सरकार ने पारंपरिक ठोस अपशिष्ट डंपिंग से अधिक वैज्ञानिक और टिकाऊ अपशिष्ट निपटान दृष्टिकोण की ओर अपने बदलाव पर जोर दिया। सदस्य जी.ए. मीर की ओर से निजाम उद दीन भट्ट द्वारा उठाए गए एक प्रश्न का उत्तर देते हुए, स्वास्थ्य मंत्री सकीना इत्तू ने सदन को सूचित किया कि सरकार वैज्ञानिक अपशिष्ट प्रबंधन विधियों को लागू कर रही है, जिसमें विरासत अपशिष्ट का जैव खनन, वैज्ञानिक अपशिष्ट प्रबंधन केंद्रों का निर्माण, घर-घर जाकर अपशिष्ट संग्रह, अपशिष्ट प्रबंधन स्थलों के चारों ओर जैव बाड़ लगाना और डंपिंग स्थलों को बायोपार्क में परिवर्तित करना शामिल है।
मंत्री ने मुख्यमंत्री की ओर से उत्तर देते हुए, जो आवास एवं विकास विभाग के प्रभारी मंत्री भी हैं, आगे कहा कि अचबल कस्बे में 4 टीपीडी की क्षमता वाली एक ठोस अपशिष्ट प्रबंधन सुविधा चालू है, जहाँ कस्बे के कचरे को व्यवस्थित रूप से एकत्र कर उसका प्रसंस्करण किया जाता है।
सकीना इत्तू ने विधानसभा में अनुदान मांगें पेश कीं
स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा, समाज कल्याण एवं शिक्षा मंत्री सकीना इत्तू ने सदन के समक्ष अनुदान मांगें पेश कीं। मांगों में स्कूल शिक्षा विभाग के लिए 1201489.52 लाख रुपये से अधिक नहीं, स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के लिए 881370.63 लाख रुपये से अधिक नहीं, समाज कल्याण विभाग के लिए 450428.15 लाख रुपये से अधिक नहीं तथा उच्च शिक्षा विभाग के लिए 219340.00 लाख रुपये से अधिक नहीं की राशि शामिल है।
विधायक डॉ. शफी अहमद वानी, प्यारे लाल शर्मा, देवेन्द्र कुमार मन्याल, इरशाद रसूल कर, मीर मोहम्मद फैयाज, मुश्ताक अहमद गुरु, मोहम्मद यूसुफ तारिगामी, सुरिंदर कुमार, पीरजादा फिरोज अहमद, चैधरी मोहम्मद अकरम, दिलीप सिंह परिहार, खुर्शीद अहमद, इफ्तिखार अहमद, भारत भूषण, शमीमा फिरदौस, ऐजाज जान, डॉ. नरिंदर सिंह और मेहराज मलिक ने अनुदान की मांग पर चर्चा के दौरान बात की और इन विभागों और उनके संबंधित निर्वाचन क्षेत्रों के संबंध में मुद्दे उठाए। चर्चा कल भी जारी रहेगी।