कृषि विपणन के क्षेत्र में विश्व स्तरीय सुधार लाने और मंडियों के आधुनिकीकरण के उद्देश्य से नेशनल कौंसिल ऑफ स्टेट एग्रीकल्चरल मार्केटिंग बोर्ड्स (कौसांब) के चेयरमैन और पंजाब मंडी बोर्ड के चेयरमैन स. हरचंद सिंह बरसट की ओर से पेरिस (फ्रांस) स्थित विश्व प्रसिद्ध रुंगिस इंटरनेशनल होलसेल मार्केट के दौरे के दूसरे दिन मीट, फिश (मछली) और सी-फूड (समुद्री भोजन) मार्केट का दौरा किया गया। इसके साथ ही उन्होंने वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट का दौरा करके वहां की कार्यप्रणाली को भी करीब से देखा।
चेयरमैन स. हरचंद सिंह बरसट ने वहां के विशेषज्ञों से मुलाकात की और मीट, मछली व सी-फूड के रख-रखाव, गुणवत्ता, कोल्ड चेन स्टोरेज, मार्केटिंग और ग्राहकों तक पहुंचाने के लिए अपनाई जा रही आधुनिक तकनीकों के बारे में जानकारी प्राप्त की। उन्होंने देखा कि रोजाना आने वाले उत्पादों की खरीद- फरोख्त और सप्लाई को बिना किसी देरी के बहुत ही सुचारू ढंग से पूरा किया जाता है।
इसके साथ ही स. बरसट ने वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट का दौरा करके मंडियों से निकलने वाले कचरे और रहिंद-खुंद के निपटारे के लिए प्रयोग की जा रही नवीनतम वैज्ञानिक तकनीकों का अध्ययन किया। उन्होंने देखा कि किस प्रकार मार्केट से निकलने वाले कचरे को रिसाइकल किया जाता है।
स. बरसट ने इस प्रणाली की सराहना करते हुए कहा कि मंडियों में सफाई व्यवस्था को बेहतर बनाने और पर्यावरण की संभाल के लिए ऐसे हाई-टेक प्लांट बहुत फायदेमंद साबित हो सकते हैं। चेयरमैन ने कहा कि पंजाब के मुख्यमंत्री स. भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में पंजाब सरकार राज्य की मंडियों को हाई-टेक बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।
पेरिस की मीट-फिश मार्केट और वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट के दौरे के दौरान जो भी अनुभव प्राप्त हुआ है, उसे मंडियों में अपनाने के प्रयास किए जाएंगे। उन्होंने आगे कहा कि कौसांब के चेयरमैन के रूप में उनका प्रयास रहेगा कि पंजाब सहित पूरे देश की मंडियों में सफाई के मानकों को ओर ऊंचा उठाया जाए और वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट स्थापित किए जाएं, ताकि मंडियों के कचरे और रहिंद-खुंद का सही ढंग से निपटारा हो सके और पर्यावरण की रक्षा के साथ-साथ किसानों व व्यापारियों को साफ-सुथरा माहौल मिल सके और उपभोक्ताओं तक बेहतर व स्वच्छ फूड पहुंचाया जा सके।
उन्होंने उम्मीद जताई कि इस अंतर्राष्ट्रीय दौरे के दौरान मिली तकनीकी जानकारी किसानों, आढ़तियों और व्यापारियों के लिए नए रास्ते खोलेगी और कृषि विपणन ढांचे में बड़े और सकारात्मक सुधार लाएगी।