अरब देशों से सैकड़ों माताओं के बेटों को मौत के मुँह से बचाकर हज़ारों घर उजड़ने से बचाने वाले दुबई के बड़े दिल वाले कारोबारी और "सरबत दा भला चैरिटेबल ट्रस्ट" के संस्थापक डॉ. एस.पी. सिंह उबराए ने दुबई से डिपोर्ट किए गए 8 बेबस नौजवानों को अपने खर्चे पर घर पहुँचाया। इस संबंधी जानकारी साझा करते हुए डॉ. एस.पी. सिंह उबराए ने बताया कि कपूरथला ज़िले के आत्मा सिंह जबकि जालंधर ज़िले से संबंधित विजय कुमार, हरबंस लाल, गगन कुमार पुत्र परमजीत, विजय कुमार पुत्र बिंदर, गगन कुमार पुत्र बिंदर, बग्गा प्रकाश और अजय कुमार पुत्र बलविंदर कुमार ने उनसे टेलीफोन पर संपर्क करके बताया कि उनकी काम करने वाली कंपनी ने उनके साथ धोखाधड़ी कर आर्थिक और मानसिक शोषण किया।
जिस पर फ़ौरन कार्रवाई करते हुए जहाँ उन्हें इस संबंधी बनती सलाह दी वहीं डिपोर्ट होने उपरांत उक्त सभी की चेन्नई से अमृतसर तक हवाई टिकटें लेने के अलावा आज अमृतसर हवाई अड्डे पर ट्रस्ट के पंजाब प्रधान सुखजिंदर सिंह हेर और जनरल सचिव मनप्रीत सिंह संधू की मौजूदगी में हवाई अड्डे से गाड़ी द्वारा उनके घरों तक पहुँचाया गया। डॉ. उबराए ने एक बार फिर नौजवानों को सचेत किया कि यदि वे विदेश जाना चाहते हैं तो एजेंटों द्वारा बताई जाने वाली काम करने वाली कंपनी और वीज़ा संबंधी पूरी जानकारी लेकर ही जाएँ, ताकि विदेश में बेवजह की परेशानियों से बचा जा सके।
हवाई अड्डे पर पहुँचने पर उक्त पीड़ित नौजवानों ने अपने साथ हुए बड़े धोखे संबंधी जानकारी देते हुए बताया कि उनकी काम वाली कंपनी के मालिक ने उनसे कड़ी मेहनत करवाने के बावजूद भी तीन महीनों की तनख़्वाह नहीं दी, बल्कि उल्टा हमें डिपोर्ट करने की धमकियाँ देने के अलावा हमारे कमरे की बिजली तक बंद करवा दी, जिससे हमें मानसिक रूप से बहुत परेशान किया गया।
उन्होंने बताया कि जब हम अपना हक़ लेने के लिए वहाँ की लेबर कोर्ट गए तो उन्होंने हमें पुलिस के पास भेज दिया, जहाँ इंसाफ़ देने की बजाय हमें 11 दिनों के लिए जेल भेजकर वहीं से सीधा डिपोर्ट करके चेन्नई भेज दिया गया। उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि उस समय हमारे पास एक भी पैसा और सामान नहीं था।
इस बारे जब हमने दोबारा डॉ. उबराए से फ़ोन पर बात की तो उन्होंने तुरंत हमें अमृतसर तक हवाई टिकटें दिलाने के अलावा हवाई अड्डे से घरों तक पहुँचने के लिए गाड़ी का भी प्रबंध किया। जिसके लिए हम डॉ. उबराए का इस कठिन घड़ी में बड़ी मदद करने के लिए दिल से धन्यवाद करते हैं।
इस दौरान पीड़ित नौजवानों ने भी विदेश जाने के इच्छुक नौजवानों से अपील की कि वे कंपनी की पूरी तरह जाँच पड़ताल करके ही जाएँ, क्योंकि हम नहीं चाहते कि किसी और को हमारी तरह मानसिक परेशानी झेलनी पड़े।