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उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने स्कास्ट-जम्मू में उत्तर-पश्चिमी हिमालय के भौगोलिक संकेत पर दो दिवसीय कार्यशाला का उद्घाटन किया

भौगोलिक संकेत ग्रामीण अर्थव्यवस्था हेतु एक गेम चेंजर हो सकता है और जम्मू-कश्मीर कृषि एवं हस्तशिल्प क्षेत्रों के लिए जीआई के उपयोग में अग्रणी होगा : मनोज सिन्हा

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जम्मू , 04 Jan 2023

Last updated on: Jan 04, 2023, 00:00 IST

उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने आज स्कास्ट-जम्मू में उत्तर-पश्चिमी हिमालय के भौगोलिक संकेत (जीआई) पर दो दिवसीय कार्यशाला का उद्घाटन किया। कार्यशाला का उद्देश्य ट्रेडमार्क की सबसे पुरानी श्रेणी जीआई पर सभी हितधारकों को संवेदनशील बनाना, संभावित उत्पादों की पहचान करना और ग्रामीण समुदायों को सशक्त बनाने के लिए भविष्य की रणनीति तैयार करना है।

उपराज्यपाल ने किसानों और कारीगरों के दृष्टिकोण से बाधाओं और अवसरों को चाक-चैबंद करने के लिए भौगोलिक संकेत, बौद्धिक संपदा अधिकार, विशेषज्ञों, अधिकारियों को एक साझा मंच पर लाने के लिए स्काॅस्ट जम्मू और कृषि उत्पादन और किसान कल्याण विभाग के प्रयासों की सराहना की।

उन्होंने कहा “भौगोलिक संकेत ग्रामीण अर्थव्यवस्था हेतु एक गेम चेंजर हो सकता है और जम्मू-कश्मीर कृषि और हस्तशिल्प क्षेत्रों के लिए जीआई के उपयोग में अग्रणी होगा। जीआई में स्थान और लोगों के बीच ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंध को मजबूत करते हुए ग्रामीण क्षेत्रों को व्यापक लाभ देने की भी क्षमता है‘‘।

स्थायी आजीविका सुनिश्चित करने और उत्पादकों के लिए अधिक आय उत्पन्न करने के अलावा, जीआई स्वदेशी ज्ञान के संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। 21वीं सदी की अर्थव्यवस्था में भौगोलिक संकेतों के महत्व पर प्रकाश डालते हुए, उपराज्यपाल ने कहा, यूटी सरकार आला और प्रीमियम स्थानीय उत्पादों के जीआई टैगिंग के लिए समर्पित प्रयास कर रही है और उन्हें अपनी विशिष्ट पहचान बनाने में मदद कर रही है।

कश्मीर के केसर, हाथ से बुने कालीन, कागज की लुगदी और कई अन्य उत्पादों की जीआई टैगिंग से स्थानीय उत्पादकों को बड़ी सफलता मिली है। उन्होंने कहा कि कई अन्य उत्पादों की जीआई टैगिंग पाइपलाइन में है जो संबंधित क्षेत्रों में सामाजिक-आर्थिक समृद्धि लाएगी। 

चूंकि जीआई उत्पादों की उत्पत्ति और गुणवत्ता को दर्शाता है, इसलिए हमारा उद्देश्य प्रभावी ब्रांड और मार्केटिंग रणनीति के माध्यम से वैश्विक बाजार में स्थानीय ब्रांड स्थापित करना है। उत्पादकों के सामने आने वाली चुनौतियों का समाधान करने के लिए अन्य तंत्र भी विकसित किए जा रहे हैं।

सतत विकास की गति को तेज करने का ‘जन पहले‘ हमारा मंत्र है। ग्रामीण-शहरी अंतर को कम करने, ग्रामीण अर्थव्यवस्था में सुधार और छोटे और सीमांत किसानों के हितों की रक्षा के लिए भौतिक, आर्थिक और ज्ञान संपर्क बनाने पर विशेष बल दिया जा रहा है। पिछले दो वर्षों में फिजिकल, नॉलेज और इकोनॉमिक कनेक्टिविटी को मजबूत करने हेतु अभूतपूर्व काम हुआ है। 

उन्होंने कहा कि किसानों, उत्पादकों और सभी संबद्ध हितधारकों के जीवन में सामाजिक-आर्थिक समृद्धि लाने के लिए कई पहल की गई हैं। जम्मू-कश्मीर प्रशासन पारंपरिक ज्ञान, आधुनिक विज्ञान और प्रौद्योगिकी के संचार के माध्यम से उत्पादकता बढ़ाने के लिए ठोस प्रयास कर रहा है। 

उपराज्यपाल ने उत्पादों को बढ़ावा देने पर जीआई के प्रभाव का दस्तावेजीकरण करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कृषि और संबद्ध क्षेत्र के समग्र विकास पर नीति को अक्षरशः लागू करने की सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराया। कृषि उत्पादन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव श्री अटल डुल्लू ने कहा कि दो दिवसीय कार्यशाला उत्तर-पश्चिमी हिमालय के अनूठे आला उत्पादों पर चर्चा, प्रचार और पूंजीकरण का अवसर प्रदान करती है।

आईपीआर/जीआई पर काम कर रहे राष्ट्रीय आईपी अवार्डी पद्मश्री डॉ. रजनीकांत ने अपने संबोधन में बताया कि मार्च 2023 तक जम्मू-कश्मीर के नौ उत्पादों की जीआई टैगिंग की संभावना है। पूर्व प्रमुख आनुवंशिकी विभाग पद्मश्री डॉ. वी.पी. सिंह ने इस अवसर पर बोलते हुए बासमती की विभिन्न किस्मों के विकास पर प्रकाश डाला।

इस अवसर पर प्रोफेसर जे.पी. शर्मा, वीसी स्कास्ट जम्मू और प्रो. नजीर गनई वीसी स्कास्ट कश्मीर ने भी बात की और स्थानीय आला कृषि उत्पादों और जीआई टैगिंग के लिए पहचाने गए उत्पादों को बढ़ावा देने के प्रयासों को साझा किया। उपराज्यपाल ने संभावित स्वदेशी उत्पादों पर एक प्रदर्शनी का भी उद्घाटन किया, जिसे जीआई के लिए पंजीकृत किया जा सकता है और उद्यमियों और सरकारी विभागों द्वारा स्थापित जम्मू कश्मीर के लगभग 40 अद्वितीय और आला उत्पादों को प्रदर्शित करने वाले स्टालों का निरीक्षण किया।

इस अवसर पर आईपीआर पंजीकरण और संरक्षण पर एक प्रकाशन भी जारी किया गया। आयुक्त/सचिव, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग सुश्री मनदीप कौर, यूटी प्रशासन के अधिकारी, संसाधन व्यक्ति, विशेषज्ञ के अलावा अन्य गणमान्य व्यक्ति, किसान, विभिन्न हितधारक और छात्र उपस्थित थे।

 

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