पूर्व स्वास्थ्य मंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता बलबीर सिंह सिद्धू ने पंजाब सरकार द्वारा केवल सरपंचों को ₹10,000 प्रति माह मानदेय देने और पंचों, ब्लॉक समिति तथा जिला परिषद सदस्यों को नजरअंदाज करने के फैसले की कड़ी निंदा की है। उन्होंने कहा कि गांवों के विकास और जनता की समस्याओं के समाधान में केवल सरपंच ही नहीं, बल्कि पंच, ब्लॉक समिति और जिला परिषद सदस्य भी समान रूप से महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
ऐसे में सरकार ने केवल एक वर्ग को प्राथमिकता देकर अन्य निर्वाचित प्रतिनिधियों के साथ भेदभाव क्यों किया है? सिद्धू ने कहा कि यदि सरकार वास्तव में पंचायती राज संस्थाओं को मजबूत करना चाहती है, तो सभी निर्वाचित प्रतिनिधियों के लिए समानता और न्याय के आधार पर नीति बनाई जानी चाहिए।
केवल चुनिंदा वर्ग को लाभ देना लोकतंत्र की भावना के खिलाफ है और इससे अन्य प्रतिनिधियों में असंतोष पैदा होगा। उन्होंने मांग की कि यदि पंजाब सरकार सरपंचों को ₹10,000 मासिक दे सकती है, तो पंचों, ब्लॉक समिति और जिला परिषद सदस्यों के साथ भी न्याय किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि पंचों का क्या दोष है कि उन्हें इस फैसले से बाहर रखा गया है? पंचों को कम से कम ₹5,000 मासिक दिया जाए, जबकि ब्लॉक समिति और जिला परिषद सदस्यों को ₹15,000 मासिक मानदेय दिया जाए। सिद्धू ने यह भी कहा कि सहकारी बैंकों के निदेशकों को भी उनकी जिम्मेदारियों को देखते हुए ₹5,000 से ₹10,000 मासिक मानदेय दिया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि ग्रामीण और सहकारी संस्थाओं से जुड़े सभी निर्वाचित प्रतिनिधि विकास कार्यों में अहम भूमिका निभाते हैं, इसलिए किसी एक वर्ग को प्राथमिकता देकर अन्य के साथ भेदभाव करना उचित नहीं।