नोटबंदी-विरोधी कांग्रेस की राष्ट्रीय स्तरीय मुहिम के तहत ए.आई.सी.सी. महासचिव पंजाब मामलों की इंचार्ज आशा कुमारी द्वारा शुक्रवार को मोदी से बगैर शर्त माफी मांगने व नोटबंदी के चलते प्रभावित परिवारों को मुआवजा दिए जाने की मांग करते हुए, राज्य में उक्त मुद्दे पर मुहिम शुरू करने का ऐलान किया।यहां पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए आशा कुमारी ने कहा कि प्रधानमंत्री ने हालात के स्थिर होने के लिए नोटबंदी से पहले 50 दिन मांगे थे, लेकिन स्थिरता से कोसों दूर, चीजें बद से बदतर होती गईं।उन्होंने कहा कि इन 50 दिनों के खत्म होने के बाद, सांसद व वरिष्ठ कांग्रेसी नेता अहमद पटेल के नेतृत्व वाली विशेष कमेटी द्वारा शुरू की राष्ट्रीय स्तरीय मुहिम के हिस्से के तहत कांग्रेस ने नोटबंदी के खिलाफ सड़कों पर उतरने का फैसला लिया है। ए.आई.सी.सी की इस कमेटी के अन्य सदस्यों में वरिष्ठ पार्टी नेता रणदीप सुरजेवाला व ऑस्कर फर्नांडिस भी हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस नोटबंदी के मुद्दे पर ब्लॉक स्तर तक जाएगी व 2 जनवरी को पूरे देश में जिलास्तर पर पत्रकार वार्ताएं आयोजित की जाएंगी।यह पूछे जाने पर कि क्या कांग्रेस को नोटबंदी से फायदा होगा, आशा कुमारी ने कहा कि सवाल किसी को फायदा होने का नहीं है, बल्कि भारत के लोगों को होने वाली परेशानी का है और इसे पार्टी किसी भी कीमत पर सहन नहीं करेगी।
आशा कुमारी ने कहा कि नोटबंदी की प्रक्रिया में यहां तक कि आर.बी.आई को भी सीमित कर दिया है और लेनदेन में 15.2 लाख करोड़ रुपए की करंसी का चलन होने के बावजूद बैंकों ने अभी तक 17 लाख करोड़ रुपए जमा कर लिए हैं। इससे साफ इशारा मिलता है कि बैंकों ने जाली करंसी को भी जमा कर लिया है। उन्होंने कहा कि बाजार से 86 प्रतिशत करंसी को बाहर करते हुए, मोदी ने 1 प्रतिशत काले धन वालों को टारगेट करने का दावा करके देश के 99 प्रतिशत ईमानदार व मेहनती लोगों को निशाना बनाया है और देश को आर्थिक अराजकता की ओर धकेलते हुए विकास को स्थिरावस्था में ला दिया है।इस दिशा में भारत के गरीब, किसान, मजदूर, दुकानदार, छोटे बिजनेस, मिडल क्लास व खासतौर पर पूरा असंगठित क्षेत्र सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ है। आशा कुमारी ने नोटबंदी की प्रक्रिया को भारत का अब तक का सबसे बड़ा घोटाला करार दिया, जिसमें आर.एस.एस व भाजपा के लोगों ने नोटबंदी के कदम से पहले देशभर में सैंकड़ों करोड़ों रुपए की संपत्तियां खरीदी थीं।उन्होंने खुलासा किया कि वास्तव में कांग्रेस ने इनमें से कई संपत्तियों की जानकारी रिलीज की है और मोदी व भाजपा अध्यक्ष से बीते एक साल के दौरान भाजपा व आर.एस.एस. द्वारा खरीदी गई संभी संपत्तियों की जानकारियां सार्वजनिक करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि बिरला व सहारा से पैसे प्राप्त करने संबंधी दस्तावेज सामने आने के बाद खुद मोदी की विश्वसनियता पर शक के बादल छाने लगे हैं।
आशा कुमारी ने कहा कि कांग्रेस भारत की जनता की तरफ से बिना किसी देरी से नकदी निकालने पर सभी पाबंदियां हटाए जाने की मांग करती है और तब तक सभी खाता धारकों को 18 प्रतिशत वार्षिक ब्याज दर दिया जाना चाहिए।इसी तरह, खाद्य सुरक्षा एक्ट के तहत जन वितरण प्रणाली के तहत बांटे जाने वाले राशन का रेट एक साल तक आधा किया जाना चाहिए, किसानों को सभी रबी की फसलों के लिए एम.एस.पी व उसके ऊपर 20 प्रतिशत का एकमुश्त विशेष बोनस दिया जाना चाहिए।पार्टी ने नोटबंदी के चलते महिलाओं को हुई भारी परिशानी का मुआवजा देते हुए, प्रत्येक बी.पी.एल परिवार से कम-से-कम एक महिला के खाते में 25000 रुपए जमा करवाने की भी मांग की है। इसके अलावा, एक साल तक मनरेगा के तहत गारंटिड काम के दिनों व दिहाड़ी को दोगुणा किया जाना चाहिए और सरकार को 8 नवंबर, 2016 के बाद से अपनी नौकरियां खो चुके सभी लोगों की पहचान करने व उनकी जानकारी दर्ज करने हेतु विशेष मुहिम चलानी चाहिए व उन्हें 31 मार्च, 2017 तक न्यूनतम मजदूरी दर पर मुआवजा मुहैया करवानी चाहिए।आशा कुमारी ने कहा कि कांग्रेस सभी छोटे दुकानदारों व बिजनेसों को आयकर व बिक्री कर पर 50 प्रतिशत छूट दिए जाने की भी मांग की है। उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार को इस छूट से राज्य सरकारों को होने वाले वित्तीय नुक्सान का मुआवजा भी देना चाहिए।आशा कुमारी ने कहा कि कांगे्रस पार्टी द्वारा पूछे गए पांच सवालों पर मोदी से श्वेत पत्र मांगती है।
इस दौरान उन्होंने उन पांच सवालों का दोहराया, जो हैं:
1. 8 नवंबर, 2016 से कितना काला धन सामने आया है?
2. नोटबंदी के चलते राष्ट्र को कितना आर्थिक नुक्सान हुआ है? नीति के ऐलान के बाद से कितनी नौकरियों व अजीविका का नुक्सान हुआ है?
3. नोटबंदी के चलते कितनी जिंदगियां गई हैं? क्यों सरकार ने मृतकों के परिवारों को कोई मुआवजा नहीं दिया है?
4. नोटबंदी को लागू करने से पहले क्या सलाह-मशवरा व तैयारियां की गई थीं? क्यों लोगों पर ऐसी कठोर नीति थोपने से पहले माहिरों, अर्थशास्त्रियां या आर.बी.आई से सलाह नहीं की गई?
5. क्या सरकार के पास 8 नवंबर, 2016 से पहले बैंकों में 25 लाख या उससे अधिक नकदी जमा करवाने वाले सभी लोगों, प्रतिष्ठानों एवं संस्थाओं के नाम हैं?