पूर्व शिक्षा मंत्री और विधायक परगट सिंह ने विजिलेंस ब्यूरो हैडक्वार्टर पर हुई सीबीआई रेड को लेकर आम आदमी पार्टी और भाजपा सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि यह चुनावी स्टंट है। आम आदमी पार्टी की मान सरकार ने जिस तरह से पिछले सवा चार साल में विजिलेंस ब्यूरो का गलत इस्तेमाल किया है, अब चुनाव नजदीक आते ही भाजपा ने केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल करके आप पर शिकंजा कसने का काम किया है।
भाजपा भी दूध की धुली नहीं है। पंजाब में आम आदमी पार्टी ‘छोटा गुंडा’ है, तो केंद्र में भाजपा ‘बड़ा गुंडा’ है। पंजाब में आप ने जमकर गुंडागर्दी की और भाजपा ने ‘बड़े गुंडे’ की तरह इनको दबाने का काम शुरू कर दिया है। दोनों ही पार्टियां भ्रष्टाचार को बढ़ावा दे रही हैं।
परगट ने कहा कि इस घटना ने पंजाब में आम आदमी पार्टी की विश्वसनीयता को तो कम किया ही है, साथ ही केंद्रीय एजेंसियों को पंजाब आने का रास्ता भी दिया है। क्योंकि खुद ही पंजाब में आम आदमी पार्टी ने विजिलेंस की मदद से अपने ही पांच मंत्रियों व नेताओं के खिलाफ कार्रवाई की और उनको जेल तक भिजवाने का काम किया।
इसके बाद खुलकर सीएम मान और उनकी आप सरकार ने विजिलेंस का इस्तेमाल फिरौती और भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने के लिए किया। मुख्यमंत्री ने विजिलेंस को अपना ‘तोता’ बनाकर रखा है। भाजपा और आप का अंदरुनी समझौता है।
इसलिए अब भाजपा को चुनाव के नजदीक आते ऐसी कार्रवाई करके आम आदमी पार्टी को उनकी औकात याद दिलाई है। उन्होंने कहा कि भाजपा का पैटर्न पूरे देश में एक जैसा है। वह पहले दूसरी पार्टियों के नेताओं को भ्रष्ट बताते हैं, फिर उनको अपनी पार्टी में ज्वाइन कराया जाता है।
उनको भाजपा की वॉशिंग मशीन में डालकर उनके दाग धोए जाते हैं। बंगाल और असम के दोनों मुख्यमंत्री इसके उद्हारण हैं। ऐसे अनेकों-अनेक ऐसे नेता हैं, जिनको भाजपा ने भ्रष्टाचारी बताकर फिर क्लीन चिट दी है। परगट सिंह ने कहा कि यह लड़ाई विचारधारा की नहीं बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और आप सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल की है।
इनका मकसद और काम सिर्फ पंजाब में भाजपा और आम आदमी पार्टी के बीच ही चुनावी लड़ाई दिखाना है, बाकी पार्टियों को मैदान से दूर करना है। शिक्षा मंत्री रहे विधायक परगट सिंह ने नीट की परीक्षा एक बार फिर से रद्द होने पर केंद्र सरकार पर सवाल उठाए।
उन्होंने कहा कि खुद प्रधानमंत्री या उनके नेताओं ने यह परीक्षा नहीं दी, इसलिए देश के 22 लाख बच्चों के दर्द को वह नहीं समझ पाएंगे। इस परीक्षा की तैयारी के लिए बच्चों को कीतनी कड़ी मेहनत करनी पड़ती है वह बच्चे ही जानते हैं। नीट की बार-बार परीक्षा रद्द होने की घटनाओं को रोकने के लिए केंद्र सरकार को कड़े कदम उठाने की जरूरत है।
आरोपियों के लिए ऐसी सजा निर्धारित की जानी चाहिए, ताकि इस तरह की घटनाओं को अंजाम देने वालों की रूह कांप जाए।