Saturday, 06 June 2026

 

 

खास खबरें 'बोलेगा घनौर, बदलेगा दौर' पैदल मार्च : सरबजीत सिंह झिंझर ने 8 दिनों में 160 किलोमीटर पैदल चले टीबी मरीजों के लिए जरूरी पौष्टिक भोजन, उपचार के दौरान थाली में रखें ये चीजें, रिकवरी होगी तेज झाड़ू की ‘बेअदबी’ के आरोप में टांडा के पार्टी कार्यकर्ता की गिरफ्तारी के खिलाफ कांग्रेस का राज्यव्यापी विरोध प्रदर्शन हिमाचल प्रदेश मंत्रिमंडल के निर्णय डॉ. मनसुख मांडविया और रेखा गुप्ता ने MY Bharat सम्मेलन में 6,000 युवाओं को किया प्रेरित पुरुषोत्तम मास विशेष : दक्षिण भारत का अनोखा नारायण मंदिर, आठ हिस्सों वाले शिखर की जमीन पर नहीं पड़ती परछाईं आइकॉन सेरामिक ने लवली मार्बल्स एवं सेनिटेशन के साथ मिलकर जालंधर में उत्तर भारत की सबसे बड़ी लक्ज़री सिरेमिक गैलरी का उद्घाटन किया नायब सिंह सैनी ने समालखा के सेवा साधना एवं ग्राम विकास केंद्र के वार्षिक स्थापना दिवस पर बतौर मुख्य अतिथि लिया भाग कैंसर को खत्म करने के लिए नशा मुक्ति अभियान को जन आंदोलन बनाया जाए : शिवराज सिंह चौहान योग को बनाएं जीवनशैली का हिस्सा, स्वस्थ नागरिक से ही बनेगा स्वस्थ भारत : रणबीर गंगवा भारत बनाम अफगानिस्तान : केएल राहुल के बाद शुभमन गिल का शतक, पहले दिन टीम इंडिया का दबदबा नवां गांव नगर परिषद के नवनिर्वाचित भाजपा पार्षदों ने सुखविंदर सिंह गोल्डी से की मुलाकात तरुण चुग ने राज्यसभा के लिए भरा नामांकन गुरुद्वारा श्री बंगला साहिब में मत्था टेका, श्री अकाल तख्त साहिब पर कांग्रेस के हमले को सिख इतिहास का दर्दनाक अध्याय बताया : केवल सिंह ढिल्लों बेअंत सिंह स्टेट यूनिवर्सिटी में शुरू होंगे एआई, रोबोटिक्स समेत 5 नए प्रोफेशनल कोर्स : हरजोत सिंह बैंस एन. चंद्रबाबू नायडू ने पार्टी मुख्यालय में कार्यकर्ताओं को दिया संगठन मजबूत करने का संदेश केएल राहुल ने 12वां टेस्ट शतक से की रोहित, रहाणे और मुरली की बराबरी बिहार में अंतरराष्ट्रीय खेलों के लिए ओलंपिक स्तर की मिलेगी सुविधाएं : सम्राट चौधरी सुबह क्यों जरूरी है हेल्दी नाश्ता, थाली में क्या-क्या करें शामिल? केवल सिंह ढिल्लों ने जगत प्रकाश नड्डा से की मुलाकात पंजाब भाजपा अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों ने दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता से की मुलाकात

 

खून की जांच से 5 साल पहले चल जाएगा लंग कैंसर का पता, शोध में बड़ा खुलासा

Health, Research, Melbourne
Listen to this article

Gurpreet Singh

Gurpreet Singh

5 Dariya News

मेलबर्न , 06 Jun 2026

Last updated on: Jun 06, 2026, 15:11 IST

वैज्ञानिकों ने एक ऐसे नए "ब्लड सिग्नेचर" (रक्त संकेतक) की पहचान की है, जो फेफड़ों के कैंसर के खतरे का पता पांच साल से भी अधिक समय पहले लगा सकता है। शोधकर्ताओं का मानना है कि यह खोज भविष्य में कैंसर की जल्द पहचान और रोकथाम के लिए एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है। यह अध्ययन वैज्ञानिक पत्रिका सेल में प्रकाशित हुआ है।

शोध के अनुसार, यह नई तकनीक उन लोगों को प्रिवेंटिव ड्रग्स के जरिए मदद कर सकती है जिन्हें लंग कैंसर होने का खतरा हो सकता है। वाल्टर एंड एलिजा हॉल इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल रिसर्च (डब्ल्यूईएचआई) ने इसे लेकर रिपोर्ट जारी की। जिसके मुताबिक, वैज्ञानिकों ने 48,000 से अधिक रक्त नमूनों का विश्लेषण किया। इस दौरान उन्हें 14 विशेष प्रोटीनों का एक ऐसा समूह मिला, जो अगले पांच वर्षों के भीतर फेफड़ों के कैंसर के जोखिम का संकेत दे सकता है।

इस खोज की पुष्टि दुनिया भर के आठ अलग-अलग डेटा सेटों में भी हुई, जिनमें धूम्रपान न करने वाले लोग भी शामिल थे। शोधकर्ताओं का कहना है कि यह संकेतक सीधे ट्यूमर से नहीं आता, बल्कि फेफड़ों में कैंसर बनने से पहले होने वाले सूजन संबंधी बदलावों को दर्शाता है। इसका मतलब है कि बीमारी शुरू होने से पहले ही शरीर में कुछ ऐसे परिवर्तन होने लगते हैं, जिन्हें पहचानकर समय रहते उपचार किया जा सकता है। 

सिन्हुआ न्यूज एजेंसी ने बताया कि अध्ययन के अनुसार, फेफड़ों का कैंसर आज भी दुनिया में कैंसर से होने वाली मौत का सबसे बड़ा कारण बना हुआ है। वर्तमान में स्क्रीनिंग कार्यक्रम मुख्य रूप से उन बुजुर्ग लोगों पर केंद्रित हैं, जिनका धूम्रपान का इतिहास रहा है। ऐसे में बड़ी संख्या में मरीजों में कैंसर का पता तब चलता है जब बीमारी काफी बढ़ चुकी होती है।

अध्ययन की सह-लेखिका और डब्ल्यूईएचआई की वैज्ञानिक क्लेर वीडेन ने कहा कि यह खोज ऑस्ट्रेलिया समेत दुनिया भर में अधिक प्रभावी और समावेशी कैंसर स्क्रीनिंग कार्यक्रम विकसित करने में मदद कर सकती है। वीडेन ने अपने समय में ये रिसर्च ब्रिटेन के क्रिक इंस्टीट्यूट में किया था। उन्होंने कहा, "ये नतीजे हमें ऐसे भविष्य के करीब ले जाते हैं, जहां कैंसर विकसित होने से पहले ही उसकी रोकथाम के लिए कदम उठाए जा सकेंगे।"

वहीं क्रिक इंस्टीट्यूट में क्लिनिकल रिसर्च डायरेक्टर चार्ली स्वैंटन ने कहा कि यह अध्ययन उस धारणा को मजबूत करता है कि उम्र बढ़ने के साथ होने वाली कई बीमारियों के पीछे शरीर में पहले से मौजूद सूजन की एक समान अवस्था हो सकती है। उनका मानना है कि भविष्य में यह ब्लड सिग्नेचर न केवल फेफड़ों के कैंसर बल्कि अन्य फेफड़ों की बीमारियों के जोखिम का भी पूर्वानुमान लगाने में मदद कर सकता है।

 

Tags: Health , Research , Melbourne

 

 

related news

 

 

 

Photo Gallery

 

 

Video Gallery

 

 

5 Dariya News RNI Code: PUNMUL/2011/49000
© 2011-2026 | 5 Dariya News | All Rights Reserved
Powered by: CDS PVT LTD