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नरेन्‍द्र मोदी ने गुजरात के वडोदरा में सरदारधाम छात्रावास का उद्घाटन किया

प्रधानमंत्री ने कहा कि व्यापक बदलाव और स्थायी परिणामों के लिए समाज और सरकार का साथ मिलकर कार्य करना अत्यंत आवश्यक है; इसी कारण, आज शिक्षा क्षेत्र में पहल जमीनी वास्तविकताओं को ध्यान में रखकर की जा रही है और राष्ट्रीय शिक्षा नीति इसका प्रमुख उदाहरण है : नरेन्‍द्र मोदी

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वडोदरा , 11 May 2026

Last updated on: May 12, 2026, 11:34 IST

प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने आज गुजरात के वडोदरा में सरदारधाम छात्रावास का उद्घाटन किया। सोमनाथ मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा की 75वीं वर्षगांठ वाले दिन ही वडोदरा के सरदार धाम में एक विशिष्ट सभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने शैक्षणिक संस्थानों के उद्घाटन और आध्यात्मिक स्मरण के इस शुभ संयोग को रेखांकित किया।

प्रधानमंत्री ने डॉ. दुश्यंत और दक्षा पटेल कॉम्प्लेक्स का लोकार्पण किया, साथ ही शिक्षण सहायता योजना का शुभारंभ किया और कई शैक्षणिक परियोजनाओं का भूमिपूजन भी किया। उन्होंने इन पहलों को युवाओं के भविष्य के करियर के लॉन्चिंग पैड करार दिया। श्री मोदी ने कहा, “कुछ घंटे पहले मैं प्रभास पाटन में सोमनाथ अमृत महोत्सव मना रहा था और अब हम यहां परिवर्तनकारी शैक्षणिक संस्थानों का उद्घाटन कर रहे हैं।

यह संयोग इस बात का प्रतीक है कि हमारी विरासत और प्रगति साथ-साथ आगे बढ़ती हैं।” प्रधानमंत्री ने सरदार धाम के 75 वर्षों के शैक्षणिक मिशन का उल्लेख करते हुए और देशभर में संस्था के बढ़ते शैक्षणिक विस्तार को सूचीबद्ध करते हुए वर्ष 2021 की अपनी यात्रा को याद किया, जब बालिका छात्रावास का भूमिपूजन किया गया था।

इसके साथ ही उन्होंने सूरत, राजकोट, भुज, मेहसाणा और दिल्ली में संस्था की उपस्थिति का भी उल्लेख किया। प्रधानमंत्री ने अहमदाबाद के निकोल क्षेत्र में आज एक हजार छात्राओं की क्षमता वाले नए बालिका छात्रावास के शुभारंभ पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए इसके सकारात्मक प्रभावों को रेखांकित किया। श्री मोदी ने कहा, “पिछले वर्ष के लोकार्पण के बाद हजारों बेटियाँ वहाँ शिक्षा प्राप्त कर रही हैं और अपने भविष्य को नई दिशा दे रही हैं।

आज इस छात्रावास के भूमिपूजन के साथ ही सरदार धाम ने देशभर की बेटियों के लिए शिक्षा के अवसरों का विस्तार करने की अपनी अटूट प्रतिबद्धता को दर्शाया है।” समाज के विकास के व्यापक परिप्रेक्ष्य में शैक्षिक परिवर्तन को संदर्भ में रखते हुए और सुधार को अनुभवजन्‍य वास्‍तविकता पर आधारित करते हुए प्रधानमंत्री ने इस बात पर ज़ोर दिया कि समग्र बदलाव के लिए सरकार और समाज दोनों का मिलकर कार्य करना आवश्यक है।

उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति को प्रणालीगत परिवर्तन के लिए एक तथ्य-आधारित दृष्टिकोण का उत्कृष्ट उदाहरण बताया। साथ ही उन्होंने इस नीति में किए गए बहुआयामी सुधारों का विस्तार से उल्लेख किया, जिनमें भाषा-आधारित भेदभाव को समाप्त करना तथा पाठ्यक्रम में कौशल विकास और नवाचार को समाहित करना शामिल है।

श्री मोदी ने कहा, “व्यापक बदलाव और स्थायी परिणामों के लिए समाज और सरकार का साथ मिलकर कार्य करना अत्यंत आवश्यक है और हमारे युवाओं को अपनी डिग्री अप्रेंटिसशिप के अवसरों के साथ पूरी करनी होगी, ताकि उन्हें पढ़ाई पूरी होने के बाद अनुभव न होने के कारण भटकना न पड़े।” गुजरात की विशिष्ट उद्यमशील संस्कृति की सराहना करते हुए, शिक्षा में हो रहे निवेश से उत्पन्न जनसांख्यिकीय लाभांश का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि गुजरात के युवाओं में उद्यम की स्वाभाविक शक्ति होती है।

जिसे स्टार्टअप इंडिया मिशन के माध्यम से नई दिशा और गति मिल रही है। प्रधानमंत्री ने छोटे शहरों से तेजी से उभरते स्टार्टअप्स और उद्यमिता में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी का उल्लेख करते हुए कहा कि जिन क्षेत्रों को पहले जोखिम भरा माना जाता था, वे अब युवाओं और नवोन्मेषकों के आकर्षण का केंद्र बन रहे हैं। श्री मोदी ने कहा, “आने वाले समय में देश के पास इतनी बड़ी संख्या में कुशल कार्यबल होगा कि भारत के विनिर्माण क्षेत्र को अभूतपूर्व गति मिलेगी।

पिछले एक दशक से खेल से लेकर अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी तक, हर क्षेत्र में इस बदलाव की झलक दिखाई दे रही है।” प्रधानमंत्री ने महिला श्रम बल की भागीदारी को सभ्यता की प्रगति का मूल आधार बताते हुए कहा कि गुजरात ने लगभग दो दशक पहले ही इसे समझ लिया था। उन्होंने लैंगिक समावेशिता पर आधारित राज्य के अग्रणी विकास मॉडल का उल्लेख किया।

देश भर में दोहराई जा रही गुजरात मॉडल की सफलता का उल्‍लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि करोड़ों महिलाओं के बैंक खाते खोले गए, साथ ही स्वच्छता, जल और ऊर्जा जैसी मूलभूत सुविधाओं तक पहुँच सुनिश्चित की गई। उन्होंने मुद्रा योजना के माध्यम से महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने तथा आयुष्मान भारत जैसी योजनाओं के जरिए सुरक्षा कवच प्रदान करने को भी रेखांकित किया।

श्री मोदी ने कहा, “गुजरात ने यह समझ लिया था कि समाज में प्रगति का सबसे बड़ा आधार उसकी आधी आबादी की भागीदारी होता है और, उसने इस दिशा में मजबूती से कदम भी उठाए। आज इन पहलों का लाभ पूरे देश की महिलाओं तक पहुँच रहा है।” जो क्षेत्र पहले पुरुषों के दबदबे वाले समझे जाते थे, उनमें महिलाओं की बढ़ती भागीदारी का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि आज बेटियाँ उन क्षेत्रों में नेतृत्वकारी भूमिकाओं तक पहुँच रही हैं, जिनके दरवाजे पहले कभी उनके लिए बंद हुआ करते थे।

उन्होंने सेना, विमानन और राजनीति जैसे क्षेत्रों में तेजी से हो रहे बदलावों की सराहना की। संसद में नारी शक्ति वंदन संशोधन को पारित करने के विफल प्रयासों का उल्लेख करते हुए उन्‍होंने कहा कि कुछ राजनीतिक कारणों से यह पारित नहीं हो सका। साथ ही उन्होंने लैंगिक समानता के लक्ष्यों के प्रति संकल्पबद्धता दोहराई। 

श्री मोदी ने कहा, "आज नेशनल डिफेंस एकेडमी में महिला कैडेट्स प्रशिक्षण ले रही हैं, हमारी बेटियां फाइटर पायलट बन रही हैं, राजनीति में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए लगातार प्रयास हो रहा है, हालांकि राजनीतिक कारणों से संशोधन पास नहीं हो पाया, फिर भी हमारी प्रतिबद्धता अडिग बनी हुई है। सरकार के दायरे से बाहर समाज के विभिन्न क्षेत्रों में लैंगिक समावेशी अवसरों के विस्तार की जिम्मेदारी तय करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि सिविल सोसायटी संगठन भी इस कार्य में समान रूप से उत्तरदायी हैं।

उन्होंने सरदार धाम की विशेष प्रतिबद्धता को एक अनुकरणीय संस्थागत उदाहरण के रूप में प्रस्तुत किया। विभिन्न क्षेत्रों में महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए संगठन की व्यापक भागीदारी की सराहना करते हुए प्रधानमंत्री ने उसे संस्थागत मान्यता दी। श्री मोदी ने कहा, “मुझे खुशी है, सरदार धाम ये दायित्व पूरी निष्ठा से उठा रहा है और अपने कार्यों के माध्यम से यह सिद्ध करता है कि सामाजिक परिवर्तन के लिए सतत और संगठित संस्थागत प्रतिबद्धता आवश्यक है।”

गुजरात की विशिष्ट सांस्कृतिक विशेषता का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि यह राज्य समय की दिशा को शीघ्र पहचानने और परिवर्तन को अवसर में बदलने की क्षमता के लिए जाना जाता है। उन्होंने कहा कि गुजरात की प्रतिस्पर्धात्मक शक्ति उसकी वह संगठनात्मक क्षमता है, जिसके माध्यम से वह किसी भी व्यवधान को अवसर में परिवर्तित कर देता है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि वर्तमान समय में विनिर्माण क्षेत्र का परिवर्तन ऐतिहासिक निरंतरता का हिस्सा है। सेमीकंडक्टर, एयरोस्पेस, उन्नत इंजीनियरिंग, हरित ऊर्जा और वित्तीय सेवाओं जैसे उभरते क्षेत्रों में हो रहे विविधीकरण का उल्लेख करते हुए उन्‍होंने राज्‍य की संस्‍थागत अनुकूलनशीलता को दर्ज किया। श्री मोदी ने कहा, “परिवर्तन को अवसर में बदलना, नई संभावनाओं को अपनाना और भविष्य की तैयारी समय रहते शुरु करना गुजरात की कार्यसंस्कृति का हिस्सा रहा है।

इसी कारण राज्य हर उभरते क्षेत्र में नई पहचान बनाने में सफल रहा है।” प्रधानमंत्री ने देश में सेमीकंडक्टर निर्माण क्षमता का उल्लेख करते हुए इसे आधुनिक विनिर्माण परिवर्तन का एक महत्वपूर्ण आधारभूत ढाँचा बताया। उन्होंने कहा कि “मेड इन इंडिया” सेमीकंडक्टर साणंद में निर्मित किए जा रहे हैं और काइनेस सेमीकंडक्टर प्लांट में उत्पादन पहले ही शुरू हो चुका है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि धोलेरा और सूरत में नए सेमीकंडक्टर प्रोजेक्ट तेजी से आगे बढ़ रहे हैं और भारत की आकांक्षा है कि वैश्विक सप्लाई चेन को अधिक केंद्रीकृत और सशक्त बनाया जाए। उन्होंने इन क्षेत्रों को वैश्विक नेटवर्क के महत्वपूर्ण नोड्स के रूप में चिह्नित किया। श्री मोदी ने कहा, “गुजरात वैश्विक सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन में एक महत्वपूर्ण नोड के रूप में उभर रहा है, और वडोदरा इस परिवर्तन में तेजी से भूमिका निभा रहा है, यहाँ निर्मित मेट्रो कोच पहले ही अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुँच रहे हैं।”

विभिन्न क्षेत्रों में वडोदरा की विनिर्माण विशेषज्ञता का उल्लेख करते हुए तथा इंजीनियरिंग, भारी मशीनरी, रसायन, फार्मास्यूटिकल्स और पावर इक्विपमेंट के मजबूत केंद्र के रूप में शहर के उभरने को रेखांकित करते हुए प्रधानमंत्री ने समानांतर रूप से विकसित हो रहे पेशेवर कौशल विकास ढाँचे की भी चर्चा की। गतिशक्ति यूनिवर्सिटी की परिवहन और लॉजिस्टिक्स प्रोफेशनल तैयारी के साथ-साथ वडोदरा को एक उभरते विमानन निर्माण केंद्र के रूप में स्थापित कर रही एयरोस्पेस परियोजनाओं की प्रशंसा करते हुए उन्होंने बड़े पैमाने पर आर्थिक बदलाव का अनुमान लगाया।

श्री मोदी ने कहा, “वडोदरा कई क्षेत्रों में एक मैन्युफैक्चरिंग पावरहाउस बन चुका है और एयरोस्पेस क्षेत्र में विकसित होती क्षमताएँ यह संकेत देती हैं कि यह शहर जल्द ही वैश्विक स्तर पर मान्यता प्राप्त एविएशन हब के रूप में विकसित होगा।” एक साथ अनेक वैश्विक संकटों से उपजी अस्थिरता को स्वीकार करते हुए तथा वर्तमान चुनौतियों को ऐतिहासिक अनिश्चितताओं की निरंतरता के संदर्भ में रखते हुए, प्रधानमंत्री ने महामारी, आर्थिक व्यवधान और पश्चिम एशिया संघर्ष को क्रमिक दबाव बिंदुओं के रूप में चिन्हित किया।

प्रधानमंत्री ने पश्चिम एशिया संघर्ष को इस दशक के प्रमुख संकट के रूप में वर्णित करते हुए और महामारी के दौरान हुए सामूहिक प्रयासों से उसकी तुलना करते हुए, सरकारी कार्रवाई को व्यापक सामाजिक उत्तरदायित्व के ढाँचे के भीतर रखा। श्री मोदी ने कहा, “कोरोना संकट से लेकर वैश्विक आर्थिक व्यवधानों और पश्चिम एशिया तनाव तक, दुनिया अभूतपूर्व अस्थिरता का सामना कर रही है, जो हर देश को प्रभावित करती है, लेकिन जब हमने मिलकर कोरोना का मुकाबला कर लिया, तो हम निरंतर सरकारी प्रयासों के माध्यम से निश्चित रूप से इस संकट से भी अवश्य पार पा जाएंगे।”

व्‍यवस्‍था संबंधी तनाव के दौरान जनभागीदारी को अत्यंत महत्वपूर्ण संसाधन बताते हुए और देश को मज़बूत बनाने के लिए मिलकर काम करने की अपील करते हुए प्रधानमंत्री ने विस्तार से बताया कि नागरिकों को कर्तव्यों को प्राथमिकता देनी चाहिए और राष्ट्र के संसाधनों पर पड़ने वाले बोझ को कम करना चाहिए। ऊर्जा सुरक्षा को एक कमज़ोरी के तौर पर चिन्हित करते हुए, कच्चे तेल के वि‍श्‍लेषण के जरिए भारत की आयात निर्भरता का अंदाज़ा लगाते हुए उन्होंने क्षेत्रीय संघर्षों के कारण वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाएँ बाधित होने का उल्‍लेख किया।

श्री मोदी ने कहा, “देश को जनभागीदारी की शक्ति की अत्यंत आवश्यकता है, क्योंकि भारत के आयात का एक बहुत बड़ा हिस्सा कच्चे तेल का है, जो उन क्षेत्रों से आता है जो आज संघर्षों में उलझे हुए हैं, जिससे कमी और कीमतों में वृद्धि का दोहरा संकट उत्‍पन्‍न हो रहा है।” प्रधानमंत्री ने छोटे-छोटे निजी संकल्पों के माध्यम से सामूहिक कार्रवाई का आह्वान करते हुए तथा पेट्रोल-डीजल की खपत कम करने की रणनीतियों का उल्लेख करते हुए, सार्वजनिक परिवहन को प्राथमिकता देने और कार-पूलिंग जैसी पहलों को अपनाने की वकालत की।

वर्चुअल मीटिंग्स को प्राथमिकता देने और वर्क-फ्रॉम-होम व्यवस्थाओं के माध्यम से कार्यस्थलों के डिजिटलीकरण तक संरक्षण संबंधी अपीलों का विस्तार करते हुए, उन्होंने प्रौद्योगिकी-आधारित समाधानों को प्रभाव को कई गुना बढ़ाने वाले साधन के रूप में चिन्हित किया। श्री मोदी ने कहा, “जहाँ भी संभव हो, मेट्रो, इलेक्ट्रिक बसों और सार्वजनिक परिवहन का अधिक उपयोग करके पेट्रोल और डीजल की खपत कम करें; सरकारी और निजी दोनों कार्यालयों को वर्चुअल मीटिंग्स और वर्क-फ्रॉम-होम व्यवस्थाओं को प्राथमिकता देनी चाहिए, ताकि ईंधन की अनावश्यक खपत में उल्लेखनीय कमी लाई जा सके।।”

विदेशी मुद्रा बचाने की आवश्यकता को खाद्य पदार्थों और कीमती धातुओं तक विस्तारित करते हुए तथा अवकाश संबंधी उपभोग के पैटर्न की ओर ध्यान आकर्षित करते हुए प्रधानमंत्री ने स्वास्थ्य लाभों के साथ खाद्य तेल के उपयोग को कम करने और संकट के समय सोने की खरीद को टालने की अपील की। उन्होंने कहा कि विदेश में छुट्टियाँ मनाने और डेस्टिनेशन वेडिंग्स की बढ़ती प्रवृत्ति के कारण विदेशी मुद्रा के बाहर जाने में बढ़ोत्‍तरी हो रही है, जिसका प्रभाव कई क्षेत्रों पर पड़ रहा है।

श्री मोदी ने कहा, “देश खाद्य तेल और सोने के आयात पर भारी मात्रा में विदेशी मुद्रा खर्च करता है, जबकि डेस्टिनेशन वेडिंग्स में ऐसे रिज़र्व खर्च होते हैं जो देश के लचीलेपन को मज़बूती प्रदान कर सकते हैं, वैश्विक अनिश्चितता के इस दौर में संयम अत्यंत आवश्यक है।” छुट्टियों में होने वाले खर्च को घरेलू विकल्पों की ओर मोड़ते हुए तथा स्टैच्यू ऑफ यूनिटी का एक रणनीतिक पर्यटन विकल्प के रूप में इस्तेमाल करते हुए, प्रधानमंत्री ने भारत-केंद्रित यात्रा प्रवृत्तियों की वकालत की और इस स्मारक को एक आकर्षक विवाह स्थल के रूप में प्रस्तुत किया।

उत्कृष्ट सुविधाओं, सांस्कृतिक महत्व और व्‍यापक आर्थिक प्रभावों को रेखांकित करते हुए उन्होंने पर्यटन विकास को विदेशी मुद्रा बचाने की आवश्यकताओं के साथ जोड़ा। श्री मोदी ने कहा, “हमें अपनी छुट्टियाँ भारत में ही बितानी चाहिए और विवाह जैसे अवसरों के लिए भी भारतीय स्थानों का चयन करना चाहिए। गुजरात में कई उत्कृष्ट स्थल हैं और स्टैच्यू ऑफ यूनिटी जैसी जगहें डेस्टिनेशन वेडिंग्स के लिए शानदार सुविधाएँ प्रदान करती हैं, जिससे विदेशी मुद्रा देश में ही बनी रहती है।”

“वोकल फॉर लोकल” ढाँचे के माध्यम से संरक्षण संबंधी अपीलों को एक व्यापक राष्ट्रीय आंदोलन के रूप में जोड़ते हुए तथा स्वदेशी उर्वरकों और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देकर कृषि आयाम को स्पष्ट करते हुए प्रधानमंत्री ने विभिन्न आर्थिक क्षेत्रों में स्थानीयकरण की अवधारणा को आगे बढ़ाया। डीज़ल पर निर्भरता कम करने के साथ-साथ सोलर पंप अपनाने पर ज़ोर देते हुए उन्होंने पर्यावरण की स्थिरता को विदेशी मुद्रा बचाने के लक्ष्यों के साथ जोड़ा।

श्री मोदी ने कहा, “विदेशी वस्तुओं के बजाय स्थानीय उत्पादों को अपनाएँ और अपने गाँवों, शहरों और देश के उद्यमियों को सशक्त बनाएँ; कृषि में विशेष रूप से स्वदेशी उर्वरकों और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दें तथा सौर पंपों के उपयोग को बढ़ाएँ, ताकि विदेशी मुद्रा का बाहर जाना और पर्यावरणीय बोझ दोनों कम हो सकें।”

संरक्षण संबंधी अपीलों को एक सामूहिक कार्रवाई ढाँचे में समाहित करते हुए और व्यापक नागरिक सहभागिता की शक्ति का आह्वान करते हुए प्रधानमंत्री ने 140 करोड़ नागरिकों द्वारा समन्वित रूप से संकल्प लेने को एक परिवर्तनकारी शक्ति बताया। एकीकृत राष्ट्रीय प्रतिक्रिया की आवश्यकता को दोहराते हुए और संकट से निपटने की सामूहिक क्षमता में विश्वास व्यक्त करते हुए, उन्होंने पूरे समाज के व्यापक स्तर पर जुटान का आह्वान किया और राष्ट्रीय लचीलेपन को मजबूत करने पर जोर दिया।

श्री मोदी ने कहा, “ये प्रयास छोटे लग सकते हैं, लेकिन जब 140 करोड़ लोग मिलकर संकल्प लेते हैं, तो छोटे-छोटे प्रयास राष्ट्र की सबसे बड़ी शक्ति बन जाते हैं। हमें एक बार फिर एकजुट होना होगा, ताकि यह संकट हमारी प्रगति और विकास को प्रभावित न करे, और मुझे विश्वास है कि हम सब मिलकर इन संकल्पों को पूरा करेंगे और अपने प्रिय राष्ट्र को और मजबूत बनाएंगे।”

प्रधानमंत्री ने सरदार गौरव रत्न से सम्मानित किए जाने पर अपार कृतज्ञता व्यक्त करते हुए कहा कि सरदार वल्लभभाई पटेल के नाम से जुड़े इस सम्मान के साथ बड़ी जिम्मेदारी भी जुड़ी है। उन्होंने अपने खास मज़ाकिया अंदाज़ में कहा कि गगजी भाई ने उन्हें चतुराई से इस दायित्व से बाँध दिया है। प्रधानमंत्री ने इसे अपना “नसीब” बताते हुए कहा कि सरदार साहब के अधूरे सपनों को पूरा करना और उनके द्वारा शुरू किए गए कार्यों को आगे बढ़ाना ही अब उनके जीवन का उद्देश्य बन गया है।

उन्होंने सभा को आश्वस्त किया कि जनता से मिले आशीर्वाद, उनके द्वारा आत्मसात किए गए मूल्य और गुजरात की मिट्टी से सीखे गए सबक उनके अटूट संकल्प को निरंतर मजबूती देते रहेंगे। प्रधानमंत्री ने जनरल करियप्पा के एक किस्से का ज़िक्र करते हुए कहा कि उन्‍होंने एक बार कहा था कि भले ही दुनिया भर में सम्मान पाना अच्छा लगता है, लेकिन अपने देश से मिलने वाला सम्मान एक अलग ही आनंद देता है ।

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत की बढ़ती ताकत से दुनिया भर में सम्मान मिलता है, वहीं अपने देश से मिलने वाला आशीर्वाद कार्य करने की क्षमता को कई गुना बढ़ा देता है। सरदार धाम के शैक्षणिक योगदान की सराहना करते हुए तथा उसके द्वारा किए जा रहे परिवर्तनकारी कार्यों के लिए संस्थागत पहचान प्रदान करते हुए, प्रधानमंत्री ने शिक्षा तक पहुँच बढ़ाकर राष्‍ट्र-निर्माण में संगठन की भूमिका को स्वीकार किया।

उन्होंने आज उद्घाटित परियोजनाओं को युवाओं के सशक्तिकरण के प्रति समाज की सामूहिक प्रतिबद्धता का प्रतीक करार देते हुए प्रशंसा करते हुए अपनी बात समाप्‍त की। श्री मोदी ने कहा, “मैं आज की परियोजनाओं के लिए अपनी शुभकामनाएँ देता हूँ, जो शिक्षा और अवसरों के माध्यम से राष्ट्र के भविष्य के निर्माण के लिए समाज की सामूहिक प्रतिबद्धता का प्रतिनिधित्व करती हैं।”

 

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