सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय ने आज चंडीगढ़ में तीन दिवसीय राष्ट्रीय चिंतन शिविर का शुभारंभ किया, जिसमें राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को एक मंच पर लाकर भारत की सामाजिक न्याय सेवा वितरण प्रणाली को सुदृढ़ करने पर विशेष जोर दिया गया। इस शिविर का संयुक्त रूप से उद्घाटन पंजाब के राज्यपाल एवं यू.टी. चंडीगढ़ के प्रशासक श्री गुलाब चंद कटारिया तथा सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री डॉ. वीरेंद्र कुमार ने, राज्य मंत्री श्री बी. एल. वर्मा की उपस्थिति में किया।
“अंत्योदय का संकल्प, अमृत काल का प्रतिबिंब: विकसित भारत@2047” थीम पर आयोजित इस कार्यक्रम में अंतिम छोर तक पहुंच, प्रौद्योगिकी आधारित सुशासन तथा वंचित वर्गों के समावेशी सशक्तिकरण पर विशेष बल दिया जा रहा है। इस अवसर पर मध्य प्रदेश सरकार के सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन कल्याण मंत्री श्री नारायण सिंह कुशवाहा; हरियाणा सरकार के सामाजिक न्याय, अधिकारिता, अनुसूचित जाति एवं पिछड़ा वर्ग कल्याण एवं अंत्योदय मंत्री श्री कृष्ण कुमार बेदी; दिल्ली सरकार के समाज कल्याण, एससी/एसटी कल्याण एवं सहकारिता मंत्री श्री रविंदर इंद्राज सिंह; मिजोरम सरकार की सामाजिक कल्याण, महिला एवं बाल विकास मंत्री सुश्री पी. लालरिनपुई; तथा उत्तर प्रदेश सरकार के पिछड़ा वर्ग कल्याण एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण मंत्री श्री नरेंद्र कश्यप भी उपस्थित रहे।
इस अवसर पर मंत्रालय की प्रमुख पहलों, प्रमुख योजनाओं एवं उपलब्धियों को प्रदर्शित करने वाली प्रदर्शनी का उद्घाटन भी राज्यपाल श्री गुलाब चंद कटारिया ने केंद्रीय मंत्री डॉ. वीरेंद्र कुमार एवं राज्य मंत्री श्री बी. एल. वर्मा की उपस्थिति में किया।पंजाब के राज्यपाल एवं यू.टी. चंडीगढ़ के प्रशासक श्री गुलाब चंद कटारिया ने चिंतन शिविर को एक महत्वपूर्ण द्विपक्षीय संवाद मंच बताते हुए कहा कि यह नीति निर्माण को जमीनी वास्तविकताओं से जोड़ता है और यह सुनिश्चित करता है कि कल्याणकारी योजनाओं का लाभ सही लाभार्थियों तक बिना विलंब पहुंचे।
उन्होंने प्रभावी क्रियान्वयन, केंद्र और राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों के बीच सशक्त समन्वय तथा सामुदायिक सहभागिता की आवश्यकता पर बल दिया, ताकि संतृप्ति सुनिश्चित हो और कोई भी पात्र व्यक्ति वंचित न रहे।समर्पित एप्लिकेशन के शुभारंभ की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि प्रौद्योगिकी आधारित समाधान सटीक डेटा के माध्यम से लाभ वितरण को सुव्यवस्थित करेंगे, पारदर्शिता बढ़ाएंगे और लीकेज को समाप्त करेंगे।
उन्होंने क्रियान्वयन में कमियों की पहचान, अंतिम छोर तक सेवाओं की डिलीवरी को सुदृढ़ करने तथा नीति निर्माण और क्रियान्वयन में अधिक संवेदनशील, जन-केंद्रित दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। विकसित भारत 2047 के दृष्टिकोण पर प्रकाश डालते हुए राज्यपाल ने कहा कि यह लक्ष्य केवल अंत्योदय के सिद्धांत पर आधारित समावेशी विकास से ही प्राप्त किया जा सकता है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि चिंतन शिविर से सामाजिक सुरक्षा को सुदृढ़ करने तथा जमीनी स्तर पर गरिमा, समावेशन और सामाजिक सद्भाव सुनिश्चित करने हेतु व्यावहारिक और समयबद्ध सिफारिशें प्राप्त होंगी।
अपने उद्घाटन संबोधन में सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री डॉ. वीरेंद्र कुमार ने कहा कि यह चिंतन शिविर केवल नीति निर्माताओं और प्रशासकों की नियमित बैठक नहीं है, बल्कि विचार, प्रतिबद्धता और साझा राष्ट्रीय उद्देश्य का एक सामूहिक मंच है। उन्होंने कहा कि विकसित भारत 2047 की परिकल्पना न्याय, समानता, गरिमा और अवसर के आधार पर टिकी है और समावेशी विकास का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि प्रगति उन लोगों तक पहुंचे जो ऐतिहासिक रूप से हाशिए पर रहे हैं।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि इस शिविर में होने वाले विचार-विमर्श को तीन प्रमुख स्तंभों—गरिमा, सुगमता और निरंतरता—द्वारा निर्देशित होना चाहिए। उन्होंने कहा कि चाहे वह शिक्षा की आकांक्षा रखने वाला छात्र हो, देखभाल की आवश्यकता वाला वरिष्ठ नागरिक हो या आत्मनिर्भरता की ओर अग्रसर दिव्यांगजन, सार्वजनिक नीतियों को कल्याण से आगे बढ़कर सशक्तिकरण की दिशा में काम करना होगा और प्रणालियों को मानवीय, उत्तरदायी और समावेशी बनाना होगा।
डॉ. वीरेंद्र कुमार ने कहा कि लोगों के लिए निर्धारित लाभ केवल नीति दस्तावेजों तक सीमित नहीं रहने चाहिए, बल्कि बिना प्रक्रियात्मक बाधाओं के लाभार्थियों तक पहुंचने चाहिए। उन्होंने प्रौद्योगिकी आधारित और एकीकृत उपायों, जैसे सरलीकृत छात्रवृत्ति प्रणालियां, वरिष्ठ नागरिकों के लिए सेवा पहुंच तथा वंचित युवाओं के लिए सहायता संरचनाओं को दीर्घकालिक सशक्तिकरण के महत्वपूर्ण तत्व बताया।
इस अवसर पर सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री श्री बी. एल. वर्मा ने कहा कि यह चिंतन शिविर माननीय प्रधानमंत्री के उस दृष्टिकोण को प्रतिबिंबित करता है, जिसके तहत केंद्र, राज्य और केंद्रशासित प्रदेश एक टीम के रूप में मिलकर कल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन को सुनिश्चित करते हैं। उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम “विकसित भारत @2047” के संकल्प को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जिसमें सामाजिक न्याय को केंद्र में रखते हुए प्रत्येक नागरिक, विशेषकर वंचित वर्गों के लिए समानता, गरिमा और समावेशन सुनिश्चित करने का लक्ष्य है।
श्री वर्मा ने कहा कि मंत्रालय की प्राथमिकताओं में वंचितों तक पहुंच, सेवाओं की सुगमता में सुधार, प्रक्रियाओं का सरलीकरण और लाभार्थी-केंद्रित प्रशासन शामिल है। उन्होंने कहा कि यह चिंतन शिविर केवल चर्चा तक सीमित नहीं है, बल्कि विषयगत समूहों, श्रेष्ठ प्रथाओं के आदान-प्रदान और क्रियान्वयन योग्य सिफारिशों के माध्यम से ठोस परिणामों तक पहुंचने के लिए आयोजित किया गया है।
सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के सचिव श्री सुधांश पंत ने कहा कि यह चिंतन शिविर अंतिम व्यक्ति तक पहले पहुंचने और समावेशी एवं परिवर्तनकारी विकास सुनिश्चित करने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग की सचिव सुश्री वी. विद्यावती ने कहा, “विकसित भारत 2047 का लक्ष्य एक समावेशी भारत के बिना संभव नहीं है, जहां दिव्यांगजनों सहित समाज के सभी वर्गों को पूर्ण रूप से शामिल कर विकास की मुख्यधारा में सहभागी बनाया जाए।”
उद्घाटन सत्र की एक प्रमुख उपलब्धि विभिन्न डिजिटल प्लेटफॉर्म और ज्ञान संसाधनों का शुभारंभ रहा, जिनका उद्देश्य सुगमता, पारदर्शिता और सेवा वितरण को सुदृढ़ करना है। इनमें समावेश पोर्टल, नशा मुक्त भारत अभियान को सशक्त करने हेतु एनएमबीए 2.0 ऐप, छात्रवृत्ति सेवाओं के सरलीकरण हेतु सेतु ऐप तथा कमजोर वर्गों के पुनर्वास एवं पहुंच के लिए स्माइल ऐप शामिल हैं।
इस अवसर पर डिमेंशिया देखभाल गृहों के लिए न्यूनतम मानक तथा भिक्षुक गृहों के लिए मॉडल दिशा-निर्देशों पर आधारित प्रकाशन का भी विमोचन किया गया, जिससे राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों को संस्थागत देखभाल और पुनर्वास ढांचे को सुदृढ़ करने में सहायता मिलेगी। सामाजिक क्षेत्र में क्षमता निर्माण, प्रशिक्षण और अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय सामाजिक रक्षा संस्थान (NISD) और सहयोगी संस्थानों के बीच समझौता ज्ञापनों (MoUs) पर हस्ताक्षर भी किए गए।
इस अवसर पर विभिन्न राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के नशा मुक्ति मित्रों को मादक द्रव्य उन्मूलन में उनके उत्कृष्ट जमीनी योगदान के लिए सम्मानित किया गया। उनके प्रयासों को नशामुक्त समाज के निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण माना गया। चिंतन शिविर आगामी दो दिनों तक जारी रहेगा, जिसमें विषयगत चर्चाएं, समूह सत्र और प्रस्तुतियां आयोजित की जाएंगी, जिनका उद्देश्य सामाजिक न्याय एवं सशक्तिकरण कार्यक्रमों के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु ठोस सिफारिशें तैयार करना है।