कैथल के रामनाथ अपनी सारंगी की मधुर धुन पर पुरुषों के साथ साथ महिलाओं और युवाओं को नाचने पर मजबूर कर देते हैं। रामनाथ हरियाणवी संस्कृति से जुड़े लोकगीतों को गाते हुए और सारंगी को बजाते हुए मस्त हो जाते हैं। हरियाणवी लोकगीत काला काला करे गुजरी मत काले का जिक्र करें काले रंग पे मोरनी रुदन करें, हीर रांझा, मीरा इत्यादि ऐतिहासिक कहानियों से जुड़े लोकगीतों की प्रस्तुति देकर रामनाथ लोगों को अपनी आकर्षित करते हैं।
रामनाथ जिला कैथल के ठिठाना गांव के रहने वाले हैं और उन्होंने बताया कि वह जब 20 साल के थे तब से इस सूरजकुंड मेले में सारंगी बजाने का काम करते हैं और अपनी लोक कला को जीवित रखने का काम कर रहे हैं। सारंगीवादक रामनाथ को यह कला पारंपरिक तौर पर अपने पिता से मिली है।
उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार हरियाणा संस्कृति को बचाने के लिए आगे आई है और उन्होंने इसके लिए मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह का भी धन्यवाद किया और कहा कि हम सबको अपनी संस्कृति को बचाने के लिए आगे आना चाहिए खासकर युवा पीढ़ी जो आजकल नशे की तरफ जा रही है। युवा अपनी संस्कृति से जुड़कर नशे जैसी बुरी आदतों से छुटकारा पा सकते हैं।