राष्ट्रीय एचआईवी/एड्स सम्मेलन AIDSCON–14: “एड्स मुक्त विश्व की ओर” का शुभारंभ आज होटल माउंटव्यू, चंडीगढ़ में किया गया। यह दो दिवसीय सम्मेलन चण्डीगढ़ स्टेट एड्स कंट्रोल सोसाइटी तथा नेशनल एड्स कंट्रोल संगठन, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित किया जा रहा है।
सम्मेलन में देशभर से आए प्रतिनिधियों ने भाग लिया। उद्घाटन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में श्री एच. राजेश प्रसाद, आईएएस, मुख्य सचिव, यूटी चंडीगढ़ उपस्थित रहे। कार्यक्रम में श्री मंदीप सिंह बराड़, आईएएस, सचिव स्वास्थ्य, यूटी चंडीगढ़ तथा डॉ. सुमन सिंह, निदेशक स्वास्थ्य सेवाएं, यूटी चंडीगढ़ भी उपस्थित रहे।
मुख्य सचिव ने अपने संबोधन में राष्ट्रीय एड्स एवं यौन संचारित संक्रमण नियंत्रण कार्यक्रम (NACP) के अंतर्गत भारत की संगठित एचआईवी प्रतिक्रिया की सराहना की तथा साक्ष्य-आधारित एवं सामुदायिक सहभागिता पर आधारित रणनीतियों के माध्यम से महामारी नियंत्रण के प्रति प्रशासन की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने 95-95-95 लक्ष्य से आगे बढ़कर 99 प्रतिशत से अधिक उपलब्धि प्राप्त करने पर बल दिया तथा कहा कि जो व्यक्ति अपनी एचआईवी स्थिति से अनभिज्ञ हैं, वे समाज के लिए जोखिम हैं।
उन्होंने उच्च जोखिम समूहों को निःशुल्क एवं गोपनीय एचआईवी जांच के लिए आगे आने हेतु प्रेरित करने का आह्वान किया। सचिव स्वास्थ्य, श्री मंदीप सिंह बराड़ ने कहा कि निरंतर सहयोग, वैज्ञानिक प्रगति और उत्तरदायी प्रशासन के माध्यम से एड्स-मुक्त पीढ़ी की दिशा में आगे बढ़ा जा सकता है।
नाको की निदेशक, सुश्री भारती साहई ने “मिशन एड्स सुरक्षा: 95-95-99 लक्ष्य एवं ट्रिपल एलिमिनेशन की दिशा में रणनीतिक प्राथमिकताएं” विषय पर संबोधन दिया। उन्होंने परीक्षण रणनीतियों को सुदृढ़ करने, एआरटी उपचार पद्धतियों के अनुकूलन, वायरल लोड मॉनिटरिंग के विस्तार तथा एचआईवी, टीबी एवं वायरल हेपेटाइटिस के एकीकृत प्रबंधन पर बल दिया।
चंडीगढ़ सैक्स की परियोजना निदेशक, डॉ. सद्भावना पंडित ने स्वागत भाषण देते हुए चंडीगढ़ में एचआईवी रोकथाम, देखभाल एवं सामुदायिक सहभागिता में हुई प्रगति का उल्लेख किया। उन्होंने दिसंबर 2026 तक 95-95-95 लक्ष्य प्राप्त कर 95-95-99 की ओर अग्रसर होने का आह्वान किया तथा कहा कि एड्स-मुक्त विश्व के लिए सरकार, स्वास्थ्य तंत्र, नागरिक समाज, सामुदायिक नेटवर्क, अकादमिक संस्थानों एवं विकास साझेदारों के बीच मजबूत सहभागिता आवश्यक है।
निदेशक स्वास्थ्य सेवाएं, डॉ. सुमन सिंह ने कहा कि राष्ट्रीय कार्यक्रम की प्रमुख उपलब्धियों में से एक विकेंद्रीकरण है, जिसके माध्यम से सेवाएं समुदायों के निकट पहुंची हैं। सामुदायिक आधारित जांच, विभेदित एआरटी वितरण मॉडल, वायरल लोड मॉनिटरिंग तथा एकीकृत परामर्श सेवाओं ने उपचार परिणामों को बेहतर बनाया है।
कार्यक्रम के दौरान सम्मेलन पुस्तिका “संकल्प” का विमोचन किया गया। उद्घाटन सत्र धन्यवाद प्रस्ताव के साथ संपन्न हुआ। इसके उपरांत वैज्ञानिक सत्र प्रारंभ हुए।
सत्र–1: “निदान से स्थायी दमन तक – एचआईवी देखभाल श्रृंखला को सुदृढ़ करना” में प्रयोगशाला प्रणालियों की प्रगति, वायरल लोड परीक्षण, पीएलएचआईवी में सह-रुग्णताओं का दीर्घकालिक प्रबंधन तथा एनएसीपी के अंतर्गत एसटीआई प्रयोगशालाओं को सुदृढ़ करने पर चर्चा हुई।
डॉ. ईश्वर गिलाडा ने एचआईवी के साथ वृद्धावस्था एवं सह-रुग्णताओं के प्रबंधन पर विचार प्रस्तुत किए।
सत्र–2: “परिवर्तित होती महामारी और एकीकृत प्रतिक्रिया” में एचआईवी-टीबी सह-संक्रमण, बदलते महामारी विज्ञान रुझान, सामुदायिक एआरटी अनुपालन मॉडल तथा हेपेटाइटिस-बी जागरूकता पर चर्चा हुई।
डॉ. सुनील के. अरोड़ा ने एचआईवी-टीबी सह-संक्रमण से संबंधित मुद्दों पर प्रकाश डाला।
दोपहर पश्चात सत्र–3: “सुरक्षित रक्त सुनिश्चित करना” में रक्तदाताओं की भर्ती एवं प्रतिधारण, अद्यतन दिशानिर्देश, परामर्श, प्रतिकूल प्रतिक्रियाएं तथा सुरक्षित रक्त व्यवस्था हेतु एफेरेसिस सेवाओं की आवश्यकता पर चर्चा की गई।
अंतिम सत्र–4: “बाधाओं को तोड़ना – कलंक, जोखिम और सेवाओं तक पहुंच” में पीएलएचआईवी के साथ होने वाले भेदभाव, उच्च जोखिम समूहों के जोखिम आकलन, जागरूकता पहल एवं BREAKFREE+ जैसी डिजिटल पहलों पर विचार-विमर्श किया गया।
प्रथम दिवस में देशभर से आए चिकित्सकों, महामारी विशेषज्ञों, जनस्वास्थ्य प्रशासकों, शोधकर्ताओं, सामुदायिक प्रतिनिधियों एवं विकास भागीदारों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। विचार-विमर्श ने 95-95-99 लक्ष्यों की प्राप्ति एवं एड्स-मुक्त भविष्य की दिशा में सामूहिक प्रतिबद्धता को सुदृढ़ किया।
सम्मेलन का दूसरा दिवस नवाचार, डिजिटल हस्तक्षेप, सामुदायिक नेतृत्व मॉडल, प्रिसीजन प्रिवेंशन एवं एकीकृत एचआईवी देखभाल रणनीतियों पर केंद्रित रहेगा।