चैत्र नवरात्रि की अष्टमी पर प्रयागराज स्थित प्रसिद्ध अलोपी शंकरी देवी शक्तिपीठ मंदिर में गुरुवार सुबह से ही हजारों की संख्या में श्रद्धालु माता के दर्शन और पूजा के लिए पहुंच रहे हैं। सुबह ब्रह्म मुहूर्त से ही मंदिर परिसर में भक्तों की भीड़ लगनी शुरू हो गई, जो दिनभर और देर रात तक लगातार बनी रहेगी।
अष्टमी के इस पावन दिन पर मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना का आयोजन किया गया। यहां की सबसे खास बात यह है कि इस शक्तिपीठ में माता की पारंपरिक मूर्ति नहीं है, बल्कि एक रहस्यमयी झूले (पालने) की पूजा की जाती है। यही इस मंदिर की अनोखी पहचान भी है, जो इसे बाकी मंदिरों से अलग बनाती है।
भक्त इस पालने को ही माता का स्वरूप मानकर श्रद्धा के साथ जल, फूल और अन्य पूजन सामग्री अर्पित करते हैं। एक श्रद्धालु ने बताया कि आज अष्टमी का दिन है और इस मंदिर का बहुत बड़ा महत्व है। मान्यता है कि यहां माता रानी प्रकट हुई थीं, इसलिए इसे अलोपी शंकरी के नाम से जाना जाता है। यह एक प्रमुख शक्तिपीठ है, जहां दूर-दूर से लोग अपनी मनोकामनाएं लेकर आते हैं।
उन्होंने यह भी बताया कि सुबह से ही सैकड़ों की संख्या में महिलाएं और पुरुष पूजा के लिए पहुंच रहे हैं और यह सिलसिला पूरे दिन चलता रहेगा। दूसरे श्रद्धालु ने कहा कि आज का दिन बहुत खास है। सभी लोग बड़ी श्रद्धा और शांति के साथ माता की पूजा कर रहे हैं। हम अपने परिवार के साथ-साथ पूरे देश की खुशहाली और तरक्की के लिए भी प्रार्थना करने आए हैं।
मंदिर में हर तरफ 'जय माता दी' के जयकारे गूंज रहे थे, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया है। एक अन्य भक्त ने मंदिर की विशेषता बताते हुए कहा कि यह नवरात्रि का सबसे महत्वपूर्ण दिन होता है। यहां माता की मूर्ति नहीं बल्कि पालने की पूजा होती है, जो एक रहस्य और आस्था का प्रतीक है। इसी वजह से यहां आने वाले हर श्रद्धालु के मन में अलग ही भाव रहता है।
उन्होंने बताया कि भक्तजन पूरी श्रद्धा से जल, प्रसाद और अन्य सामग्री अर्पित करते हैं। अष्टमी के दिन कन्या पूजन का भी विशेष महत्व होता है और मंदिर परिसर में कई भक्तों ने कन्या पूजन कर आशीर्वाद लेते हैं। श्रद्धालुओं का मानना है कि इस दिन सच्चे मन से मांगी गई हर मुराद माता जरूर पूरी करती हैं। यही कारण है कि यहां इतनी बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं।