प्रदेश का सबसे बड़ा चिकित्सालय, इंदिरा गांधी मेडिकल कालेज एवं अस्पताल, शिमला गरीब व निराश्रित रोगियों को समय पर सहायता प्रदान करने वाला प्रमुख केंद्र बनकर उभरा है। अस्पताल में प्रतिदिन ऐसे असंख्य रोगी आते हैं, जो गंभीर बीमारी से पीड़ित होते हैं तथा जिनकी देखभाल करने वाला कोई नहीं होता और उनकी आर्थिक स्थिति भी काफी कमजोर होती है। ऐसे रोगियों को आईजीएमसी, शिमला में न केवल सहारा मिलता है बल्कि उनका पूर्ण उपचार भी सुनिश्चित बनाया जाता है।
आईजीएमसी, शिमला में बेसहारा मरीजों की सहायता के लिए रोगी कल्याण समिति ने निर्धन रोगी कल्याण कोष स्थापित किया है। गत सात महीनों के दौरान ऐसे 190 असहाय व गरीब मरीजों के उपचार पर लगभग सात लाख रुपये खर्च किए गए हैं।आईजीएमसी के वरिष्ठ चिकित्सा अधीक्षक डॉ. रमेश चंद ने कहा कि गरीब व बेसहारा मरीजों के ईलाज के लिए दवाइयों का खर्च रोगी कल्याण कोष के तहत किया जाता है। प्रत्येक मरीज के ईलाज के लिए 5000 रुपये तक व्यय करने का प्रावधान किया गया है।उन्होंने कहा कि ऐसे गरीब मरीजों को मेडिकल टेस्ट, सीटी स्कैन, एमआरआई आदि की सुविधा भी निःशुल्क दी जा रही है। यह सुविधाएं सम्बन्धित चिकित्सकों के परामर्श के बाद ही प्रदान की जाती है। उन्होंने कहा कि इस फंड की स्थापना से ऐसे सैंकड़ों मरीजों के लिए मदद मिल रही है, जो खराब वित्तीय स्थिति या अन्य सहायता न मिल पाने के कारण अपना ईलाज करवाने में सक्षम नहीं होते।