हरियाणा के ऊर्जा, परिवहन एवं श्रम मंत्री श्री अनिल विज ने कहा कि जिस प्रकार पहले गुरूकुल में बच्चों को शिक्षा देने के साथ-साथ संस्कारमय बनाया जाता था, आज उसी प्रकार स्कूलों को भी अपने स्कूलों में बच्चों को शिक्षा के साथ-साथ संस्कारमय बनाना जरूरी है। शिक्षा के तंत्र को और मजबूत करते हुए ऐसा तंत्र तैयार करना है जिससे जो भी बच्चा पढ़कर निकले वह सही मायने में देश की पूंजी साबित हो।श्री विज आज देर सायं अंबाला छावनी में एक संस्थान द्वारा आयोजित “स्कूल एक्सीलैंस अवार्ड” कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि शिक्षण संस्थानों के संचालकों व लोगों को संबोधित कर रहे थे।
ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने कहा कि वह अध्यापक को शिल्पकार मानते हैं, जिस प्रकार से शिल्पकार को जैसी मिट्टी मिलती है उसको वह आकार देता है उसी प्रकार से अध्यापक भी बच्चों को आकार देता है, उनको आने वाले चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार करता है, उनको संस्कार देता है। जैसे आज युग बदल रहा है नई तकनीक आ रही है। पहले कुम्हार डंडे से ही चाक घुमाता था, अब तकनीक से बिजली से चाक घुमता है।
अब नई-नई तकनीक आ रही है। कंप्यूटर में बच्चों को पारंगत करना, आगे बढ़ाना यह भी स्कूलों का ही दायित्व है। अब “एआई” आ गया है कुछ लोग तकनीक से भागते हैं, मगर उनका मानना है कि हमें इनके साथ चलना चाहिए। यदि एआई आया है तो एआई के क्या-क्या फायदे समाज को मिल सकते है, कैसे हम इसके सहयोग से आगे दौड़ सकते है, किस प्रकार से चुनौतियों का किस प्रकार से समाधान किया जा सकता है, हमें अपने बच्चों को उनमें पारंगत करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को जीवन में आगे बढऩे के लिए वातावरण भी बेहतर होना चाहिए। हमें बच्चों को बेहतर माहौल देना चाहिए ताकि बच्चों को जबरदस्ती स्कूलों तक न लाना पड़े, बल्कि बच्चे अपने आप स्कूल तक आए। पहले के समय में स्कूलों में रट्टा हुआ करता था जिसके माध्यम से बच्चों को तैयार किया जाता था। लेकिन आज बच्चों को प्रश्र-उत्तर के माध्यम से, वार्तालाप करके, भिन्न-भिन्न तरीकों से प्रशिक्षण देते हुए आगे बढ़ाने का काम किया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि गेम के माध्यम से भी ऐसे डिवाइज तैयार किए जाएं कि बच्चे खेल-खेल में जीवन में आगे बढ़ सकते हैं।
ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने कहा कि पहले जो हम शिक्षा गुरूकुल में ग्रहण करते थे जबकि अब स्कूल बन गए हैं। गुरूकुल व स्कूल में काफी अंतर है। गुरूकुल में शिक्षा के साथ-साथ बच्चों में संस्कार भी दिए जाते हैं हमें फिर से अपने इन स्कूलों को गुरूकुल बनाना है। स्कूलों में संस्कार देने का काम भी उतना महत्वपूर्ण है जितना अंक देने का काम है। स्कूलों को यह महत्वपूर्ण कार्य गंभीरता से करने की जरूरत है। इससे हमारी वाली पीढ़ी अवश्य सुधरेगी।
*राजनीति को गाली देने से नहीं, स्कूल में ‘कल के नेता’ तैयार करने से बदलेगा देश - अनिल विज*
ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने कहा कि जिस प्रकार हम अपने बच्चों को आईएएस, आईपीएस व इंजीनियर बनाने के लिए काम करते हैं उसी प्रकार हमारे बच्चे कल के अच्छा नेता बने उसके लिए भी तैयार करना है, जिसकी आज सबसे ज्यादा जरूरत है। हमें अपने स्कूलों में एजेंडा भी शामिल करना चाहिए कि कल का नेता कैसा होना चाहिए, उस पर भी कार्य करना है।
हमने प्रजातंत्र को अंगीकार किया है, प्रजातंत्र के लिए प्रतिनिधि चाहिए और प्रतिनिधि बनाने के लिए आप का एक एजेंडा होना चाहिए। हमें भविष्य में अच्छे प्रतिनिधियों की जरूरत है और प्रतिनिधि बनाने का दायित्व भी स्कूलों पर है। राजनीति को गाली देने से हमारा दायित्व पूरा नहीं होता।उन्होने कहा कि आज यहां पर जो कार्यक्रम आयोजित किया गया है उसके लिए 200 प्रविष्ठयां आई थी जिनमें से लगभग 40 स्कूलों को यहां पर सम्मानित करने का काम किया गया है।
इससे पहले आज कार्यक्रम में बतौर मुख्यतिथि पहुंचे ऊर्जा मंत्री अनिल विज का पुष्प गुच्छ देकर उनका स्वागत किया। इस मौके पर ऊर्जा मंत्री ने विभिन्न क्षेत्रों में अच्छा कार्य करने वाले अम्बाला, कुरुक्षेत्र, यमुनानगर, कैथल, करनाल आदि स्कूलों एक्सीलैंस अवार्ड प्रदान किए। इस मौके पर पवन शर्मा, किरत पांडे, योगेश मिड्डा जी, नगर परिषद की अध्यक्ष स्वर्ण कौर, उपाध्यक्ष ललता प्रसाद, मदन लाल शर्मा, राजीव डिम्पल, विजेन्द्र चौहान, हर्ष बिन्द्रा, रवि बुद्धिराजा, विकास बहगल, मोहित कौशिक, दीपक भसीन, विपिन खन्ना, के साथ-साथ अन्य गणमान्य लोग मौजूद रहे।