सीजीसी लांडरां के स्टूडेंट वेलफेयर डिपार्टमेंट ने वर्ल्ड वॉटर डे 2025 के उपलक्ष्य पर सुखना लेक, चंडीगढ़ से चंडीगढ़ क्लब तक एक वॉकेथॉन का आयोजन किया। इस इवेंट का उद्देश्य जल संरक्षण (वॉटर कंज़र्वेशन) के महत्व के प्रति जागरूकता फैलाना था।
वॉकेथॉन में सीजीसी लांडरां के 600 से ज़्यादा स्टूडेंट्स और फैकल्टी मेंबर्स ने भाग लिया, जिससे एनवायरनमेंट के प्रति जागरूकता बढ़ाने की सीजीसी लांडरां की प्रतिबद्धता को बल मिला। वॉकेथॉन की शुरुआत सीजीसी लांडरां के प्रेजिडेंट रशपाल सिंह धालीवाल द्वारा की गई, उनके साथ डॉ. पी.एन. हृषीकेशा, कैंपस डायरेक्टर, सीजीसी लांडरां और डॉ. गगनदीप कौर भुल्लर, डीन, स्टूडेंट वेलफेयर, सीजीसी लांडरां भी उपस्थित थे।
इस वर्ष की थीम "ग्लेशियर संरक्षण" थी, जिसमें ये बताया गया कि ग्लेशियर एक महत्वपूर्ण स्तोत्र है जो हमे फ्रेश वाटर प्रदान करता है और साथ ही क्लाइमेट चेंज की वजह से इनके तेजी से पिघलने के संकट को उजागर किया। सीजीसी लांडरां के प्रेजिडेंट रशपाल सिंह धालीवाल ने वर्ल्ड वाटर डे के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि जल जीवन की नींव है और इसका संरक्षण केवल एक आवश्यकता नहीं, बल्कि हम सभी की साझा जिम्मेदारी है।
इस प्रकार की वॉकेथॉन जैसी गतिविधियाँ हमें हमारे जल उपयोग की आदतों पर सोचने के लिए प्रेरित करती हैं और इस अमूल्य संसाधन की रक्षा के लिए ज़रूरी उपाय अपनाने के लिए प्रोत्साहित करती हैं। सामूहिक प्रयास की आवश्यकता पर बल देते हुए, डॉ. पी.एन. हृषीकेशा, कैंपस डायरेक्टर, सीजीसी लांडरां ने कहा, “वर्ल्ड वाटर डे हमें याद दिलाता है कि जल संकट पूरी दुनिया में तेजी से बढ़ती हुई चिंता का विषय है।
एक शैक्षणिक संस्थान के रूप में हमारा कर्तव्य है कि हम अपने स्टूडेंट्स को जल संरक्षण के लिए आवश्यक ज्ञान और प्रेरणा प्रदान करें ताकि सभी के लिए एक बेहतर भविष्य सुनिश्चित किया जा सके।” स्टूडेंट्स को सक्रिय कदम उठाने के लिए प्रोत्साहित करते हुए, डॉ. गगनदीप कौर भुल्लर, डीन, स्टूडेंट वेलफेयर, सीजीसी लांडरां ने कहा, “पानी की हर बूंद की अहमियत होती है और यह देखकर खुशी होती है कि हमारे स्टूडेंट्स इतने सार्थक उद्देश्य के लिए एक साथ आए हैं।
वर्ल्ड वॉटर डे सिर्फ जागरूकता फैलाने का दिन नहीं है, बल्कि यह कार्रवाई के लिए प्रेरित करने का दिन है। छोटे-छोटे प्रयास मिलकर ही बड़ा बदलाव ला सकते हैं।” इस इवेंट का समापन पार्टिसिपेंट्स द्वारा अपने जीवन में जल संरक्षण की आदतें अपनाने की शपथ के साथ हुआ।