पूर्व उपमुख्यमंत्री पंजाब और गुरदासपुर से सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा ने पेट्रोल, डीजल, सीएनजी और रसोई गैस की कीमतों में बढ़ोतरी को लेकर केंद्र की मोदी सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि अब पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ते ही चुनाव खत्म होने के बाद एलपीजी, पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ाकर जनता पर महंगाई का नया बम फोड़ दिया गया है।
उन्होंने कहा कि जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें लगातार कम थीं, तब भी केंद्र सरकार ने जनता को कोई राहत नहीं दी और भारी टैक्स वसूली जारी रखी। 12 साल से यह सरकार आम लोगों को राहत देने नहीं, बल्कि उनकी जेबें खाली करने में लगी हुई है।
रंधावा ने कहा कि महंगाई, बेरोजगारी और टैक्स के बोझ से परेशान जनता अब केंद्र सरकार की जनविरोधी नीतियों को समझ चुकी है। इसलिए बढ़ाई गई पेट्रोल-डीजल की कीमतों में 5-5 रुपए कटौती करके लोगों को राहत देने के लिए पंजाब सरकार को भी वैट टैक्स कम करना चाहिए।
अगर आम आदमी पार्टी की सरकार तुरंत वैट टैक्स कम नहीं करती है तो यह साफ हो जाएगा कि केंद्र सरकार और पंजाब सरकार दोनों मिलकर जनता पर महंगाई का बोझ डाल रही हैं। उन्होंने आगे कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार हर बार वैश्विक परिस्थितियों का बहाना बनाकर आम लोगों पर आर्थिक बोझ डालती है, जबकि सच्चाई यह है कि पिछले कई वर्षों से केंद्र सरकार पेट्रोलियम उत्पादों पर टैक्स के जरिए जनता से भारी वसूली कर रही है।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 से 2025 के बीच पेट्रोल पर औसतन 19.70 रुपए प्रति लीटर और डीजल पर 15.50 रुपए प्रति लीटर एक्साइज ड्यूटी लगाकर लोगों को लगातार लूटा गया। इस दौरान 21 बार एक्साइज ड्यूटी में बदलाव किए गए, जिनमें 12 बार बढ़ोतरी की गई।
उन्होंने कहा कि 27 मार्च 2026 को केंद्र सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी घटाने का दिखावटी ऐलान जरूर किया, लेकिन इसका फायदा जनता तक नहीं पहुंचा। रंधावा ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार सिर्फ प्रचार और हेडलाइन मैनेजमेंट की राजनीति कर रही है, जबकि असली लाभ तेल कंपनियों को पहुंचाया गया।
रंधावा ने कहा कि नरेंद्र मोदी का जनता से सोना न खरीदने का फरमान करीब 3.5 करोड़ छोटे-छोटे स्वर्णकारों, कारीगरों और कामगारों के लिए बर्बादी का संदेश बनकर आया है। उन्होंने कहा कि एक तरफ केंद्र सरकार देश की अर्थव्यवस्था मजबूत करने के बड़े-बड़े दावे करती है, वहीं दूसरी तरफ ज्वैलरी कारोबार जैसे बड़े रोजगार क्षेत्र को कमजोर करने में लगी हुई है।
उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने सोने-चांदी की इंपोर्ट ड्यूटी को 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दिया, जिससे छोटे कारोबारियों और कारीगरों पर सीधा असर पड़ा है। भारत की जीडीपी में ज्वैलरी सेक्टर का लगभग 7 प्रतिशत योगदान है और इस क्षेत्र से करीब 50 लाख कारीगर तथा 3.5 करोड़ लोग जुड़े हुए हैं।
इसके बावजूद केंद्र सरकार की नीतियां इस सेक्टर को आर्थिक संकट की तरफ धकेल रही हैं।