हरियाणा की सिंचाई एवं जल संसाधन मंत्री श्रुति चौधरी के प्रयासों से भालौट सब ब्रांच एवं झज्जर सब ब्रांच के पुनर्निर्माण कार्य को लेकर लंबे समय से चला आ रहा गतिरोध समाप्त हो गया है। किसानों, ग्रामीणों और नहर विभाग के अधिकारियों के साथ लगातार संवाद एवं सकारात्मक पहल के परिणामस्वरूप सभी पक्षों के बीच महत्वपूर्ण सहमति बनी है, जिससे अब दोनों नहरों के पुनर्निर्माण कार्य को दोबारा गति मिलेगी।
श्रुति चौधरी ने कहा कि प्रदेश सरकार किसानों के हितों की रक्षा करते हुए सिंचाई ढांचे को आधुनिक और मजबूत बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि किसी भी विकास कार्य की सफलता तभी संभव है जब उसमें स्थानीय लोगों की भावनाओं, सुझावों और आवश्यकताओं का सम्मान किया जाए।
इसी सोच के तहत किसानों की चिंताओं को गंभीरता से सुना गया और सभी पक्षों को साथ लेकर समाधान का रास्ता निकाला गया। गौरतलब है कि भालौट एवं झज्जर सब ब्रांच से जुड़े अनेक गांवों के किसानों और ग्रामीणों ने नहर के तल को पूरी तरह सीमेंट-कंक्रीट से पक्का किए जाने पर आपत्ति जताई थी।
किसानों का कहना था कि ऐसा होने से भूजल पुनर्भरण (रिचार्ज) प्रभावित हो सकता है तथा क्षेत्र के जल संतुलन पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। किसानों की इन आशंकाओं को ध्यान में रखते हुए नहर विभाग ने विभिन्न तकनीकी विकल्पों पर विचार-विमर्श किया और लगातार संवाद की प्रक्रिया जारी रखी।
आज की बैठक में जौली-लाठ, तेवड़ी, रीठाल, चीड़ी, धामड़, किलोई, बोहर, मकड़ौली, मायना सहित आसपास के गांवों के किसानों और ग्रामीणों ने भाग लिया। विस्तृत चर्चा के बाद यह सहमति बनी कि नहर के तल को 10 फुट तक कंक्रीट लाइनिंग के माध्यम से विकसित किया जाएगा, जबकि शेष हिस्से में ब्लॉक लाइनिंग की जाएगी।
साथ ही किसानों की सुविधा एवं सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए प्रत्येक दो पुलों के बीच सीढ़ियों का निर्माण तथा प्रत्येक पुल के साथ घाट विकसित किए जाएंगे। श्रुति चौधरी ने इस सहमति को क्षेत्र के किसानों, ग्रामीणों और विभाग के बीच बेहतर समन्वय का सकारात्मक उदाहरण बताते हुए सभी पक्षों का आभार व्यक्त किया।
उन्होंने कहा कि यह निर्णय विकास और जनभावनाओं के बीच संतुलन स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे एक ओर जहां नहरों की जल वहन क्षमता और सिंचाई व्यवस्था सुदृढ़ होगी, वहीं दूसरी ओर किसानों की चिंताओं का भी सम्मान सुनिश्चित होगा।
सिंचाई मंत्री ने विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिए कि पुनर्निर्माण कार्य को प्राथमिकता के आधार पर शीघ्र शुरू किया जाए तथा निर्धारित समयसीमा में गुणवत्तापूर्ण ढंग से पूरा किया जाए, ताकि क्षेत्र के किसानों को बेहतर सिंचाई सुविधाओं का लाभ मिल सके और कृषि उत्पादन को नई मजबूती प्राप्त हो।