Thursday, 04 June 2026

 

 

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देश विरोधी कृषि कानूनों के खि़लाफ़ आंदोलन और कानूनी लड़ाई के साथ चलेंगे कैप्टन अमरिन्दर सिंह

हरीश रावत द्वारा 2 करोड़ किसानों के दस्तख़त लेने के लिए 2 अक्तूबर से दस्तख़त मुहिम शुरू करने का एलान

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खटकड़ कलां (शहीद भगत सिंह नगर) , 28 Sep 2020

Last updated on: Sep 28, 2020, 00:00 IST

पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने आज केंद्र सरकार के किसान विरोधी और देश विरोधी नए कृषि एक्टों के विरुद्ध कानूनन और कानूनी स्तर पर लड़ाई लडऩे का प्रण लेते हुए कहा कि भारत सरकार के नापाक इरादों से किसानों की रक्षा करने के लिए जो कुछ भी करना पड़ा, वह करेंगे।आज चंडीगढ़ में और इससे पहले खटकड़ कलाँ में जहाँ वह इन कानूनों के खि़लाफ़ धरने पर बैठने के दौरान पत्रकारों के साथ बातचीत करने के मौके पर कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने कहा कि इन ग़ैर-कानूनी एक्टों को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने के लिए कानूनी रास्ता इख्तियार करने के लिए वकीलों के साथ सलाह करेंगे। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार को अपने फ़ैसले पर पुन: विचार करने के लिए मजबूर करने और इन नए कानूनों के विरुद्ध लड़ाई लडऩे के लिए आंदोलन और कानूनी लड़ाई साथ-साथ चलाई जाएगी।मुख्यमंत्री ने कहा कि वह यह कभी भी नहीं चाहते कि पंजाब का नौजवान और किसान अपने जीने के अधिकार की लड़ाई लडऩे के लिए हथियार उठाएं। उन्होंने सावधान करते हुए कहा कि इन नए कानूनों से सरहदी राज्य पंजाब की सुरक्षा ख़तरे में पड़ेगी, क्योंकि पाकिस्तान की ख़ुफिय़ा एजेंसी आई.एस.आई. हमेशा ही गड़बड़ फैलाने के मौकों की ताक में रहती है।कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने कहा कि बीते समय में नासमझी के साथ घटी हिंसा में पंजाब की 35000 जानें आतंकवाद की भेंट चढ़ गई। उन्होंने कहा कि यदि किसानों के दरमियान बेचैनी अन्य राज्यों में भी फैल गई तो समूचा मुल्क आई.एस.आई. के ख़तरे अधीन आ जाएगा। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की पि_ू ताकतें भारत में रोष पैदा करने के लिए पूरा ज़ोर लगाएंगी। पिछले महीनों में पंजाब में 150 आतंकवादियों को गिरफ़्तार करने और बड़ी मात्रा में हथियार और गोला-बारूद बरामद किए जाने का जि़क्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि वह किसी को भी राज्य के शांतमई माहौल को भंग करने की इजाज़त नहीं देंगे, जो नए कृषि कानून ऐसा होने की संभावना पैदा करते हैं।ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी के जनरल सचिव और पंजाब मामलों के इंचार्ज हरीश रावत जो यहाँ मुख्यमंत्री के साथ उपस्थित थे, ने 2 अक्तूबर से शुरू होने वाली दस्तख़त मुहिम का ऐलान करते हुए कहा कि इससे नए कृषि कानूनों के विरुद्ध 2 करोड़ किसानों के दस्तख़त लिए जाएंगे। उन्होंने कहा कि किसानों के दस्तख़तों वाले पत्र 14 नवंबर को भारत के राष्ट्रपति को सौंपे जाएंगे, जिस दिन इत्तेफ़ाकऩ पंडित जवाहर लाल नेहरू का जन्म दिवस है। उन्होंने यह भी कहा कि इस लड़ाई को कानूनी निष्कर्ष पर ले जाने के लिए किसान सम्मेलन भी कराए जाएंगे।

कैप्टन अमरिन्दर सिंह को किसानों का रखवाला बताते हुए श्री रावत ने कहा कि किसान भाईचारा केंद्र के काले कानूनों के खि़लाफ़ लड़ाई में उनका नेतृत्व करने के लिए कैप्टन अमरिन्दर सिंह से उम्मीद रखता है। उन्होंने अकालियों पर तंज कसते हुए कहा कि अकाली लम्बा समय तक तो मूक दर्शक बन कर बैठे रहे और अब किसानों के हकों की लड़ाई का लाभ कमाने के लिए आ रहे हैं।अड़ानी जैसे बड़े कॉर्पोरेटों को खुश करने के लिए पंजाबियों और पंजाब के किसानों के साथ सौतेली माँ वाला सुलूक किए जाने की सख़्त आलोचना करते हुए कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने कहा, ‘‘क्या अडानी गरीब भारतियों को सस्ता भोजन देगा?’’ उन्होंने कहा कि यह कानून पंजाब और यहाँ के किसानों को तबाह करने के अलावा सार्वजनिक वितरण प्रणाली के लिए भी $खतरनाक साबित होंगे।नए कानूनों को मुल्क के संघीय ढांचे पर डाका मारने वाला कदम बताते हुए मुख्यमंत्री ने इन कृषि बिलों के कानून बन जाने को पंजाब के लिए काला दिन बताया। उन्होंने कहा कि जिस ढंग से पहले इनको अध्यादेशों के रास्ते लाया गया और फिर बिना कोई विचार-चर्चा किए संसद में जबरन पास किया जाना बहुत अफसोसजनक कार्यवाही है। उन्होंने कहा कि भाजपा और अकाली दल द्वारा फैलाए जा रहे झूठ के उलट हकीकत यह है कि पंजाब सरकार को यह अध्यादेश लाने संबंधी एक बार भी नहीं बताया गया।पिछले कई महीनों से बिलों का बचाव करने के लिए अकालियों की निंदा करते हुए मुख्यमंत्री ने फिर सवाल किया कि हरसिमरत बादल इस पूरे समय के दौरान क्या कर रहे थे और जब अध्यादेश लाए गए थे तो उसने मंत्री मंडल से इस्तीफ़ा क्यों नहीं दिया। उन्होंने अकालियों के किसानों के साथ खड़े होने के खोखले दावों को रद्द करते हुए कहा ‘‘अकालियों ने सर्वदलीय मीटिंग में हमारा विरोध क्यों किया? वह विधान सभा से क्यों भाग गए?’’ उन्होंने कहा कि यह दावे सिफऱ् पंजाब में सत्ता हथियाने के लिए हैं, परन्तु अब कोई भी उन पर भरोसा नहीं करता। उन्होंने आगे कहा कि शिरोमणि अकाली दल का एन.डी.ए. छोडऩे का फ़ैसला भी उनकी अपनी पार्टी के सदस्यों के विद्रोह का नतीजा था।कैप्टन अमरिन्दर ने स्पष्ट किया कि एमएसपी पर केंद्र के जुबानी भरोसे पर ऐतबार नहीं किया जा सकता। उन्होंने टिप्पणी की कि ‘‘जब वह संवैधानिक गारंटियों को तोड़ सकते हैं तो उनके जुबानी भरोसे पर कौन यकीन करेगा’’ और सवाल किया कि एमएसपी को इन एक्टों में किसानी का संवैधानिक हक क्यों नहीं बनाया गया।

कैप्टन अमरिन्दर ने कहा कि केंद्र में बैठे यह लोग कृषि संबंधी स्पष्ट तौर पर कुछ नहीं जानते, जिससे किसानों-आढ़तियों के लंबे समय के नाते को ख़त्म करने के लिए उनकी कोशिश का पता चला है। उन्होंने आगे कहा कि छोटे किसान, जिनकी पंजाब सरकार पिछले साढ़े तीन सालों से मदद करने की कोशिश कर रही है और जो किसान भाईचारे का 70 प्रतिशत हैं, सबसे अधिक प्रभावित होंगे। एक सवाल के जवाब में उन्होंने स्पष्ट किया कि पंजाब कांग्रेस के चुनावी घोषणा पत्र में एपीएमसी एक्ट के दायरे को बढ़ाने और सैंकड़े नई मंडियों / यार्ड स्थापित करने की बात की गई है, जिससे किसानों को आसान पहुँच प्रदान की जा सके।मुख्यमंत्री ने सबको राजनीति से ऊपर उठकर पंजाब और इसके लोगों, ख़ासकर किसानों की रक्षा के लिए एकजुट होकर केंद्र के काले कानूनों के विरुद्ध लडऩे की ज़रूरत पर ज़ोर दिया। इस समय लड़ाई किसानों और केंद्र सरकार के दरमियान है, परन्तु तथ्य यह है कि केंद्र द्वारा राज्यों की सभी शक्तियां छीनी जा रही हैं। उन्होंने चुटकी लेते हुए कहा ‘हमारे पास शराब की बिक्री से एक्साईज के अलावा और कुछ नहीं बचा है और इस सबके बावजूद केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमन का कहना है कि यह ‘ईश्वर की करनी’ है।यह जि़क्र करते हुए कि केंद्र सरकार पूछ रही है कि पंजाब के किसान विरोध क्यों कर रहे हैं, उन्होंने टिप्पणी की, ‘‘किसान और क्या करें? लड्डू बाँटें?’’ मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब के किसानों ने महामारी के समय के दौरान और कई सालों से न सिफऱ् देश का पेट भरा है, बल्कि भारत को अनाज के क्षेत्र में आत्मनिर्भर भी बनाया है। उन्होंने आगे कहा कि इन कानूनों से मंडी बोर्ड को होने वाली आमदन पर प्रभाव पडऩे के साथ-साथ गाँवों में विकास के काम भी ठप्प हो जाएंगे।एक सवाल के जवाब में मुख्यमंत्री ने कहा कि जब राहुल गांधी ने पहले ही कृषि कानूनों के विरुद्ध कमर कस ली है तो पंजाब कांग्रेस इन कानूनों के विरुद्ध देश व्यापक संघर्ष का नेतृत्व करने के लिए उनका समर्थन माँगेगी।एक सवाल के जवाब में कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने दोहराया कि कोविड से बचाव के लिए लगाई गई धारा 144 के अंतर्गत किसानों के विरुद्ध कोई कार्यवाही नहीं की जाएगी, जिनको अपनी रोज़ी-रोटी के लिए रोष प्रदर्शन करने के लिए मजबूर होना पड़ा है।पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रधान सुनील जाखड़ ने कहा कि यह लड़ाई लम्बी चलेगी, परन्तु कैप्टन अमरिन्दर सिंह किसानों के हितों की उसी तरह ही रक्षा करेंगे जैसे उन्होंने पहले राज्य के नदियों के पानी को बचाने के लिए किया था।

 

Tags: Captain Amarinder Singh , Amarinder Singh , Punjab Pradesh Congress Committee , Congress , Punjab Congress , Chandigarh , Chief Minister of Punjab , Punjab Government , Government of Punjab , Khatkar Kalan , SBS Nagar , Shaheed Bhagat Singh Nagar , Nawanshahr

 

 

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