Wednesday, 17 June 2026

 

 

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डॉ. जितेंद्र सिंह ने श्रीनगर में 59वीं पूर्व-सेवानिवृत्ति परामर्श कार्यशाला और 13वें बैंकर्स जागरूकता कार्यक्रम का उद्घाटन किया

मोदी सरकार के 12 वर्षों के शासनकाल में केंद्र शासित प्रदेश के परिवर्तन के बाद जम्मू-कश्मीर में पेंशन सुधार कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के व्यापक वर्गों तक पहुंच रहे हैं : डॉ. जितेंद्र सिंह

Dr Jitendra Singh, Bharatiya Janata Party, BJP, Srinagar
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श्रीनगर , 16 Jun 2026

Last updated on: Jun 17, 2026, 12:58 IST

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पृथ्वी विज्ञान, प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत, पेंशन, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष मंत्रालय के केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा पिछले 12 वर्षों में शुरू किए गए शासन और पेंशन सुधार जम्मू-कश्मीर में कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के एक व्यापक वर्ग तक पहुंच रहे हैं, जो पूर्ववर्ती राज्य के केंद्र शासित प्रदेश में परिवर्तित होने के बाद संभव हुआ है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि जम्मू-कश्मीर के पुनर्गठन के परिणामस्वरूप इस क्षेत्र में केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई, जिससे शुरुआत में कार्यभार और सेवा वितरण संबंधी कुछ चुनौतियां उत्पन्न हुईं। उन्होंने कहा कि सरकार और संबद्ध संस्थानों के समन्वित प्रयासों से इन चुनौतियों का धीरे-धीरे समाधान हो गया है, जिससे केंद्र शासित प्रदेश के सभी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को पिछले 10 वर्षों में लागू किए गए पेंशन सुधारों का लाभ मिल रहा है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने जम्मू-कश्मीर केंद्रीय पेंशनभोगी संघों की भूमिका का विशेष रूप से उल्लेख करते हुए कहा कि वे इस परिवर्तन में महत्वपूर्ण भागीदार बनकर उभरे हैं। उन्होंने कहा कि संघों ने न केवल पूर्ण सहयोग दिया है, बल्कि लगातार मुद्दों को सरकार के ध्यान में लाते हुए उनके समाधान के लिए व्यावहारिक सुझाव भी दिए हैं। उन्होंने कहा कि उनके रचनात्मक सहयोग से पूर्व राज्य कर्मचारियों को केंद्र सरकार के ढांचे में शामिल करने में सुविधा मिली है और जम्मू-कश्मीर में पेंशन सुधारों के प्रभावी कार्यान्वयन में योगदान दिया है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि इसके परिणामस्वरूप, जम्मू और कश्मीर में पेंशनभोगी और कर्मचारी अब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में शुरू की गई नागरिक-केंद्रित पहलों की श्रृंखला से तेजी से लाभान्वित हो रहे हैं, जो पेंशन सुधारों की व्यापक पहुंच को दर्शाता है, जिसने पिछले दशक में पूरे देश में पेंशन प्रशासन के परिदृश्य को बदल दिया है।

श्रीनगर के शेर-ए-कश्मीर अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन केंद्र (एसकेआईसीसी) में पेंशन एवं पेंशनभोगी कल्याण विभाग (डीओपीपीडब्ल्यू) द्वारा आयोजित 59वीं पूर्व-सेवानिवृत्ति परामर्श (पीआरसी) कार्यशाला और 13वें बैंकर्स जागरूकता कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि सरकार ने पेंशनभोगियों के कल्याण, गरिमा और जीवन की सुगमता को नीति निर्माण के केंद्र में रखकर उनके प्रति दृष्टिकोण में मौलिक परिवर्तन किया है।

कार्यक्रम में पेंशन एवं पेंशनभोगी कल्याण विभाग की सचिव सुश्री निवेदिता शुक्ला वर्मा; श्री अटल डुल्लू, मुख्य सचिव, केंद्र शासित प्रदेश जम्मू और कश्मीर; श्री अमिताव चटर्जी, एमडी और सीईओ, जे एंड के बैंक; और श्री ध्रुबज्योति सेनगुप्ता, संयुक्त सचिव (पेंशन) ​​के अलावा वरिष्ठ अधिकारी, बैंकर्स और सेवानिवृत्ति के करीब आने वाले कर्मचारी शामिल हुए।

इस अवसर पर पेंशन एवं पेंशनभोगी कल्याण विभाग और जम्मू-कश्मीर बैंक ने केंद्र शासित प्रदेश में पेंशन संबंधी सेवाओं का विस्तार करने और पेंशनभोगियों के लिए उनकी पहुंच में सुधार लाने के उद्देश्य से एक संयुक्त पहल का शुभारंभ किया। डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि यह साझेदारी सेवा वितरण तंत्र को और मजबूत करेगी और जम्मू-कश्मीर में अधिक संख्या में पेंशनभोगियों को चल रहे पेंशन सुधारों के लाभों को अधिक सुविधापूर्वक प्राप्त करने में सक्षम बनाएगी।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि पिछले दशक की प्रमुख विशेषताओं में से एक यह है कि विभाग को पहले केवल पेंशन प्रक्रिया करने वाली संस्था के रूप में देखा जाता था, लेकिन अब यह पेंशनभोगियों के कल्याण के लिए पूरी तरह से समर्पित विभाग बन गया है। उन्होंने कहा कि आज जोर केवल पेंशन भुगतान आदेश जारी करने पर नहीं है, बल्कि पेंशनभोगियों और वरिष्ठ नागरिकों के लिए गरिमा, सुरक्षा, सुविधा और सुगम जीवन सुनिश्चित करने पर है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भविष्य प्लेटफॉर्म ने पेंशन प्रक्रिया के संपूर्ण डिजिटलीकरण को संभव बनाकर पेंशन प्रशासन में एक बड़ा बदलाव लाया है। पेंशन भुगतान आदेश अब डिजिलॉकर के साथ एकीकृत हैं, जिससे सेवानिवृत्त लोगों को पेंशन दस्तावेजों तक निर्बाध, कागजरहित और पारदर्शी पहुंच सुनिश्चित होती है।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के शासन एजेंडा के अंतर्गत शुरू किए गए सबसे सफल सुधारों में से एक का जिक्र करते हुए डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि फेस ऑथेंटिकेशन तकनीक के माध्यम से डिजिटल जीवन प्रमाण-पत्र की शुरुआत ने पेंशनभोगियों के जीवन को बदल दिया है, जिससे वे अपने घरों से ही मोबाइल फोन का उपयोग करके जीवन प्रमाण-पत्र जमा कर सकते हैं।

उन्होंने कहा कि इस पहल ने वरिष्ठ नागरिकों के जीवन को काफी सुगम बनाया है और बैंकों और कार्यालयों में जाने पर उनकी निर्भरता को कम किया है। डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि नवंबर 2025 में आयोजित राष्ट्रव्यापी डिजिटल जीवन प्रमाण-पत्र अभियान में अभूतपूर्व भागीदारी देखी गई, जिसमें देश भर में 1.91 करोड़ से अधिक डिजिटल जीवन प्रमाण-पत्र जारी किए गए, जिनमें से 1.16 करोड़ से अधिक फेस ऑथेंटिकेशन टेक्नोलॉजी के माध्यम से जारी किए गए, जो पेंशनभोगियों के बीच डिजिटल शासन की बढ़ती स्वीकृति को दर्शाता है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि सरकार ने सीपीईएनजीआरएएमएस, विषयगत समीक्षा तंत्र और राष्ट्रीय पेंशन अदालतों के माध्यम से शिकायत निवारण को मजबूत किया है, जिससे पेंशन संबंधी शिकायतों का तेजी से समाधान संभव हो सका है। उन्होंने आगे कहा कि पारिवारिक पेंशन, अतिरिक्त पेंशन, सेवानिवृत्ति लाभ और लापता कर्मचारियों से जुड़े मामलों में सुधारों ने पेंशनभोगियों और उनके परिवारों के लिए सामाजिक सुरक्षा ढांचे को और मजबूत किया है।

डॉ. सिंह ने कहा कि सरकार संस्थागत स्मृति को संरक्षित करने और अनुभव मंच के माध्यम से सेवानिवृत्त कर्मचारियों की निरंतर भागीदारी को प्रोत्साहित करने के लिए लगातार प्रयासरत है। उन्होंने कहा कि सेवानिवृत्त कर्मचारियों को अपने अनुभव, नवाचार और सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों को साझा करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है, जिससे लोक सेवकों की भावी पीढ़ियों के लिए ज्ञान का एक मूल्यवान भंडार तैयार होता है।

उन्होंने सेवानिवृत्त सरकारी कर्मचारियों द्वारा किए गए अनुकरणीय योगदान को मान्यता देने के उद्देश्य से शुरू की गई अनुभव योजना-2026 का भी स्वागत किया। डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत में पेंशनभोगियों की बढ़ती संख्या जीवन प्रत्याशा में वृद्धि और जीवन की गुणवत्ता में सुधार को दर्शाती है। आज सरकारी सेवा से सेवानिवृत्त होने वाले कर्मचारियों के पास अपार अनुभव, विशेषज्ञता और संस्थागत ज्ञान होता है, जो उन्हें सेवानिवृत्ति के बाद भी समाज के लिए मूल्यवान योगदानकर्ता बनाता है।

डॉ. सिंह ने कहा कि सेवानिवृत्ति पूर्व परामर्श कार्यशालाओं का उद्देश्य न केवल कर्मचारियों को पेंशन प्रक्रियाओं और सेवानिवृत्ति लाभों से परिचित कराना है, बल्कि उन्हें सेवानिवृत्ति के बाद एक सार्थक और उत्पादक जीवन के लिए तैयार करने में मदद करना भी है। इस प्रकार की पहल यह सुनिश्चित करती है कि सेवानिवृत्त कर्मचारियों द्वारा अर्जित अनुभव और विशेषज्ञता समाज और राष्ट्रीय विकास में योगदान देती रहे।

सेवानिवृत्त कर्मचारियों से देश के विकास पथ में सक्रिय भागीदार बने रहने का आह्वान करते हुए डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बार-बार इस बात पर जोर दिया है कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत के निर्माण में प्रत्येक नागरिक की भूमिका है। उन्होंने आगे कहा कि वरिष्ठ नागरिकों और पेंशनभोगियों की भी अपने व्यापक अनुभव और ज्ञान के साथ इस राष्ट्रीय मिशन में समान रूप से महत्वपूर्ण भूमिका है।

 

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