आज वरिष्ठ कांग्रेसी नेता और पूर्व स्वास्थ्य मंत्री श्री बलबीर सिंह सिद्धू ने पंजाब सरकार, खासकर आम आदमी पार्टी के नेतृत्व वाली सरकार पर तीखा हमला करते हुए कहा कि आने वाले नगर निगम चुनावों में अपनी संभावित हार को देखते हुए सरकार अब हर गैर-लोकतांत्रिक हथकंडा अपना रही है। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा की गई वार्डबंदी पूरी तरह गलत, अपारदर्शी, पक्षपातपूर्ण और सोची-समझी साजिश का हिस्सा है।
जहां वार्ड नंबर 42 में जनरल वर्ग की 678 वोटें रखी गई हैं, वहीं वार्ड नंबर 46 में एससी वर्ग की 7002 वोटें हैं। यह सीधे तौर पर लोकतंत्र का गला घोंटने के बराबर है और मतदाताओं के अधिकारों के साथ खुला अन्याय है। सिद्धू ने कहा कि यदि नियमों और कानून के तहत ईमानदारी से वार्डबंदी की जाती, तो शहर में 80 से 90 वार्ड आसानी से बनाए जा सकते थे।
लेकिन सरकार ने अपने राजनीतिक लाभ और अपने नेताओं को फायदा पहुंचाने के लिए जबरदस्ती पूरे क्षेत्र को सिर्फ 50 वार्डों में सीमित कर दिया। यह साफ दिखाता है कि यह सरकार प्रशासन नहीं बल्कि राजनीतिक उद्देश्यों से चल रही है।
उन्होंने कहा कि वोटर लिस्टों में लगातार बदलाव इस बात का प्रमाण है कि पूरी प्रक्रिया धोखाधड़ी से भरी हुई है। 15 दिन पहले की सूची कुछ और थी, अब कुछ और है, और आगे फिर नई सूची लाने की बात की जा रही है—यह सब चुनावों को प्रभावित करने की साजिश है।
सिद्धू ने विशेष रूप से कहा कि एससी वर्ग से संबंधित वार्डों के साथ भी न्याय नहीं किया गया, जो अत्यंत निंदनीय है और यह दर्शाता है कि सरकार समाज के हर वर्ग के साथ धोखा कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि आम आदमी पार्टी ने अपने नेताओं और उनके परिवारों को लाभ पहुंचाने के लिए वार्डों की सीमाओं को तोड़-मरोड़ कर अपने अनुसार ढाला है।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी पहले ही इस मामले में अपने आपत्तियां दर्ज करवा चुकी है, लेकिन अगर सरकार ने अब भी कोई कार्रवाई नहीं की, तो कांग्रेस हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाने से पीछे नहीं हटेगी। अंत में उन्होंने चेतावनी दी कि चाहे सरकार कितनी भी दबाव की राजनीति कर ले, कांग्रेस पार्टी चुप नहीं बैठेगी।
लोगों के अधिकारों की लड़ाई और तेज़ी से लड़ी जाएगी और चुनाव मैदान में पूरी तैयारी के साथ उतरकर इस सरकार को जवाब दिया जाएगा। उन्होंने मांग की कि मौजूदा वार्डबंदी को तुरंत रद्द कर नई, निष्पक्ष और संतुलित प्रक्रिया लागू की जाए, ताकि हर मतदाता को समान अधिकार मिल सके।