रयात बाहरा यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ लॉ में “प्राकृतिक न्याय – निष्पक्ष प्रक्रिया का आधार” विषय पर एक विशेषज्ञ व्याख्यान का आयोजन किया गया। इस सत्र का उद्देश्य विद्यार्थियों को कानूनी व्यवस्था में निष्पक्षता को आधार प्रदान करने वाले मूलभूत सिद्धांतों की गहन समझ देना था। डीन, स्कूल ऑफ लॉ, प्रो. (डॉ.) अखिलेश राणौत ने विशिष्ट वक्ता का औपचारिक स्वागत किया।
विश्वविद्यालय के वाइस चांसलर, प्रो. (डॉ.) संजय कुमार ने भी इस अवसर पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई और विद्यार्थियों को विषय के साथ सक्रिय रूप से जुड़ने के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) राजीव शर्मा का ज्ञानवर्धक संबोधन रहा, जिन्होंने मुख्य वक्ता के रूप में अपने विचार साझा किए।
व्याख्यान में संकाय सदस्यों और विद्यार्थियों की उत्साहपूर्ण भागीदारी देखने को मिली, जिससे यह एक समृद्ध अकादमिक अनुभव बन गया। न्यायमूर्ति शर्मा ने प्राकृतिक न्याय के प्रमुख सिद्धांतों पर प्रकाश डालते हुए कानूनी कार्यवाहियों में निष्पक्षता, पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने में उनकी अनिवार्य भूमिका पर जोर दिया।
अपने व्यापक न्यायिक अनुभव के आधार पर उन्होंने पक्षपात के विरुद्ध नियम तथा निष्पक्ष सुनवाई के अधिकार जैसे महत्वपूर्ण सिद्धांतों की विस्तार से व्याख्या की। उन्होंने सैद्धांतिक व्याख्याओं को वास्तविक जीवन के मामलों से जोड़ते हुए विद्यार्थियों को पाठ्यपुस्तकों से परे एक मूल्यवान और व्यापक दृष्टिकोण प्रदान किया।
इस सत्र ने विद्यार्थियों को न्यायिक तर्क तथा समकालीन कानूनी परिदृश्य में प्राकृतिक न्याय के व्यावहारिक उपयोग की गहन समझ विकसित करने में सक्षम बनाया। उनकी रोचक प्रस्तुति शैली और स्पष्ट व्याख्याओं ने जटिल कानूनी अवधारणाओं को सरल बनाया, जिससे व्याख्यान ज्ञानवर्धक और प्रेरणादायक सिद्ध हुआ।
विद्यार्थियों ने इंटरैक्टिव सत्र में सक्रिय रूप से भाग लिया, जो कानून और न्याय की बारीकियों को समझने में उनकी गहरी रुचि को दर्शाता है। कार्यक्रम प्रेरणादायक वातावरण में संपन्न हुआ और प्रतिभागियों को निष्पक्ष प्रक्रिया की बुनियादी अवधारणाओं का और अधिक अध्ययन करने के लिए प्रेरित किया।