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हिमाचल प्रगतिशील कृषि राज्य बनने की ओर अग्रसर

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5 Dariya News

27 May 2018

Last updated on: May 27, 2018, 00:00 IST

राज्य सरकार अगले पांच वर्षों के दौरान हिमाचल प्रदेश को जैविक कृषि राज्य में बदलने की परिकल्पना करती है। वर्तमान में 21,473 हेक्टेयर क्षेत्र में 39,790 किसान जैविक खेती कर रहे हैं। राज्य सरकार प्रदेश में स्वस्थ एवं रासायनिक तत्व रहित अनाज के उत्पादन के लिए एकीकृत दृष्टिकोण अपनाते हुए जैविक तथा शून्य लागत प्राकृतिक खेती प्रणाली को बढ़ावा दे रही है। राज्यपाल आचार्य देवव्रत की प्रेरणा तथा कृषि विशेषज्ञ पदमश्री सुभाष पालेकर के मार्गदर्शन में राज्य सरकार ने चालू वित्त वर्ष के लिए 25 करोड़ रुपये के प्रावधान के साथ ‘प्राकृतिक खेती, खुशहाल किसान’ नामक एक महत्वाकांक्षी योजना शुरू की है। यह योजना कम लागत की जलवायुपरक शून्य बजट प्राकृतिक खेती प्रणाली को अपनाकर प्रकृति के अनुरूप कृषि आय बढ़ाने की परिकल्पना पर आधारित है। इस प्रणाली से न केवल मिट्टी की उर्वरकता, पानी के रिसाव व संरधता में सुधार होगा बल्कि पर्यावरण प्रदूषण को कम करने के अलावा रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों का उपयोग भी हतोत्साहित करेगा। राज्य स्तर पर शून्य लागत प्राकृतिक खेती के कार्यान्वयन की निगरानी के लिये मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में एक राज्य स्तरीय समिति का गठन किया गया है। मंत्री तथा कृषि व संबद्ध विभागों के विभागाध्यक्ष समिति के सदस्य होंगे, जबकि अतिरिक्त मुख्य सचिव कृषि इसके सदस्य सचिव होंगे। कृषि निदेशालय में एक राज्य परियोजना कार्यान्वयन इकाई का गठन किया जाएगा। इसी तरह जिला और खण्ड स्तरों पर भी इकाईयों का गठन किया जाएगा। राज्य में जैविक कृषि के प्रोत्साहन के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय कार्य बल पहले ही अधिसूचित किया जा चुका है। 

यह शून्य लागत प्राकृतिक खेती के कार्यान्वयन से जुड़े सभी प्रस्तावों पर विचार करेगा तथा उन्हें मंजूरी देगा।शून्य लागत प्राकृतिक खेती को अपनाने के लिए अधिक से अधिक किसानों को प्रेरित करने के लिए क्षमता निर्माण और जन जागरूकता, इस योजना के प्रमुख घटक हैं। प्राकृतिक अथवा जैविक खेती के क्षेत्र में कार्य कर रहे स्वयं सेवी संगठनों, कृषक समितियों तथा एजेन्सियों को भी योजना के प्रसार और प्रमाणन गतिविधियों में शामिल किया जाएगा। प्रगतिशील किसानों का चयन प्रति क्लस्टर किया जाएगा और इन्हें शून्य लागत प्राकृतिक खेती का प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा तथा अच्छा प्रदर्शन करने वाले किसान, क्लस्टर स्तर पर स्त्रोत व्यक्ति (रिसोर्स पर्सन) हो सकते हैं। प्रस्ताविक क्लस्टरों में ऐसे किसान शामिल हो सकते हैं जो जैविक कृषि का कार्य नहीं कर रहे हैं, लेकिन वे किसानों की 100 प्रतिशत कवरेज के लिए प्रस्ताविक क्लस्टर के दायरे में आते हों। प्रशिक्षित प्रगतिशील किसान शून्य लागत प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए अन्य किसानों को प्रेरित करेंगे तथा उन्हें समर्थन प्रदान करेगे। इस सम्बन्ध में जिला टीमों द्वारा भी किसानों को पूर्ण समर्थन प्रदान किया जाएगा। आरम्भ में किसानों को छोटी इकाई में शून्य लागत प्राकृतिक कृषि अपनाने के लिए प्रेरित किया जाएगा तथा चरणबद्ध ढंग से वे अपने पूरे क्षेत्र को इसके तहत ला सकते हैं। किसानों को शिक्षित करने के लिए विभाग तथा जिला इकाईयों द्वारा खण्ड स्तर तक जन जागरूकता कार्यक्रमों तथा किसान गोष्ठियों का आयोजन किया जाएगा। स्त्रोत व्यक्ति एवं विशेषज्ञ मानदेय के लिए पात्र होंगे।चौधरी श्रवण कुमार हि.प्र. कृषि विश्वविद्यालय और डॉ. वाई.एस. परमार बागवानी एवं वानिकी विश्वविद्यालय के परीक्षणों के उपरान्त विभिन्न फसलों को व्यवहार्य बनाने के लिए पैकेज विकसित करेंगे। दोनों विश्वविद्यालयों द्वारा स्थान विशेष शून्य बजट प्राकृतिक कृषि के मिले जुले मॉडल विकसित किए जाएंगे। 

शून्य लागत प्राकृतिक कृषि पूरी तरह से देसी गाय की नस्लों पर आधारित है। पशुपालन विभाग द्वारा उच्च किस्म की घरेलू गाय जर्मप्लाज्म की उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी। शून्य लागत प्राकृतिक खेती इनपुट हेतु बुनियादी ढांचे की स्थापना के लिए किसानों को प्रोत्साहन प्रदान किए जाएंगे। कृषि इनपुट की उपलब्धता सुनिश्चित बनाने के उद्देश्य से प्रत्येक गांव में एक दुकान की सुविधा प्रदान की जाएगी। शून्य लागत प्राकृतिक खेती कर रहे किसान जिनके पास भारतीय नस्ल की गाय हैं, वे दुकान के मालिक होंगे तथा इस खेती को अपनाने वाले किसानों को कम दरों पर कृषि इनपुट की बिक्री करेंगे। दुकान मालिक को बाह्य इनपुट, उपकरणों, पैकेजिंग, ड्रम, कन्टेनर व किराया इत्यादि के लिए तीन वर्षों के लिए 50 हजार रुपये की एकमुश्त सहायता प्रदान की जाएगी। शून्य लागत प्राकृतिक खेती के लिए अनिवार्य इनपुट गाय का गोबर तथा मूत्र के कुशल संग्रह की सुविधा के लिए किसानों को पशुशालाओं तथा मूत्र संग्रहण प्रणाली के निर्माण के लिए 80 प्रतिशत सहायता प्रदान की जाएगी। कीट प्रबन्धन के लिए 75 प्रतिशत सहायता प्रदान करने का प्रस्ताव है। शून्य लागत कृषि उत्पादों के विपणन की सुविधा के लिए भागीदारी गारंटी प्रणाली/तृतीय पक्ष प्रमाणीकरण अपनाया जाएगा। भारत सरकार की दिशा-निर्देशानुसार आंतरिक नियंत्रण प्रणाली के लिए सहायता प्रदान की जाएगी। इस योजना से न केवल राज्य में प्रगतिशील खेती को बढ़ावा मिलेगा बल्कि आने वाले वर्षों में सभी किसानों को चरणबद्ध तरीके से प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए प्रेरित किया जाएगा, जिससे भविष्य में कृषि क्षेत्र में महत्वपूर्ण बदलाव आएगा।

 

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