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राजीव रंजन सिंह ने झांसी स्थित आईसीएआर-आईजीएफआरआई में तकनीक आधारित चारे के समाधान पर दिया ज़ोर

Rajiv Ranjan Singh, Bharatiya Janata Party, BJP, Indian Grassland and Fodder Research Institute, IGFRI, Jhansi
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झांसी , 06 Apr 2025

Last updated on: Apr 07, 2025, 16:31 IST

केंद्रीय मत्स्य, पशुपालन और डेयरी मंत्री श्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह ने 5 अप्रैल 2025 को भारतीय घासभूमि और चारा अनुसंधान संस्थान (ICAR–IGFRI), झांसी का दौरा किया। इस अवसर पर उन्होंने देशभर में चारे की उपलब्धता बढ़ाने और सतत घासभूमि प्रबंधन के लिए हो रहे अनुसंधान कार्यों और क्षेत्रीय नवाचारों का अवलोकन किया। 

उनके साथ पशुपालन और डेयरी विभाग (DAHD) की सचिव श्रीमती अल्का उपाध्याय और पशुपालन आयुक्त डॉ. अभिजीत मित्रा भी उपस्थित रहे। माननीय मंत्री ने वैज्ञानिकों से संवाद किया और संस्थान द्वारा विकसित नवीनतम चारा तकनीकों और सर्वोत्तम प्रथाओं की प्रदर्शनी का निरीक्षण किया।

सभा को संबोधित करते हुए श्री राजीव रंजन सिंह ने वर्तमान में देश में अनुमानित 11% हरित चारे की कमी पर चिंता व्यक्त की और इस चुनौती का समाधान करने के लिए तकनीक आधारित उपायों की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने बताया कि वर्तमान में केवल 85 लाख हेक्टेयर भूमि पर चारा उगाया जा रहा है, जबकि भारत के पास लगभग 1.15 करोड़ हेक्टेयर घासभूमि और लगभग 10 करोड़ हेक्टेयर बंजर भूमि है, जिनका कुशलतापूर्वक उपयोग किया जा सकता है। 

उन्होंने कहा, "इन अल्प-प्रयुक्त संसाधनों का प्रभावी उपयोग चारे में आत्मनिर्भरता प्राप्त करने और पशुधन उत्पादकता को बढ़ाने के लिए आवश्यक है।" केंद्रीय मंत्री ने IGFRI के अनुसंधान और विकास कार्यों की सराहना की और देशभर के कृषि विज्ञान केंद्रों (KVKs) के माध्यम से इन तकनीकों के त्वरित प्रसार की आवश्यकता जताई। 

उन्होंने विशेष रूप से पर्यावरणीय प्रतिकूल परिस्थितियों में भी टिकाऊ रहने वाली बहुवर्षीय घासों की उपयोगिता पर बल दिया, जो बंजर भूमि को पुनर्जीवित करने, पारिस्थितिकी संतुलन बनाए रखने और वर्ष भर सतत हरित चारा उपलब्ध कराने में सहायक हो सकती हैं।

उन्होंने यह भी दोहराया कि भारत सरकार पशुधन क्षेत्र को सशक्त, लचीला और आत्मनिर्भर बनाने के लिए विज्ञान, नवाचार और सहकारी शासन को प्रमुख आधार मानती है। श्री सिंह ने IGFRI के वैज्ञानिकों के साथ चर्चा करते हुए संस्थान को चारा विकास और घासभूमि सुधार के लिए देश का प्रमुख ज्ञान और नवाचार केंद्र बनने के लिए प्रोत्साहित किया।

इस अवसर पर प्रदर्शित प्रमुख तकनीकों में सभी प्रकार के किसानों के लिए उपयुक्त पशुधारित एकीकृत कृषि प्रणाली (IFS), एकरूपी और स्थायी उत्पादन हेतु बहुवर्षीय घासों की एपोमिक्टिक प्रजनन तकनीक, चारा उत्पादन के लिए विशेष कृषि यंत्रों का विकास, चारा बीजों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने हेतु मानक और प्रमाणन प्रणाली तथा बीज छर्रों के माध्यम से ड्रोन आधारित घासभूमि पुनरुद्धार जैसी नवीन विधियाँ शामिल थीं।

सचिव श्रीमती अल्का उपाध्याय ने चारा तकनीकों को राज्यों में अपनाने के लिए राज्य-स्तरीय समन्वय की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने केरल में नारियल बागानों के खाली स्थानों में चारा उत्पादन की संभावनाओं को उजागर करते हुए इसे एक प्रभावशाली मॉडल बताया। 

उन्होंने जानकारी दी कि इस उद्देश्य से 8 अप्रैल 2025 को केरल में एक संयुक्त बैठक आयोजित की जाएगी, जिसमें राज्य सरकार, कृषि विज्ञान केंद्रों और IGFRI के वैज्ञानिक भाग लेंगे। 

 

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