श्रीराम लीला ड्रामाटिक क्लब द्वारा आयोजित रामलीला में कार्यक्रम का शुभारंभ भगवान की आरती से किया गया। श्रीराम लीला ड्रामाटिक क्लब प्रधान शिव चरण (पिंकी) एवं वरिंदर भामा ने सयुंक्त रूप से जानकारी देते हुए बताया कि मंचन में दिखाया गया कि सुबाहु और मारीच ऋषि-मुनियों के हवन-यज्ञ में बाधा डालते हैं। इससे परेशान होकर ऋषि विश्वामित्र राजा दशरथ से मिलने पहुंचते हैं।
वे राम और लक्ष्मण को अपने साथ भेजने का आग्रह करते हैं। राजा दशरथ पहले हिचकिचाते हैं और खुद जाने की बात करते हैं। इस पर विश्वामित्र क्रोधित हो जाते हैं। तब गुरु वशिष्ठ ने बीच-बचाव किया। उन्होंने राजा को समझाया कि क्षत्रिय का धर्म है यज्ञ, ब्राह्मण, गाय और संतों की रक्षा करना। इसके बाद राजा दशरथ राम-लक्ष्मण को विश्वामित्र के साथ भेजने को तैयार हो गए। जब राम और लक्ष्मण ने ताड़का और सुबाहु राक्षसों का वध किया, तब दर्शकों ने जय श्रीराम के जयकारे लगाए।
इसके बाद अहिल्या उद्धार का दृश्य दिखाया गया। मिथिला नरेश जनक से सीता स्वयंवर का निमंत्रण मिलने पर विश्वामित्र, राम और लक्ष्मण मिथिला की ओर प्रस्थान करते हैं। रास्ते में गौतम ऋषि के आश्रम में पत्थर बनी अहिल्या का राम के चरण-स्पर्श से उद्धार होता है। उन्होंने बताया कि श्री राम की भूमिका कार्तिक कौशिक (14), लक्ष्मण की भूमिका दिव्यांश राणा (15) के द्वारा निभाई गई। इन बच्चों की जोड़ी द्वारा निभाई गई भूमिका को दर्शकों द्वारा खूब पसंद किया गया। इस अवसर पर क्लब के सदस्यों सहित अन्य समाजसेवी भी उपस्थित थे।