि केवल चर्चा करने से काम नहीं चलेगा, बल्कि स्वयं भी प्राकृतिक खेती अपनानी होगी और दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करना होगा। उन्होंने कहा कि किसानों को नकली बीज और दवाइयां ना मिले, इसे रोकने के लिए राज्य सरकार ने विधानसभा में कड़ा कानून बनाया है। 

अब यदि कोई किसान को नकली बीज बेचते हुए पाया जाता है तो उसे पांच वर्ष तक की सजा का प्रावधान किया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने देशभर में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने का अभियान शुरू किया है।

हरियाणा सरकार ने भी किसानों से सुझाव लेकर तैयार किए गए राज्य बजट में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए विशेष प्रावधान किया है। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती अपनाने वाले किसानों की उपज की बिक्री में किसी प्रकार की परेशानी नहीं आने दी जाएगी। 

सरकार ने पहले ही घोषणा की है कि प्राकृतिक खेती से तैयार उपज के लिए मंडियों में अलग स्थान उपलब्ध कराया जाएगा तथा हैफेड इसकी खरीद करेगा। इसकी व्यवस्था की जा रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में क्षेत्रवार बागवानी को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। 

गन्नौर मंडी में प्राकृतिक खेती करने वाले किसानों के लिए अलग शेड बनाया गया है तथा राज्य में चार सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित किए गए हैं, जहां आधुनिक बागवानी और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आज पूरी दुनिया जलवायु परिवर्तन की चुनौती का सामना कर रही है। 

मिट्टी की उर्वरता लगातार घट रही है और खेती की लागत बढ़ रही है। इसलिए कृषि वैज्ञानिकों को देशी और गुणवत्तापूर्ण बीज विकसित करने के निर्देश दिए गए हैं। दुनिया के अनेक विकसित देश अब रासायनिक खेती से दूरी बनाने का प्रयास कर रहे हैं, जबकि भारत के पास ऋषि-मुनियों की परंपरा, किसानों का अनुभव और प्राकृतिक खेती का समृद्ध ज्ञान पहले से मौजूद है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत के संकल्प को साकार करने में प्राकृतिक खेती सबसे मजबूत स्तंभ साबित होगी। इसके लिए सरकार और किसानों को मिलकर जन आंदोलन के रूप में इस अभियान को आगे बढ़ाना होगा।

प्राकृतिक खेती किसानों को बनाएगी आत्मनिर्भर और कर्जमुक्त- श्याम सिंह राणा

हरियाणा के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्री श्याम सिंह राणा ने कहा कि प्राकृतिक खेती किसानों को कर्जमुक्त, आत्मनिर्भर और समृद्ध बनाने का प्रभावी माध्यम है, जबकि रासायनिक खेती किसानों की लागत बढ़ाकर उन्हें कर्ज की ओर धकेलती है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार किसानों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए प्राकृतिक खेती को व्यापक स्तर पर बढ़ावा दे रही है।

उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा लागू की जाने वाली प्रत्येक योजना और नीति जनकल्याण को केंद्र में रखकर तैयार की जाती है। नई पहल का प्रारंभिक स्तर पर विरोध होना स्वाभाविक है, लेकिन किसानों को यह समझना चाहिए कि प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने का उद्देश्य उनकी आय बढ़ाना, खेती की लागत घटाना और कृषि को दीर्घकालिक रूप से टिकाऊ बनाना है।

श्री राणा ने कहा कि रासायनिक खेती में किसानों की कमाई का बड़ा हिस्सा उर्वरक, कीटनाशक और अन्य कृषि रसायन बनाने वाली कंपनियों के पास चला जाता है। इसके विपरीत प्राकृतिक खेती में बाहरी संसाधनों पर निर्भरता कम होने से खेती की लागत घटती है और किसान आर्थिक रूप से सशक्त बनता है।

उन्होंने कहा कि वर्तमान में रासायनिक, जैविक और प्राकृतिक खेती की तीन प्रमुख पद्धतियां प्रचलित हैं। जैविक खेती में अधिक मात्रा में गोबर एवं अन्य संसाधनों की आवश्यकता होती है, जबकि प्राकृतिक खेती कम लागत वाली, आत्मनिर्भर और पर्यावरण अनुकूल खेती की प्रणाली है। 

इसी कारण राज्य सरकार प्राकृतिक खेती के विस्तार के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। कृषि मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी प्राकृतिक खेती को जनआंदोलन बनाने के लिए लगातार प्रयासरत हैं। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण, भूमि की उर्वरता बनाए रखने तथा आने वाली पीढ़ियों को शुद्ध एवं पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराने के लिए प्राकृतिक खेती समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। 

विकसित भारत के संकल्प के अनुरूप वर्ष 2047 तक देश में प्राकृतिक खेती का दायरा 20 प्रतिशत तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने किसानों से आह्वान किया कि प्राकृतिक खेती की शुरुआत अपने पशुओं के चारे से करें और चारे के उत्पादन में भी कीटनाशकों के उपयोग से बचें। 

उन्होंने कहा, मैं स्वयं एक किसान हूं और खेती से जुड़ी चुनौतियों तथा किसानों की जरूरतों को भली-भांति समझता हूं।

प्राकृतिक खेती का अपना वैज्ञानिक तंत्र है, इसे समझना हर किसान के लिए जरूरी- धर्मपाल यादव

कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के प्रगतिशील किसान श्री धर्मपाल यादव ने कहा कि कृषि करना और कृषि को समझना, दोनों अलग-अलग बातें हैं। प्रकृति की धारा को समझकर उसके अनुरूप चलना या उसे सकारात्मक दिशा देना ही वास्तविक कृषि ज्ञान है। 

यदि खेती को केवल आर्थिक दृष्टिकोण से देखा जाएगा, तो उसके पर्यावरणीय और सामाजिक प्रभावों की अनदेखी होगी। उन्होंने कहा कि वर्ष 1907 में भूजल स्तर उस गहराई पर था, जहां वह सदियों से बना हुआ था, लेकिन रासायनिक खेती के बढ़ते प्रयोग से आज भूजल स्तर कई फीट नीचे चला गया है। 

इसके साथ ही पर्यावरण भी गंभीर रूप से प्रभावित हुआ है। बढ़ता प्रदूषण भी आज एक बड़ी समस्या बन गया है। श्री धर्मपाल यादव ने कहा कि रासायनिक खेती के दुष्प्रभावों के चलते आज अस्पतालों की संख्या बढ़ रही है और लोगों में गंभीर बीमारियां भी बढ़ी हैं। 

अब दुनिया भी प्राकृतिक खेती की ओर लौटने की आवश्यकता महसूस कर रही है और बड़े शहरों से लोग गांवों की ओर पलायन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती का अपना एक वैज्ञानिक तंत्र है, जिसे समझना आज हर किसान के लिए आवश्यक है। 

उन्होंने बताया कि वे अपने खेतों में कभी भी कीटनाशकों या अन्य रासायनिक दवाइयों का प्रयोग नहीं करते। उनका मानना है कि कीट प्रबंधन के लिए भी प्राकृतिक उपाय पर्याप्त हैं और रासायनिक दवाइयों पर निर्भरता कम करनी चाहिए।

उन्होंने किसानों के साथ अपने उत्पादों के विपणन (मार्केटिंग) मॉडल की भी जानकारी साझा की और प्राकृतिक खेती से बेहतर आय प्राप्त करने के अपने अनुभव बताए।

मुख्यमंत्री का जताया आभार, प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए दिए सुझाव

कार्यक्रम के दौरान किसानों ने मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी के समक्ष प्राकृतिक खेती को अधिक से अधिक बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार द्वारा किए जा सकने वाले विभिन्न सुझाव साझा किए। किसानों ने कहा कि मुख्यमंत्री द्वारा स्वयं किसानों के साथ आमने-सामने बैठकर संवाद करना उनके लिए अत्यंत प्रेरणादायक है। 

उनका कहना था कि जब प्रदेश का मुखिया किसानों से सीधे संवाद करता है और उनकी बात सुनता है, तो इससे किसानों का मनोबल बढ़ता है तथा उन्हें यह विश्वास मिलता है कि राज्य सरकार उनके हितों के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है। किसानों ने राज्य सरकार की किसान हितैषी नीतियों तथा किसानों के कल्याण के लिए किए जा रहे प्रयासों की सराहना की। 

उन्होंने विशेष रूप से मंडी व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए उठाए गए कदमों की प्रशंसा करते हुए कहा कि इससे किसानों के हितों को मजबूती मिली है। किसानों ने मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त करते हुए विश्वास जताया कि प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए सरकार आगे भी इसी प्रकार सहयोग करती रहेगी।

इसी क्रम में करनाल के एक किसान ने बताया कि वह पिछले दो वर्षों से प्राकृतिक खेती कर रहे हैं और इससे उन्हें अच्छा लाभ प्राप्त हो रहा है। उन्होंने राज्य सरकार द्वारा किसानों के हित में उठाए जा रहे कदमों के लिए मुख्यमंत्री का धन्यवाद करते हुए सुझाव दिया कि कृषि की पढ़ाई कर रहे विद्यार्थियों के पाठ्यक्रम में भी प्राकृतिक खेती को शामिल किया जाना चाहिए, ताकि भावी पीढ़ी शुरुआत से ही टिकाऊ, पर्यावरण-अनुकूल और रसायन-मुक्त खेती की वैज्ञानिक समझ विकसित कर सके।

इस दौरान कृषि विभाग के निदेशक श्री राजनारायण कोशिक, ओएसडी श्री वीरेंद्र बढ़खालसा,  पंचकूला के मेयर श्री श्याम लाल बंसल, पार्टी की नेता श्रीमती बंतो कटारिया, मुख्यमंत्री के मीडिया सचिव श्री प्रवीण आत्रेय, शिवालिक विकास बोर्ड के अध्यक्ष श्री ओमप्रकाश देवीनगरिया, जिलाध्यक्ष श्री अजय  भी मौजूद थे।

 

 

 

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