किसानों की सरकार को दोटूक : संशोधन मंजूर नहीं, कानून वापसी पर ही खत्म होगा आंदोलन
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5 Dariya News
नई दिल्ली , 03 Dec 2020
Last updated on: Dec 03, 2020, 00:00 IST
किसान नेताओं ने विज्ञान भवन में गुरुवार को चली सात घंटे की बैठक में केंद्र सरकार के तीनों मंत्रियों से दोटूक कह दिया कि कृषि कानूनों की वापसी तक आंदोलन जारी रहेगा। सरकार के कई मांगों पर नरम रुख के बावजूद किसान नेताओं ने स्पष्ट कहा है कि उन्हें संशोधन मंजूर नहीं है, बल्कि वे कानूनों का खात्मा चाहते हैं। किसान नेताओं ने तीन कृषि कानूनों के अलावा हाल में प्रदूषण पर मोटा जुर्माना और सजा वाले एक्ट को भी हटाने की मांग की है।पंजाब के क्रांतिकारी किसान यूनियन के नेता डॉ. दर्शनपाल ने आईएएनएस को विज्ञान भवन में चौथे दौर की हुई बैठक का पूरा हाल बताया। उन्होंने कहा कि सभी किसान नेता पूरी तैयारी के साथ मीटिंग में पहुंचे थे। पहले मंत्रियों ने आधे घंटे में किसान कानूनों के पक्ष में बात रखी। इसके बाद हमने उन्हें एक-एक प्वाइंट के आधार पर बताया कि कैसे तीनों कानून किसान विरोधी हैं।दर्शनपाल ने बताया कि किसान प्रतिनिधियों के दबाव बनाने पर मंत्रियों ने कहा कि किसानों के पक्ष में सरकार नए कानूनों में कुछ चेंज कर सकती है। प्रदूषण रोकने के लिए बने कानून से खेती को हटाने की भी बात मंत्रियों ने कही। एमएसपी की गारंटी का भी सरकार ने आश्वासन दिया। सरकार ने चार दिसंबर को फिर से बैठक की बात कही, लेकिन किसान संगठनों ने इसे पांच दिसंबर को करने के लिए कहा। ताकि चार दिसंबर को किसान संगठन मीटिंग कर अपनी रणनीति तय कर सकें।दर्शनपाल ने बताया कि कुल मिलाकर सरकार ने तीन कृषि कानून और एक प्रदूषण वाले कानून को वापस लेने की जगह सिर्फ संशोधन की बात कही है, लेकिन हमें संशोधन मंजूर नहीं है। अब पांच दिसंबर की बैठक पर नजर है।किसान नेता हर्षविंदर सिंह ने आईएनएस से कहा, "मंत्रियों ने हमसे पूछा कि आप कमियां बताइए। तो हमने कहा-आपके कानून में कमियां ही कमियां हैं। सारा बिल कमियों से भरा हुआ है। सरकार ने कहा कि कल हम अपनी मीटिंग कर किसानों की मांगों पर सोचेंगे तो हमने भी कहा कि कल किसान संगठन भी मीटिंग कर सरकार के रवैये पर सोचेंगे। दोनों पक्ष अपनी-अपनी मीटिंग में विषयों पर सोचने के बाद पांच दिसंबर को फिर वार्ता की मेज पर होंगे।"पंजाब के किसान नेता कुलदीप सिंह ने बताया कि चौथे दौर की बैठक बेनतीजा इसलिए रही कि सरकार की मंशा साफ नहीं है। सरकार ने अभी तक अड़ियल रुख दिखाया है। किसानों के हौसले बुलंद हैं। किसान खाली हाथ नहीं जाने वाले हैं। जब तक किसान विरोधी कानून समाप्त नहीं होंगे, आंदोलन चलता रहेगा।