पंजाब के पूर्व स्वास्थ्य मंत्री बलबीर सिंह सिद्धू ने आज पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट द्वारा पंजाब सरकार को कर्मचारियों और पेंशनरों के लंबित महंगाई भत्ता (DA) को जून तक जारी करने के निर्देशों का स्वागत किया। साथ ही उन्होंने आम आदमी पार्टी के नेतृत्व वाली राज्य सरकार की कर्मचारियों के अधिकारों की अनदेखी करने को लेकर कड़ी आलोचना की।
बलबीर सिंह सिद्धू ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि कर्मचारी, जो राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था की रीढ़ हैं, को अपने अधिकारों के लिए अदालत का रुख करना पड़ा। उन्होंने कहा कि हाई कोर्ट के सख्त निर्देशों ने एक बार फिर पंजाब सरकार की विफलता को उजागर कर दिया है, जो बढ़ती महंगाई और बार-बार की गई मांगों के बावजूद समय पर डीए जारी करने में असफल रही है।
“यह फैसला पंजाब सरकार की नाकामी का स्पष्ट प्रमाण है। सरकार ने कर्मचारियों और पेंशनरों को उनका हक देने के बजाय भुगतान में लगातार देरी की और उन्हें अदालत के दरवाजे खटखटाने के लिए मजबूर किया,” बलबीर सिंह सिद्धू ने कहा।
उन्होंने आगे कहा कि यह और भी चौंकाने वाला है कि जहां पंजाब सरकार अपनी छवि सुधारने और भ्रामक प्रचार पर सार्वजनिक धन खर्च कर रही है, वहीं वह कर्मचारियों और पेंशनरों के वैध बकाया जारी करने के लिए अदालत से और समय मांग रही थी। सिद्धू ने कहा कि यह सरकार की गलत प्राथमिकताओं को दर्शाता है, जो शासन के बजाय छवि निर्माण पर अधिक ध्यान दे रही है।
बलबीर सिंह सिद्धू ने यह भी कहा कि वरिष्ठ अधिकारियों और निचले स्तर के कर्मचारियों के बीच डीए दरों में असमानता अन्यायपूर्ण और भेदभावपूर्ण है। उन्होंने कहा कि ऐसी नीतियां आम कर्मचारियों की आर्थिक परेशानियों के प्रति सरकार की संवेदनहीनता को दर्शाती हैं।
उन्होंने मांग की कि पंजाब सरकार तुरंत हाई कोर्ट के निर्देशों का पूरी तरह पालन करे, सभी लंबित बकाया बिना किसी और देरी के जारी करे और भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न उत्पन्न होने दे। अंत में उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी पंजाब के कर्मचारियों और पेंशनरों के साथ मजबूती से खड़ी है और पूर्ण न्याय मिलने तक उनकी आवाज उठाती रहेगी।