मुख्य सचिव डॉ. अरुण कुमार मेहता ने छठी यूटी स्तरीय एनसीओआरडी बैठक की अध्यक्षता करते हुए कहा कि नशीले पदार्थों से निपटने में उत्कृष्ट प्रदर्शन दर्ज करने वाले जिलों, नगर पालिकाओं और पंचायतों को यूटी प्रशासन द्वारा उचित रूप से पुरस्कृत किया जाएगा।
बैठक में एसीएस गृह, विशेष महानिदेशक सीआईडी, विशेष महानिदेशक अपराध, प्रमुख सचिव वन, प्रमुख सचिव शिक्षा, एडीजीपी कश्मीर, जम्मू, आयुक्त सचिव आरडीडी, संभागीय आयुक्त कश्मीर, जम्मू, डीजी अभियोजन, उपायुक्त, जिला एसपी के अलावा संबंधित विभागों के अन्य अधिकारी भी उपस्थित थे।
बैठक के दौरान डॉ. मेहता ने अधिकारियों से इस बुराई को पूरी तरह से खत्म करने के लिए सभी उपाय करने को कहा। उन्होंने उनसे अधिकांश गिरफ्तारियों को दोषसिद्धि में बदलने के लिए एक पुख्ता प्रणाली स्थापित करने को कहा। उन्होंने उनसे कहा कि वे धीरे-धीरे नशे से मुक्त क्षेत्रों को बढ़ाएं और उचित मूल्यांकन के बाद उन्हें ‘नशा मुक्त‘ घोषित करें।
उन्होंने पीआरआई सदस्यों, पुलिस, स्वास्थ्य, शिक्षा, आरडीडी, राजस्व और समाज कल्याण विभागों जैसी विभिन्न एजेंसियों के परामर्श से पंचायतों को ‘नशा मुक्त‘ घोषित करने के लिए सुविचारित दिशानिर्देश तैयार करने का निर्देश दिया। उन्होंने कार्यात्मक सीसीटीवी वाली फार्मेसी दुकानों और अनुसूचित दवाओं की बिक्री दिखाने वाले रजिस्टरों के रखरखाव पर भी ध्यान दिया।
उन्होंने यूटी भर में प्रत्येक दवा की दुकान पर इन्हें स्थापित करने की प्रक्रिया को पूरा करने के लिए समय सीमा तय करने के लिए कहा। यह सुनिश्चित करने के लिए कि मादक पदार्थों की तस्करी के अवैध व्यापार पर प्रभावी ढंग से अंकुश लगाया जाए, मुख्य सचिव ने पुलिस और जिला प्रशासन को संबंधित नियमों के तहत ड्रग डीलरों की संपत्तियों को जब्त करने के लिए कहा।
उन्होंने कहा कि हमारे युवाओं को उनके नापाक मंसूबों का शिकार बनने से बचाने के लिए गलत काम करने वालों से सख्ती से निपटने की जरूरत है। इसके अलावा उन्होंने कहा कि ‘नशा मुक्त जम्मू-कश्मीर‘ केवल एक नारा नहीं है बल्कि सामूहिक रूप से हासिल किया जाने वाला एक लक्ष्य है। उन्होंने नशीली दवाओं के तस्करों या इस व्यापार में लगे लोगों के खिलाफ सामाजिक बहिष्कार करने का आह्वान किया। उन्होंने शैक्षणिक संस्थानों से सतर्क रहने और वहां किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जांच हेतु स्थानीय पुलिस को रिपोर्ट करने का आह्वान किया ताकि हमारे स्कूल/कॉलेज ऐसी अनैतिकता का शिकार न बनें।
बैठक में बोलते हुए एसीएस गृह आर.के. गोयल ने पुलिस प्रशासन को पीआईटीएनडीपीएस अधिनियम से निपटने वाले अपने अधिकारियों के लिए क्षमता निर्माण कार्यशालाएं आयोजित करने की सलाह दी ताकि वे ऐसे मामलों को और अधिक पेशेवर तरीके से संभालने की बारीकियों के बारे में जागरूक हो सकें।
उन्होंने कहा कि प्रत्येक पंचायत को तभी ‘नशा मुक्त‘ घोषित किया जाना चाहिए, जब संबंधित संस्थाओं द्वारा यह प्रमाणित किया जाए कि गांव में कोई भी नषीली दवा विक्रेता, कृषक और उपभोक्ता नहीं है।इस खतरे को जड़ से खत्म करने में विभाग द्वारा दर्ज किए गए प्रदर्शन का विवरण देते हुए, विशेष डीजीपी अपराध ए.के. चैधरी ने बताया कि 2022 में कुल 1850 मामले दर्ज किए गए, जिसमें 2756 शामिल व्यक्तियों को गिरफ्तार किया गया और इस साल जून तक 1410 मामले दर्ज किए गए, जिससे एफआईआर में 2068 लोगों की गिरफ्तारियां शामिल हैं।
आगे बताया गया कि इस साल जून, 2023 तक एनडीपीएस अधिनियम के तहत 251.42 किलोग्राम चरस, 124.47 किलोग्राम हेरोइन/ब्राउन शुगर, 92.24 किलोग्राम गांजा, 3374.69 किलोग्राम फुकी, प्रतिबंधित पदार्थों के 105588 कैप/टैब/इंजेक्शन/बोतलें जब्त की गईं।
इसके अलावा यह भी पता चला कि प्रशासन की ओर से किसी भी खामियों को दूर करने के लिए एनडीपीएस मामलों में आईओ/अभियोजन पक्ष के खिलाफ कार्रवाई की गई है, जिन्हें जांच के दौरान किसी भी कमियों/विसंगतियों के लिए ट्रायल कोर्ट द्वारा खारिज कर दिया गया है। यूटी से अब तक कुल 95 मामलों की पहचान की गई है, जिनमें से 74 को एडीजीपी जम्मू और 21 को दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए एडीजीपी कश्मीर को भेजा गया है।