हिंदू धर्म में पंचांग का काफी महत्व होता है। कोई शुभ काम, यात्रा, निवेश या पूजा-पाठ करने से पहले पंचांग जरूर देखा जाता है। पंचांग हिंदू काल-गणना पद्धति है; यह सूर्य, चंद्रमा और अन्य ग्रहों की स्थिति पर आधारित होता है। 7 जुलाई 2026 (मंगलवार) को आषाढ़ माह के कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि दोपहर 1:25 बजे तक है; इसके बाद अष्टमी तिथि लग जाएगी।
इस दिन कालाष्टमी भी है। कालाष्टमी पर भगवान शिव के रौद्र और उग्र अवतार काल भैरव की पूजा की जाती है। इसके साथ ही इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की भी आराधना की जाती है। इस दिन काल भैरव के साथ उनके वाहन (सवारी) काले कुत्ते को भोजन कराना अत्यंत शुभ माना जाता है। मंगलवार को अमृत काल सुबह 11:31 बजे पर शुरू होकर दोपहर 1:08 बजे तक रहेगा।
जबकि सुबह 4:15 बजे से 5:03 बजे तक ब्रह्म मुहूर्त रहेगा। इस दिन सुबह 5:51 बजे सूर्योदय और शाम 7:12 बजे सूर्यास्त होगा। वहीं, रात 11:58 बजे चन्द्रोदय और दोपहर 12:01 बजे चन्द्रास्त होगा। पंचांग के अनुसार, 7 जुलाई 2026 को सूर्य आर्द्रा नक्षत्र में स्थित रहेगा, जबकि चंद्रमा दोपहर 4:24 बजे तक उत्तरा भाद्रपदा नक्षत्र में रहेगा।
इसके बाद रेवती नक्षत्र में प्रवेश करेगा। वहीं, 7 जुलाई 2026 (मंगलवार) को हर्षण योग प्रभावी नहीं रहेगा। पंचांग के अनुसार, इस दिन देर रात 2:01 बजे तक शोभन योग रहेगा, इसके बाद अतिगंड योग शुरू होगा। मंगलवार को अभिजित मुहूर्त दोपहर 12:05 बजे से दोपहर 12:58 बजे तक रहेगा। यह दिन का सबसे शुभ समय माना जाता है।
इस दौरान बिना किसी राहुकाल या अन्य अशुभ समय की चिंता किए कोई भी महत्वपूर्ण कार्य, पूजा या व्यापार शुरू किया जा सकता है। वहीं, राहुकाल दोपहर 3:32 से 5:15 बजे तक रहेगा, गुलिक काल दोपहर 12:27 से 2:11 बजे के बीच रहेगा। यमगंड काल सुबह 8:58 बजे से 10:42 बजे तक रहेगा। पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार, इन समयों में नए कार्य शुरू करने से बचना चाहिए क्योंकि इनको अशुभ समय माना जाता है।
वहीं, 7 जुलाई को सूर्य मिथुन राशि में गोचर करेंगे और चंद्रमा मीन राशि में स्थित रहेगा। 7 जुलाई 2026 (मंगलवार) को उत्तर दिशा में दिशाशूल रहेगा। ज्योतिष और वास्तु के मुताबिक, इस दिशा में यात्रा करने से बचना चाहिए। अगर यात्रा करना आवश्यक भी है, तो कुछ अचूक ज्योतिषीय उपायों का पालन करना चाहिए।