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नांदेड़ साहिब गुरुद्वारा कानून रद्द करने का फैसला वापस ले महाराष्ट्र सरकार : ग्लोबल सिख काउंसिल

भाजपा को सिख संस्थाओं और गुरुद्वारों को वैचारिक नियंत्रण के अधीन लाने के प्रयासों से बाज आने की चेतावनी

Harjeet Singh Grewal, Dr Kanwaljit Kaur, Global Sikh Council
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चंडीगढ़ , 25 Jun 2026

Last updated on: Jun 26, 2026, 10:53 IST

विभिन्न देशों की राष्ट्रीय स्तर की सिख संस्थाओं की प्रतिनिधि संस्था - ग्लोबल सिख काउंसिल - ने महाराष्ट्र सरकार द्वारा 70 वर्ष पुराने ‘नांदेड़ सिख गुरुद्वारा सचखंड श्री हजूर अबचलनगर साहिब अधिनियम-1956’ को निरस्त करने के निर्णय की कड़ी निंदा करते हुए कहा है कि सिख कौम की धार्मिक भावनाओं और चिंताओं को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार यह निर्णय तत्काल वापस ले, क्योंकि किसी भी सिख संस्था ने ऐसी कोई मांग नहीं की है बल्कि तख्त श्री नांदेड़ साहिब के जत्थेदार सहित समूचे प्रबंधन ने सरकार के इस कदम का खुला विरोध किया है।

इस मामले में काउंसिल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा तथा महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से अपील की है कि वे सभी तख्त साहिबानों और गुरुद्वारों के प्रशासनिक मामलों में सिखों की धार्मिक स्वायत्तता का सम्मान करें तथा सिख कौम के साथ सीधे टकराव की नीति का त्याग करें। काउंसिल ने उक्त नेताओं को लिखे पत्रों में मांग की कि सिख संस्थाओं और सिख मामलों से संबंधित कोई भी नया कानून लाने से पहले सभी सरकारें शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी, तख्त साहिब के प्रबंधकों, स्थापित सिख संस्थाओं, सिख विद्वानों तथा सिख पंथ के प्रतिनिधियों के साथ खुला परामर्श करें।

ग्लोबल सिख काउंसिल की अध्यक्ष डॉ. कंवलजीत कौर यूके और सचिव एडवोकेट हरजीत सिंह ग्रेवाल द्वारा जारी बयान में आरोप लगाया गया है कि भाजपा के नेतृत्व वाली महायुति सरकार ने तख्त श्री नांदेड़ साहिब के समग्र प्रशासनिक ढांचे पर पूर्ण नियंत्रण स्थापित करने के उद्देश्य से सत्तर वर्ष पुराने कानून को हाल ही में हुई कैबिनेट बैठक के दौरान बिना किसी सलाह-मशविरा के समाप्त कर दिया तथा नए विधेयक के मसौदे को भी मंजूरी दे दी है। 

यह नया प्रस्तावित ‘तख्त सचखंड श्री हजूर साहिब अबचलनगर गुरुद्वारा अधिनियम’ राज्य विधानसभा के आगामी मानसून सत्र में पेश किए जाने का प्रस्ताव है। उन्होंने कहा कि सिखों की सहमति के बिना किसी भी सरकार को सिख मामलों और सिख संस्थाओं में हस्तक्षेप करने अथवा निर्णय लेने का कोई अधिकार नहीं है। 

काउंसिल ने आरोप लगाया कि भगवा पार्टी विभिन्न बहानों के माध्यम से सिखों के दसवंध, इस पवित्र धार्मिक स्थल और तख्त की प्रबंधकीय समिति पर पूर्ण प्रशासनिक प्रभाव स्थापित करना चाहती है जैसा कि पहले दिल्ली कमेटी, पटना साहिब कमेटी तथा हरियाणा गुरुद्वारा कमेटी से संबंधित मामलों में किया गया है। काउंसिल ने आगे आरोप लगाया कि भाजपा सरकार द्वारा वर्ष 2024 में भी ऐसा ही प्रयास किया गया था लेकिन सिख कौम के विरोध के कारण वह सफल नहीं हो सका।

काउंसिल नेताओं ने यह भी आरोप लगाया कि महाराष्ट्र सरकार वर्ष 2014 में न्यायमूर्ति जे. एस. भाटिया समिति के माध्यम से तैयार करवाई गई मनोनुकूल रिपोर्ट के आधार पर नया गुरुद्वारा कानून लाने जा रही है। इस नए कानून के माध्यम से शिरोमणि कमेटी, चीफ खालसा दीवान तथा सिख सांसदों के प्रतिनिधित्व को कम करने का प्रयास किया जा रहा है।

काउंसिल ने यह भी कहा कि वर्ष 2019 में गठित वर्तमान तख्त साहिब प्रबंधन बोर्ड का कार्यकाल वर्ष 2022 में समाप्त हो चुका है लेकिन चार वर्ष बीत जाने के बावजूद सरकार ने जानबूझकर बोर्ड के चुनाव नहीं करवाए और अब अपनी इच्छा से पुराने कानून को समाप्त कर नया कानून लागू करने का निर्णय ले लिया है।

अध्यक्ष डॉ. कंवलजीत कौर और सचिव एडवोकेट हरजीत सिंह ग्रेवाल ने कहा कि पूर्व में सिखों की ओर से सामूहिक विरोध की कमी के कारण महाराष्ट्र सरकार वर्ष 2015 में इस ऐतिहासिक कानून में संशोधन कर गुरुद्वारा बोर्ड के अध्यक्ष की नियुक्ति का अधिकार अपने हाथों में ले चुकी है। इसी संशोधन की आड़ में भाजपा ने अपने तत्कालीन विधायक तारा सिंह को तख्त श्री हजूर साहिब बोर्ड का अध्यक्ष नियुक्त किया था।

चेतावनी देते हुए काउंसिल ने कहा कि भाजपा सरकार सिख धर्म पर वैचारिक प्रभाव स्थापित करने की नीति के तहत इस पवित्र सिख धार्मिक स्थल, इसकी प्रबंधकीय समिति तथा सिखों के दसवंध को सरकारी नियंत्रण में लाने से परहेज करे। काउंसिल ने समस्त सिख संगतों, सिख संस्थाओं और संगठनों से अपील की कि वे इस कदम का कड़ा विरोध करें, सरकार को यह निर्णय वापस लेने के लिए बाध्य करें तथा आवश्यकता पड़ने पर न्यायालय का दरवाजा भी खटखटाएं।

 

Tags: Harjeet Singh Grewal , Dr Kanwaljit Kaur , Global Sikh Council

 

 

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