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राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल ने पर्वतीय पारिस्थितिकी तंत्र के अनुसंधान पर दिया बल

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शिमला , 05 Mar 2024

राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल ने राज्य की पर्वतीय पारिस्थितिकी तंत्र प्रक्रिया एवं सतत आजीविका के विषय पर गहन विचार करने पर बल देते हुए कहा कि भौगोलिक दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्रों को ध्यान मंे रखते हुए पर्वतीय पारिस्थितिकी पर अनुसंधान कर विकास कार्यों को आगे बढ़ाया जाना चाहिए। राज्यपाल ने आज कुल्लू स्थित गोविंद बल्लभ पंत राष्ट्रीय हिमालयी पर्यावरण संस्थान द्वारा ‘माउंटेन ईको सिस्टम प्रोसेसिज एंड लाइवलीहुड’ विषय पर आयोजित तीन दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन में बतौर मुख्य अतिथि भाग लिया। 

इससे पहले उन्होंने संस्थान के गेस्ट हाउस और ऑडिटोरियम का भी उद्घाटन किया। हिमालय क्षेत्र में पर्यावरण अध्ययन के रूप में संस्थान के महत्व पर बल देते हुए उन्होंने कहा कि यह संस्थान वैज्ञानिक अनुसंधान को आगे बढ़ाने, एकीकृत प्रबंधन रणनीतियों को विकसित करने और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के लिए अग्रणी संस्थान के रूप में उल्लेखनीय प्रयास कर रहा है। 

पिछले वर्ष राज्य में आई प्राकृतिक आपदा पर शोध की आवश्यकता पर बल देते हुए उन्होंने कहा कि पर्वतीय क्षेत्रों में विकासात्मक गतिविधियों के लिए अनुसंधान आधारित रणनीति बनाने की आवश्यकता है। उन्होंने नदी किनारे निर्माण कार्यों पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि पर्वतीय पारिस्थितिकी तंत्र प्रक्रियाओं और सतत आजीविका के विषयों पर गंभीरतापूर्वक विचार किया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि जल और वनों का संरक्षण करना आवश्यक है क्योंकि इससे पर्यावरण संरक्षण होगा। हमें भौगोलिक परिस्थितियों के अनुरूप पौधे लगाने की आवश्यकता है। उन्होंने आयोजकों से कहा कि इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में प्रस्तुत शोध वक्तव्यों पर एक रिपोर्ट तैयार कर राज्य और केंद्र सरकार को भेजना सुनिश्चित करें ताकि सम्मेलन के दौरान प्राप्त हुए निष्कर्षों पर विचार किया जाए।

इस अवसर पर राज्यपाल ने संस्थान के दो प्रकाशनों का विमोचन भी किया। इससे पूर्व, मुख्य संसदीय सचिव सुन्दर सिंह ठाकुर ने राज्यपाल का स्वागत किया। उन्होंने राज्य की नदियों, विशेषकर ब्यास और पार्वती नदियों पर शोध का सुझाव दिया, ताकि इन नदियों में बाढ़ से होने वाले नुकसान को रोकने के लिए उचित कदम उठाए जा सकें। गोविंद बल्लभ पंत राष्ट्रीय हिमालयी पर्यावरण संस्थान, अल्मोड़ा के निदेशक प्रो. सुनील नोटियाल ने संस्थान के इतिहास और अन्य गतिविधियों के बारे में विस्तार से बताया।

राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान श्रीनगर एवं उत्तराखंड के निदेशक प्रो. ललित अवस्थी, राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान मंडी की विशेषज्ञ प्रो. आरती कश्यप, गोविंद वल्लभ पंत राष्ट्रीय हिमालयी पर्यावरण संस्थान कुल्लू के क्षेत्रीय प्रमुख राकेश कुमार, राज्यपाल के सचिव राजेश शर्मा, उपायुक्त तोरुल एस. रवीश, पुलिस अधीक्षक डॉ. गोकुल चंद्र कार्तिके, वैज्ञानिक, अनुसंधानकर्ता और अन्य गणमान्य व्यक्ति इस अवसर पर उपस्थित थे।

Governor Shiv Pratap Shukla emphasizes on research on mountain ecosystem 

Shimla

Governor Shiv Pratap Shukla stressed on preservation of mountain ecosystem process and sustainable livelihood issues of the State. He said that development work should be carried forward by undertaking research on the delicate ecology of the area.

He was speaking as a Chief Guest in a three-day International Conference organized by Kullu-based Govind Ballabh Pant National Institute of Himalayan Environment on 'Mountain Ecosystem Processes and Livelihoods'. Earlier, he also inaugurated the guest house and auditorium of the institute.

Emphasizing the importance of the institute for environmental studies in the Himalayan region, he said this institute was making concerted efforts as the lead agency to advance scientific research, develop integrated management strategies and conserve natural resources. He stressed the need for research on the unexpected natural disaster in the State last year and stressed the need to build up strategies based on scientific research for the developmental activities in the hilly areas. 

He expressed concern over construction along the river banks and said that mountain ecosystem processes and sustainable livelihood issues should be seriously considered.He said that water and forests would have to be saved, only then the environment to be saved and for this, there was a need to saplings the plants according to the geographical conditions. 

He asked the organizers to prepare a report on the research statements presented in this three-day International Conference and send it to the State and Central Governments so that the conclusions drawn from here could be considered. On the occasion, the Governor released two publications of the Institute.

Shri Sunder Singh Thakur, Chief Parliamentary Secretary welcomed the Governor on the occasion. He suggested research on the rivers of the State, especially the Beas and Parvati rivers, so that appropriate steps could be taken to prevent damage caused by floods from these rivers. Prof. Sunil Notiyal, Director, Govind Ballabh Pant National Institute of Himalayan Environment, Almora welcomed the Governor and detailed about the history and other activities of the Institute.

Prof. Lalit Awasthi, Director of National Institute of Technology, Srinagar, Uttarakhand, Prof. Aarti Kashyap, Expert from National Institute of Technology, Mandi, Mr. Rakesh Kumar, Regional Head of Govind Ballabh Pant National Institute of Himalayan Environment, Kullu, Rajesh Sharma, Secretary to the Governor, Torul S. Ravish, Deputy Commissioner, Dr. Gokul Chandra Karthike, Superintendent of Police, Scientists, Research Scholars and other prominent people were also present on the occasion.

 

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