भारत और मलेशिया आईएसआईएस की गतिविधियों से पैदा हुए ख़तरे का सक्रिय रूप से डटकर मुकाबला करने के मुद्दे पर एक-दूसरे के साथ पूर्ण रूप से सहयोग करने के लिए सहमत हुए हैं। मलेशियाई उप प्रधानमंत्री एवं गृह मंत्री श्री दातो सेरी अहमद ज़ाहिद हमीदी के साथ आज हुई प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता के दौरान केन्द्रीय गृह मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत और मलेशिया जैसे लोकतांत्रिक देशों में आईएसआईएस की तेज़ी से बढ़ती खतरनाक गतिविधियों को लेकर हम अत्यधिक चिंतित हैं। उन्होंने आगे कहा कि, आईएसआईएस अतिवादी एवं आतंकवादी सोच से युवाओं को आकर्षित करने के लिए एवं भर्ती करने के लिए हमारे देशों का उपयोग करने लगा है। श्री राजनाथ सिंह ने कहा, यदि हम इस समस्या को आंतरिक रूप से हल नहीं करते, और यदि एक-दूसरे के साथ मज़बूत खुफिया जानकारियां साझा कर सहयोग नहीं करते हैं तो हमारे युवाओं में ज़हर घोलने और उन्हें गलत राह पर लेकर जाने वाली इस विचारधारा का मुकाबला करना हमारे लिए अत्यंत कठिन हो जाएगा। उन्होंने कहा कि, भारत की रुचि मलेशिया द्वारा चलाए जा रहे अतिवाद विरोधी कार्यक्रम के बारे में अधिक से अधिक जानकारी हासिल करने में भी है।
केन्द्रीय गृह मंत्री ने पिछले वर्ष नवंबर में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की मलेशिया यात्रा के दौरान साइबर सुरक्षा सहयोग के संबंध में हस्ताक्षर किए गए समझौता ज्ञापन के अंतर्गत होने वाली नियमित बैठकों के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय अपराध और आतंकवाद विरोधी विषयों पर संयुक्त कार्य समूहों की अधिक से अधिक नियमित बैठकों का प्रस्ताव रखा। श्री राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत अंतरराष्ट्रीय अपराध के संबंध में तैयार किए गए समझौता ज्ञापन के मसौदे पर प्राप्त मलेशिया की टिप्पणी का अध्ययन कर रहा है और उम्मीद है कि इस पर जल्द ही हस्ताक्षर कर दिए जाएंगे। श्री राजनाथ सिंह ने यह उम्मीद भी जताई कि सजायाफ्ता कैदियों के स्थानांतरण को लेकर तैयार मसौदे को भी तीव्र गति से आगे बढ़ाया जाएगा। कुआलालंपुर से सहयोग की मांग करते हुए केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि विदेशी ज़मीन से अपनी गतिविधियों को अंजाम देने वाले आतंकियों का सामना करने को लेकर भारत की चिंता लगातार जारी है।
द्विपक्षीय सुरक्षा सहयोग, विशेषरूप से आतंकवाद विरोधी गतिविधियों पर संतोष व्यक्त करते हुए श्री राजनाथ सिंह ने मलेशिया सरकार की, इस बात को लेकर सराहना भी कि कि पिछले कुछ सालों के दौरान भारत को जिन आतंकियों की तलाश थी, मलेशिया ने उन्हें भारत को सौंपा। उन्होंने आगे कहा कि, हमारी सुरक्षा एजेंसियों विशेषरूप से आतंकवाद की रोकथाम के लिए भारत के इंटेलिजेंस ब्यूरो के साथ करीबी रूप से काम करने वाले मलेशियन स्पेशल ब्रांच के बीच अत्यधिक करीबी सहयोग कायम है, जोकि सराहना का विषय है। दोनों देशों ने प्रत्यर्पण संधि और जाली भारतीय करंसी नोट (एफआईसीएन) आदि अहम मुद्दों पर भी विस्तृत चर्चा की। इस दौरान, भारत के दौरे पर आए प्रतिनिधिमंडल ने मलेशिया में बंदियों के लिए एकीकृत पुनर्वास मॉड्युल की एक प्रति भी प्रस्तुत की। भारतीय प्रतिनिधिनमंडल में केन्द्रीय गृह राज्य मंत्री श्री गंगाराम हंसराज अहीर और श्री किरेन रिजिजु एवं गृह मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे, जबकि मलेशियाई प्रतिनिधिमंडल में उप महासचिव (द्विपक्षीय संबंध), श्री दातो मुहम्मद शहरुल इकराम याकोब, भारत में मलेशिया के उच्चायुक्त श्री दातुक नैमुन अशकली मोहम्मद और अन्य अधिकारीगण मौजूद थे।