Monkeypox virus In US:ब्रिटेन के बाद अब अमेरिका में मंकीपॉक्स वायरस के नए मामले सामने आए, ब्रिटेन में अभी तक 9 मामलों की पुष्टि हो चुकी है.

Monkeypox Virus In US: एक तरफ जहाँ करोना से अभी पूरी दुनियां उभर भी नहीं पाई थी की ऐसे में एक और वायरस ने दस्तक दे दी है हाल ही में ब्रिटेन में मंकीपॉक्स वायरस के नए मामले सामने आए जिसके बाद ये वायरस अमेरिका पहुंच गया जी हाँ अमेरिका के मैसाचुसेट्स डिपार्टमेंट ऑफ पब्लिक हेल्थ ने बुधवार को एक शख्स जो कनाडा से अमेरिका पहुंचा था उसमें मंकीपॉक्स वायरस के संक्रमण की पुष्टि की है।आज हम आपको इस बीमारी से जुड़ी एक-एक जानकारी से अवगत करवाएंगे की ये कैसे फैलती है और कितनी जानलेवा बीमारी है ताकि आप ये समझ ले की आख़िरकारआपको कैसे इस बीमारी से खुद का बचाव करना है-
क्या है मंकीपॉक्स

पूरी दुनिया में कोरोना वायरस के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं और इस वजह से हर किसी के सिर पर कोरोना की चौथी लहर का खतरा मंडरा रहा है. इन सबके बीच एक ऐसे वायरस की पुष्टि हुई है जिसे कोरोना से भी ज्यादा घातक माना जा रहा है. दरअसल, ब्रिटेन की हेल्थ प्रोटेक्शन एजेंसी के मुताबिक चूहों और बंदरों से इंसानों में फैलने वाली बीमारी 'मंकीपॉक्स' वायरस की पुष्टि हुई है. जानकारी के मुताबिक, ब्रिटेन में मिले मंकीपॉक्स वायरस से संक्रमित एक शख्स के नाइजीरिया से आने की पुष्टि हुई है. जिसके बाद अब अमेरिका में भी इसके नए मामले देखने को मिले एजेंसी के मुताबिक, मंकीपॉक्स वायरस का संक्रमण एक दुर्लभ संक्रमण है। आमतौर पर यह फ्लू जैसी बीमारी और लिम्फ नोड्स की सूजन से शुरू होती है|
ये चेहरे और शरीर पर एक दाने के रूप में दिखाई देती है. इसके ज्यादातर संक्रमण 2 से 4 सप्ताह तक चलते हैं। यह वायरस लोगों के बीच आसानी से नहीं फैलता है, लेकिन रोगी के शरीर के तरल पदार्थ और मंकीपॉक्स के घावों के संपर्क में आने से ये फैल सकता है।ब्रिटेन की हेल्थ प्रोटेक्शन एजेंसी के क्लिनिकल एंड इमर्जिंग इंफेक्शन्स के निदेशक डॉ कॉलिन ब्राउन ने मीडिया को दिए एक बयान में कहा कि "हम इस मामले पर एनएचएस इंग्लैंड और एनएचएस रिफॉर्म के साथ काम कर रहे हैं ताकि लोगों को एक संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने में मदद मिल सके और उन्हें आवश्यक स्वास्थ्य सलाह दी जा सके।" आपको बता दें कि 2018 में यूके में मंकीपॉक्स वायरस के पहले मामले की पुष्टि हुई थी।
मंकीपॉक्स का इतिहास

मनुष्यों में मंकीपॉक्स रोग का पहला मामला वर्ष 1970 में सामने आया था। 1970 से अफ्रीका के देशों में इस वायरस की पुष्टि हुई है। जानकारी के मुताबिक यह बीमारी सबसे पहले रिसर्च के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले बंदरों में फैली थी, जिसके बाद अफ्रीका में बंदरों से इंसानों में यह बीमारी पाई गई। इस रोग में चेचक के लक्षण दिखाई देते हैं। इसके अलावा जैसा की ऊपर बताया इस संक्रामक रोग में रोगी में फ्लू जैसे लक्षण भी दिखाई देते हैं। जिन लोगों में यह बीमारी गंभीर होती है उनमें भी निमोनिया के लक्षण देखने को मिलते हैं।
विशेषज्ञ की राय
यदि अमेरिकी विशेषज्ञों की राय का पालन करें तो यूएस सीडीसी ने कहा है, ये तो एक दुर्लभ बीमारी है जो मंकीपॉक्स वायरस के संक्रमण के कारण होती है। यह ऑर्थोपॉक्सवायरस जीनस से संबंधित है जिसमें वेरियोला वायरस शामिल है जो चेचक का कारण बनता है,इसके लिए वैक्सीनिया वायरस जो चेचक के टीके में प्रयोग किया जाता है, और काउपॉक्स वायरस। यह अभी तक स्पष्ट नहीं है कि इस वायरस का मेजबान कौन है, लेकिन अफ्रीकी कृन्तकों और बंदरों को इसके संचरण और संक्रमण का कारण माना जाता है।
कितने दिन तक रहता है ये मंकीपॉक्स वायरस
मंकीपॉक्स वायरस का संक्रमण एक दुर्लभ संक्रमण है और यह रोग 2-4 सप्ताह तक रहता है। रोगी के शरीर पर चकत्ते विकसित हो जाते हैं, चेहरे से शुरू होकर शरीर के अन्य भागों में फैल जाते हैं। घाव मैक्यूल्स, पैपुल्स, वेसिकल्स, पस्ट्यूल और स्कैब के माध्यम से आगे बढ़ते हैं। रोग 2-4 सप्ताह तक रहता है।
मनुष्य में कैसे फैलता है ये मंकीपॉक्स वायरस
मंकीपॉक्स वायरस किसी संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने के बाद यह रोग आंख, नाक या मुंह के जरिए मानव शरीर में फैल सकता है। मंकीपॉक्स से संक्रमित जानवरों के संपर्क में आने से इस बीमारी का खतरा बढ़ जाता है। यह वायरस चिकन पॉक्स के परिवार से संबंधित है और इससे संक्रमित होने पर रोगी में दिखने वाले लक्षण लाल रंग के दाने और रैशेज हल्के या गंभीर हो सकते हैं। इससे ज्यादा इस विषय पर कुछ कहा नहीं जा सकता क्योंकी मंकीपॉक्स पर अभी भी दुनिया भर में शोध जारी है।
फिर भी मंकीपॉक्स से संक्रमित होने पर रोगी में दिखाई देने वाले लक्षण इस प्रकार हो सकते हैं।

शरीर पर गहरे लाल धब्बे
त्वचा में लाल चकत्ते
बुखार और सिरदर्द
शरीर में सूजन
ठंड लगना और थकावट
अत्यधिक थकान
फ्लू जैसे लक्षण
निमोनिया रोग के लक्षण
मंकीपॉक्स पर क्या कहता है WHO:
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, मंकीपॉक्स वायरस के कारण एक ऐसी बीमारी होती है, जिसके लक्षण (Symptoms) स्मॉल पॉक्स (Smallpox) जैसे होते हैं। इसकी चपेट में आने वाले हर 10वें व्यक्ति की मौत हो सकती है,यदि उसमें पाए जाने वाले लक्षण अधिक तेज़ी से बढ़ रहे हैं तो जिसमें अधिकांश मौतें कम आयु वर्ग में होती हैं।
मंकीपॉक्स वायरस का उपचार और रोकथाम:

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, मंकीपॉक्स रोग का वर्तमान में कोई सटीक इलाज नहीं है। इस बीमारी से संक्रमित होने पर रोगी को लक्षणों को कम करने के लिए इलाज किया जाता है। ब्रिटेन की हेल्थ प्रोटेक्शन एजेंसी के क्लीनिकल एंड इमर्जिंग इंफेक्शन के डायरेक्टर डॉ कॉलिन ब्राउन के मुताबिक यह बीमारी इंसानों में आसानी से नहीं फैलती, इसलिए इसके मामले कम ही देखने को मिलते हैं। संक्रमित व्यक्ति को आइसोलेशन में रखने से अन्य लोगों में इसके फैलने का खतरा कम हो जाता है। इसके अलावा मंकीपॉक्स के संक्रमण को रोकने के लिए पहले इसकी पुष्टि कर लेनी चाहिए।
मंकीपॉक्स में ट्रीटमेंट में सबसे पहले संक्रमितों के नमूने पोलीमरेज़ चेन रिएक्शन (Polymerase chain reaction) टेस्ट के लिए भेजे जाते हैं। इस बीच मरीज की सभी वर्तमान संक्रमण से लेकर पुरानी बीमारियों के बारे में भी एक विश्लेषण किया जाता है। संयुक्त राज्य अमेरिका में मंकीपॉक्स के प्रकोप को रोकने के लिए चेचक के टीके, एंटीवायरल और वैक्सीनिया इम्यून ग्लोब्युलिन (VIG) का इस्तेमाल किया जा सकता है। इस वायरस के शरीर में प्रवेश करने के बाद शुरुआत में ही स्मॉलपॉक्स का टीका लगाया जाता है। जो कि इस बीमारी को रोकने में काफी हद तक मदद करता है।
मंकीपॉक्स वायरस से बचाव

रोकथाम की दिशा में पहला कदम संक्रमण के बारे में लोगों के बीच जागरूकता फैलाएं।
बीमार जानवरों के संपर्क से बचें।
ये बीमारी जानवरों से फैलती है इसलिए नॉनवेज को कच्चा, अधपका न खाएं । या फिर आप शुद्ध शाकाहारी आहर ही लें।
संक्रमित लोगों से दूरियां बनाकर रखें और साफ-सफाई का पूरा ख्याल रखें।
जो हेल्थकेयर वर्कर्स संक्रमित व्यक्ति की जांच करते हैं और उनकी देखरेख कर रहे हैं, उनसे भी डायरेक्ट संपर्क से बचे। मंकीपॉक्स से पीड़ित मरीजों की जांच करने से पहले चिकित्सकों को स्मॉलपॉक्स का टीका अवश्य लें।
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ध्यान दें ऊपर बताये गए सभी चीजों का पालन करें तभी आप इस तरह की बीमारी से दुरी बनाकर खुद को स्वस्थ रख सकते है।
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