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राजस्थान में है लीलाधर का 1698 में बना भव्य मंदिर, जहां भगवान के चरण छूकर मुड़ जाती है चंबल नदी

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5 Dariya News

बूंदी , 23 Apr 2026

Last updated on: Apr 24, 2026, 13:26 IST

नारायण के देश भर में कई अद्भुत मंदिर स्थित हैं। राजस्थान के बूंदी जिले में चंबल नदी के किनारे लीलाधर को समर्पित ऐसा ही भव्य मंदिर है, जो न सिर्फ अपनी वास्तुकला के लिए मशहूर है, बल्कि एक अनोखी लोक मान्यता के कारण भी चर्चा में रहता है। मान्यता है कि यहां लीलाधर के चरणों को छूने के बाद चंबल नदी मुड़ जाती है और दिशा बदल लेती है।

राजस्थान के बूंदी जिले में स्थित केशव राय जी महाराज का मंदिर आस्था, इतिहास और प्राकृतिक रहस्य का अनूठा संगम प्रस्तुत करता है। मान्यता है कि यहां भगवान विष्णु के चरणों का स्पर्श करने के बाद चंबल नदी अपना रास्ता बदल लेती है। यही वजह है कि यह मंदिर श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए खास आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।

स्थानीय लोगों के अनुसार, इस जगह से नदी का नाम चारण्यमति हो जाता है। यह मंदिर आस्था और इतिहास का अद्भुत संगम है। केशव का यह मंदिर बूंदी शहर से लगभग 45 किलोमीटर दूर चंबल नदी के तट पर बना हुआ है, जो केशवरायपाटन क्षेत्र में आता है। चंबल नदी के किनारे बसे इस प्राचीन मंदिर का निर्माण विक्रम संवत 1698 में बूंदी के शासक महाराजा शत्रु साल ने करवाया था।

भगवान विष्णु को समर्पित यह मंदिर अपनी भव्यता और अद्वितीय वास्तुकला के लिए प्रसिद्ध है। मंदिर में राजस्थानी और मुगल शैली का सुंदर मेल देखने को मिलता है, जो अलग बनाता है। केशव मंदिर में दो प्रतिमाएं स्थापित हैं। इनमें एक प्रतिमा श्री केशवरायजी की श्वेत संगमरमर से बनी और दूसरी श्री चतुर्भुज माधव की है। केशव राय मंदिर एक ऐसा स्थान है जहां आस्था, इतिहास और प्रकृति का अद्भुत मेल देखने को मिलता है।

चंबल नदी से जुड़ी मान्यताएं और मंदिर की भव्यता इसे एक अनोखी पहचान देती है। मंदिर की दीवारों, खंभों और छतों पर की गई बारीक नक्काशी दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर देती है। लाल बलुआ पत्थर से निर्मित इस धाम में देवी-देवताओं की सुंदर मूर्तियां उकेरी गई हैं, जो उस समय के शिल्पकारों की उत्कृष्ट कला का प्रमाण हैं। मंदिर परिसर में प्रवेश करते ही शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव होता है, जो यहां आने वालों को आंतरिक सुकून प्रदान करता है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस मंदिर का संबंध चंबल नदी से गहराई से जुड़ा हुआ है। कहा जाता है कि भगवान के चरणों को स्पर्श करने के बाद नदी की धारा मुड़ जाती है, जिसे श्रद्धालु एक चमत्कार के रूप में देखते हैं। यही आस्था इस स्थान को और अधिक पवित्र बनाती है। केशव राय मंदिर न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह बूंदी की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का भी प्रतीक है।

यहां साल भर श्रद्धालु बड़ी संख्या में आते हैं, लेकिन जन्माष्टमी और कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर मंदिर की रौनक देखते ही बनती है। इन त्योहारों के दौरान मंदिर को विशेष रूप से सजाया जाता है और दूर-दूर से भक्त यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं। कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर यहां भव्य मेले का आयोजन होता है, जिसमें श्रद्धालु चंबल नदी में स्नान कर धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लेते हैं।

यह आयोजन न केवल धार्मिक बल्कि सांस्कृतिक दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। पर्यटन के लिहाज से भी बूंदी एक खास महत्व रखता है। केशव राय मंदिर के अलावा यहां तारागढ़ किला, गढ़ महल और चित्रशाला जैसे ऐतिहासिक स्थल भी पर्यटकों को आकर्षित करते हैं। साथ ही, बूंदी अपनी सुंदर बावड़ियों, हवेलियों और लघु चित्रकला के लिए भी प्रसिद्ध है।

स्थानीय बाजारों में मिलने वाले हस्तशिल्प, पारंपरिक वस्त्र, मिट्टी के बर्तन और आभूषण पर्यटकों के लिए खास आकर्षण होते हैं। यहां के कारीगरों द्वारा बनाए गए ये उत्पाद राजस्थान की समृद्ध संस्कृति की झलक प्रस्तुत करते हैं। राजस्थान के बूंदी स्थित मंदिर पहुंचने के लिए प्रमुख हवाई अड्डा जयपुर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा है। वही, बूंदी निकटतम रेलवे स्टेशन है।

 

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