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नए ज़िम्मेदार ऑनलाइन गेमिंग इकोसिस्टम का निर्माण : एस. कृष्णन

S Krishnan, Secretary, Ministry of Electronics and Information Technology
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Gurpreet Singh

Gurpreet Singh

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चंडीगढ़ , 29 Apr 2026

Last updated on: Apr 29, 2026, 18:32 IST

ऑनलाइन गेमिंग के लिए एक राष्ट्रीय ढाँचा स्थापित करने की दिशा में भारत की पहल अवसर और जोखिम के संगम से उत्पन्न हुई है। बीते एक दशक में डिजिटल गेमिंग का तेजी से विस्तार हुआ है, जिसे बड़े पैमाने पर स्मार्टफोन अपनाने, किफायती इंटरनेट कनेक्टिविटी और तकनीक का उपयोग करने और उस पर निर्भर रहने वाली युवा आबादी का समर्थन मिला है। 

इस विकास ने नवाचार, कौशल विकास, रचनात्मक उद्योगों और रोजगार सृजन के लिए सार्थक अवसरों का सृजन किया है। मनोविनोद के लिए  गेमिंग और संगठित प्रतिस्पर्धी प्रारूपों ने भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान देने की क्षमता भी प्रदर्शित की है।

इन अवसरों के साथ-साथ, ऑनलाइन मनी गेमिंग—विशेष रूप से सट्टेबाजी और दांव लगाने वाले (यानी बेटिंग वेजरिंग) प्लेटफॉर्मों के अनियंत्रित विस्तार ने गंभीर सामाजिक और आर्थिक चिंताओं को भी जन्‍म दिया। ऐसे अनेक सेवा प्रदाता राज्य सीमाओं के पार या विदेशी क्षेत्रों से संचालित होते थे, जो घरेलू सुरक्षा उपायों को नज़रअंदाज़ करते थे और कानूनों को लागू करना कठिन बनाते थे। 

दबाव बनाने वाले विज्ञापनों और मनोवैज्ञानिक रूप से प्रभावित करने वाले डिज़ाइन फीचर्स ने कमजोर उपयोगकर्ताओं में लत जैसी प्रवृत्तियों और वित्तीय नुकसान को बढ़ावा दिया। वित्तीय संकट, डिजिटल भुगतान प्रणालियों के दुरुपयोग और अस्पष्ट अंतरराष्ट्रीय वित्तीय लेन-देन की रिपोर्ट्स ने धोखाधड़ी, मनी लॉन्ड्रिंग और वित्तीय अस्थिरता से जुड़े जोखिमों को उजागर किया। 

इन परिस्थितियों ने एक ऐसे राष्ट्रीय ढाँचे की आवश्यकता को रेखांकित किया, जो व्यक्तियों—विशेषकर युवाओं—की सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए गेमिंग इकोसिस्टम के वैध हिस्सों को जिम्मेदारी से विकसित होने में सक्षम बनाए। ऑनलाइन सोशल गेम्स और ई-स्पोर्ट्स नामक संगठित प्रतिस्पर्धी प्रारूपों जैसे वैध गेमिंग क्षेत्रों की सहायता के लिए एकीकृत संस्थागत ढाँचे का अभाव भी उतना ही महत्वपूर्ण था। 

डेवलपर्स के पास श्रेणीकरण की ऐसी कोई प्रक्रिया नहीं थी, जिसका पहले से अनुमान लगाया जा सके और उपयोगकर्ताओं को अक्सर वैध मनोरंजन और अवैध  सट्टेबाजी के बीच फर्क समझने में कठिनाई होती थी। अत: इसका उद्देश्य केवल हानिकारक गतिविधियों पर रोक लगाना नहीं, बल्कि एक संतुलित ढाँचा भी स्थापित करना था, जो उपयोगकर्ताओं की सुरक्षा सुनिश्चित करे और जिम्मेदार नवाचार को भी संभव बनाए। 

ऑनलाइन खेल संवर्धन और विनियमन अधिनियम, 2025, (पीआरओजीए) इसी संतुलित दृष्टिकोण को दर्शाता है, जिसे डेवलपर्स, ई-स्पोर्ट्स संगठनों, कानूनी विशेषज्ञों, प्रौद्योगिकी पेशेवरों और सामाजिक संगठनों के हितधारकों के साथ व्यापक परामर्श के बाद अंतिम रूप दिया गया है। प्राप्त प्रतिक्रियाओं में लगातार पारदर्शी श्रेणीकरण, पूर्वानुमेय अनुपालन दायित्वों और वैध प्रारूपों के लिए व्‍यवस्थित व सरल मान्यता प्रक्रियाओं की आवश्यकता पर जोर दिया गया। 

हितधारकों ने अवैध सट्टेबाजी प्लेटफॉर्मों  के खिलाफ समन्वित कार्रवाई मजबूत करते हुए वैध मनोरंजक और प्रतिस्पर्धी गेमिंग को बढ़ावा देने का समर्थन किया। संचालन स्तर पर, यह ढाँचा परस्पर संबद्ध तीन चरणों—अवधारण, मान्यता और पंजीकरण—पर आधारित एक व्‍यवस्थित श्रृंखला प्रस्तुत करता है। 

ये चरण क्रमिक रूप से कार्य करते हैं और इन्हें पीआरओजीए तथा उसके नियमों में दी गई वैधानिक परिभाषाओं के साथ समझना आवश्यक है। अवधारण एक नियामक प्रवेश द्वार के रूप में कार्य करता है, जिसके माध्यम से किसी भी गेम की जांच और उसका श्रेणीकरण किया जाता है। 

यह प्रत्‍येक ऑनलाइन गेम के लिए अनिवार्य नहीं है, बल्कि केवल सीमित और निर्धारित परिस्थितियों में ही आवश्यक होता है। सबसे ज्‍यादा महत्वपूर्ण बात यह है कि ई-स्पोर्ट्स की मान्यता से पहले अवधारण अनिवार्य होता है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि प्रतिस्पर्धी प्रारूप वैधानिक सुरक्षा मानकों का पालन करते हैं और सट्टेबाजी के तत्वों से मुक्त रहते हैं। 

इसके अलावा, अवधारण आमतौर पर उन स्थितियों में आवश्यक होता है, जब किसी गेम के ऑनलाइन मनी गेमिंग की परिभाषा के दायरे में आने की आशंका हो, जब अधिसूचित ऑनलाइन सोशल गेम्स की श्रेणियों के लिए श्रेणीकरण जरूरी हो, जब शिकायतों या खुफिया सूचनाओं से प्रतिबंधित गतिविधियों को सक्षम करने वाले संभावित वित्तीय तत्वों का संकेत मिले, या जब भारतीय ऑनलाइन गेमिंग प्राधिकरण (ओजीएआई) जनहित में जांच का निर्देश दे। 

अवधारण प्रारंभिक श्रेणीकरण को संभव बनाकर, अवैध वित्तीय मॉडलों को गेमिंग इकोसिस्‍टम में प्रवेश करने से रोकता है, जबकि वैध प्रारूपों को नियामक स्पष्टता के साथ आगे बढ़ने की अनुमति देता है। अवधारण के बाद, पात्र प्रारूपों को मान्यता दी जा सकती है। 

ई-स्पोर्ट्स की मान्यता राष्ट्रीय खेल शासन अधिनियम, 2025 के अंतर्गत विनियमित होती है, जिसमें संगठित मल्टीप्लेयर गेमप्ले, पूर्व-निर्धारित प्रतिस्पर्धात्मक नियम और परिणाम केवल मानसिक कौशल, शारीरिक दक्षता या रणनीतिक निर्णय लेने जैसे कारकों पर आधारित होना आवश्यक है। प्रतिभागिता शुल्क की अनुमति केवल प्रतियोगिता से संबंधित प्रशासनिक खर्चों और प्रदर्शन-आधारित पुरस्कार संरचनाओं को समर्थन देने के लिए ही दी जा सकती है। 

हालांकि, किसी भी रूप में सट्टेबाजी या दांव लगाना पूरी तरह से प्रतिबंधित रहता है। मान्यता से पहले अनिवार्य अवधारण यह सुनिश्चित करता है कि मान्यता प्राप्त ई-स्पोर्ट्स प्रारूप सभी वैधानिक सुरक्षा मानकों का पालन करते हैं। इसके समानांतर, यह ढाँचा ऑनलाइन सोशल गेम्स के पंजीकरण के लिए एक मार्ग स्थापित करता है, जो वित्तीय सट्टेबाजी के लिए नहीं, बल्कि मुख्यतः मनोरंजन और सामाजिक सहभागिता के उद्देश्य से बनाए गए होते हैं। 

ऑनलाइन सोशल गेम्स की केवल उन्‍हीं श्रेणियों का ही पंजीकरण करने की आवश्‍यकता होगी, जिन्‍हें सरकार द्वारा विशेष रूप से अधिसूचित किया गया हो। जहाँ श्रेणीकरण की निश्चितता होना आवश्यक है, वहाँ पंजीकरण से पहले अवधारण किया जा सकता है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि उनमें सट्टेबाजी के तत्व मौजूद नहीं हैं।

इस श्रृंखला का अंतिम चरण पंजीकरण है, जो नियामक दृश्यता प्रदान करता है तथा संतुलित निगरानी और लागू की जा सकने वाली जवाबदेही सुनिश्चित करता है। पंजीकरण आमतौर पर ई-स्पोर्ट्स की मान्यता के बाद होता है या फिर ऑनलाइन सोशल गेम्स की अधिसूचित श्रेणियों पर लागू होता है। 

यह उन मामलों में भी निर्देशित किया जा सकता है, जहाँ  निर्धारण के परिणाम औपचारिक निगरानी की आवश्यकता दर्शाते हैं या जहाँ ओजीएआई जनहित में ऐसी निगरानी को आवश्यक समझता है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि  पंजीकरण पूरे प्लेटफॉर्म पर नहीं ,बल्कि प्रत्येक ऑनलाइन गेम सेवा प्रदाता के अलग-अलग खेलों पर लागू होता है, जिससे अनुपालन यथोचित बना रहता है और साथ ही प्राधिकरणों को अधिकृत खेलों का एक विश्वसनीय रिकॉर्ड बनाए रखने में सहायता मिलती है।

यह वर्तमान ढाँचा प्रतिक्रियात्मक प्रवर्तन से आगे बढ़कर सक्रिय और निवारक शासन की ओर परिवर्तन दर्शाता है। अनुकूल अवधारण प्रारंभिक फिल्‍टर के रूप में कार्य करता है, मान्यता वैधता का स्पष्ट फर्क स्थापित करती है, और पंजीकरण नियामक दृश्यता प्रदान करते हुए सही निगरानी और लागू की जा सकने वाली जवाबदेही सुनिश्चित करता है। 

साथ ही, अवैध ऑनलाइन मनी गेमिंग के खिलाफ कार्यान्‍वयन को, विशेष रूप से विदेशी ऑपरेटरों को लक्षित करते हुए समन्वित ब्लॉकिंग, जांच-आधारित ओजीएआई की कार्रवाई और वित्तीय व्यवधान के उपायों के माध्यम से मजबूत किया गया है। यह दो-स्तरीय दृष्टिकोण ढाँचे की मूल विचारधारा: वैध संस्थाओं के लिए हल्के फुल्‍के नियमन तथा अवैध संचालकों के खिलाफ सख्त कार्यान्‍वयन  को प्रतिबिंबित करता है।

कार्यान्‍वयन  के अलावा, यह ढाँचा जिम्मेदार इकोसिस्‍टम के विकास के लिए भी अनुकूल परिस्थितियाँ तैयार करता है। स्पष्ट नियामक मार्ग वैध गेमिंग के विकास, प्रतिस्पर्धी अवसंरचना और सहायक डिजिटल सेवाओं में निवेश को प्रोत्साहित करते हैं। 

ई-स्पोर्ट्स की मान्यता संगठित प्रतियोगिताओं और पेशेवर भागीदारी को सक्षम बनाती है, जबकि विनियमित श्रेणियाँ विकास, अनुपालन, साइबर सुरक्षा और इवेंट प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में नए अवसरों में सहायता देती हैं। पीआरओजीए के माध्यम से शुरू किया गया यह परिवर्तन बिखरी हुई प्रतिक्रियाओं से आगे बढ़कर पूर्वानुमेय शासन की ओर बदलाव को दर्शाता है। 

निवारक श्रेणीकरण, वैध मान्यता और जवाबदेह पंजीकरण को एक साथ जोड़कर यह ढाँचा एक स्थिर वातावरण तैयार करता है, जहाँ नवाचार जनहित की सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए जिम्मेदारी के साथ विकसित हो सकता है।

 

Tags: S Krishnan , Secretary , Ministry of Electronics and Information Technology

 

 

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